
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
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Pregnancy Post 35 age: 35 साल की उम्र के बाद जब महिलाएं गर्भधारण करती हैं तो उन्हें कई तरह की सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं और कुछ बातों पर बहुत सावधानी से फैसला भी लेना पड़ता है। 35 के पार महिलाओं को सही गाइडेंस और खुद का सही तरीके से ध्यान रखने की जरूरत होती है। जैसे उन्हें फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स से खुद के नियमित चेकअप्स कराने होते हैं। इससे उन्हें लेट प्रेगनेंसी की मदद से भी मां बनने में सफलता हासिल हो सकती है।
फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. रूपाली तांबे (Dr Rupali Tambe, Fertility consultant Nova IVF Pune) ने इसी विषय पर बात की और बताया कि 35-40 साल की उम्र के बाद मां बनने का फैसला लेने वाली महिलाओं को किन बातों का ध्यान देना चाहिए। डॉ.तांबे ने कुछ टिप्स भी दीं जो महिलाओं को इस महत्वपूर्ण समय में काम आएंगी। आइए जानें क्या है उनकी ये टिप्स।
डॉ. रूपाली तांबे कहती हैं कि प्रेगनेंसी के लिए 35 साल के बाद की उम्रको एडवांस मैटर्नल एज (advanced maternal age) कहा जाता है। इस उम्र में गर्भधारण करने के साथ जहां कई तरह की समस्याओं और कॉम्प्लिकेशन्स का रिस्क (potential risks and complications related to pregnancies post 35) है। वहीं, एक अच्छी बात यह भी है कि इस उम्र में महिलाएं हेल्दी प्रेगनेंसी प्लान कर पाती हैं और हेल्दी बच्चे को जन्म भी दे पाती हैं। हालांकि, इन सबके बीच महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए और उन्हें कुछ बातों की जानकारी भी होनी चाहिए। जैसे-
उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में नेचुरली गर्भधारण कर पाने में दिक्कत आ सकती है। 35 साल से अधिक उम्र वाली महिलाओं को उनसे छोटी उम्र वाली महिलाओं की तुलना में गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है। 30 साल की उम्र के बाद एग्ज की संख्या और क्वालिटी (quality of eggs deteriorates) भी कम होने लगती है। ऐसे में आप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स और गर्भधारण के तरीकों के बारे में अपने डॉक्टर से जरूर बात करें।
अधिक उम्र में गर्भधारण करने से समय से पहले बच्चे का जन्म होने या प्री-टर्म डिलिवरी का रिस्क भी बढ़ जाता है। इससे बच्चे का जन्म के समय वजन सामान्य से कम हो सकता है। वहीं, समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों के अंगों का विकास भी कम होता है। ऐसे में बच्चे को एनआईसीयू (NICU admission for baby ) में लम्बे समय तक रखने की जरूरत पड़ सकती है।
डॉ. रूपाली कहती हैं कि, एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि 35 के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं में भी कुछ बीमारियों का रिस्क बहुत अधिक बढ़ सकता है। इन महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज होने का रिस्क (gestational diabetes) अधिक होता है। वहीं, प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) और बच्चे में डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) जैसी क्रोमोसोमल गड़बड़ियों (chromosomal abnormalities in their babies) का रिस्क भी बढ़ जाता है। इसीलिए प्रेगनेंसी प्लान करने के लिए किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट की सलाह लें और सभी जरूरी टेस्ट कराएं।
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