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देश के कुछ शहरों में प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ गया है कि वह आम आदमी को ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चों को भी प्रभावित कर रहा है। इससे बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को खास एहतियात बरतने की जरूरत है। © Shutterstock
हर एक लाख में 85 बच्चे हवा में घुले जहर का शिकार हो रहे हैं। हवा में घुला ये जहर सबसे ज्यादा मार बच्चों के फेफड़ों पर ही करता है। बच्चे ही नहीं ज़हरीली हवा प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी बहुत ख़तरनाक है। अगर महिला को दमा की बीमारी है तो ये मुश्किल और बढ़ सकती है। यह भी पढ़ें - ये पटाखा फैलाता है सबसे ज्यादा प्रदूषण, न करें इस्तेमाल
प्री मेच्योर डिलीवरी का रहता है जोखिम
दमा पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए आखिरी छह सप्ताह का समय काफी गंभीर होता है। अत्यधिक प्रदूषण वाले कणों, जैसे एसिड, मेटल और हवा में मौजूद धूल कणों के संपर्क में आने से भी समयपूर्व प्रसव का खतरा बढ़ जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, ऐसी गर्भवती महिलाएं जिन्हें दमा है, जब वायु प्रदूषण के संपर्क में आती हैं तो उनमें निर्धारित समय से पूर्व प्रसव की आशंका बढ़ जाती है। यह जानकारी जरनल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनॉलॉजी में प्रकाशित हो चुकी है। यह भी पढ़ें - इन कारणों से हो सकती है प्री मेच्योर डिलीवरी, ऐसे करें बचाव
बढ़ रहा है सांस के रोगों का खतरा
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि दमा से पीड़ित लोगों को वायु प्रदूषण से बचने के लिए अत्यधिक प्रदूषण के समय घर से बाहर जाने से परहेज करना चाहिए। साथ ही हमें वायु प्रदूषण कम करने के उपाय करने चाहिए। वायु प्रदूषण हमारी सांस प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है और दमा, ब्रांकाइटिस, लंग कैंसर, टीबी और निमोनिया जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। यह भी पढ़ें - स्मॉग से बचने के लिए खरीदना चाह रहे हैं मास्क, तो यह भी पढ़ लें
बरतें ये सावधानियां