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पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं को खर्राटे आना और खराब नींद जैसी समस्याओं को नजरअंदाज क्यों नहीं करना चाहिए?

पीसीओएस जूझ रही महिलाओं का रात में खर्राटे लेना या बार-बार नींद टूटना आम थकान लक्षण नहीं कई बार किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है? ऐसे में लापरवाही करना भारी पड़ सकता है, जिसके बारे मे हेल्थ एक्सपर्ट्स आपको बता रहे हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : July 24, 2026 8:30 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Gayatri Deshpande

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को आमतौर पर अनियमित पीरियड्स, मुंहासे, वजन बढ़ना, चेहरे पर अधिक बाल आना और प्रजनन संबंधी समस्याओं से जोड़ा जाता है। लेकिन एक महत्वपूर्ण पहलू, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता, वह है नींद से जुड़ी समस्याएं। डॉ. गायत्री देशपांडे, डायरेक्टर, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, नानावटी मैक्स हॉस्पिटल, मुंबई के अनुसार पीसीओएस से पीड़ित कई महिलाओं को तेज खर्राटे, बार-बार नींद टूटना, दिनभर थकान महसूस होना या कई घंटे सोने के बाद भी थका हुआ महसूस होने जैसी समस्याएं होती हैं। ये स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं। स्लीप एपनिया कोई रात में खर्राटे आने जैसी आम बीमारी नहीं है बल्कि कई बार बेहद खतरनाक स्थिति बन सकती है। क्योंकि स्लीप एपनिया के मरीजों में कई बार रात को ज्यादा खर्राटे आने के कारण कई बार सांस लेने में बहुत ज्यादा कठिनाई होने लगती है और यहां तक कि कुछ समय के लिए सांस रुक भी जाती है जिसके कारण स्थिति जानलेवा बन सकती है।

पीसीओएस में स्लीप एपनिया का खतरा

यह देखा गया है कि जिन महिलाओं को पीसीओएस की समस्या है, उनमें स्लीप एपनिया जैसे बीमारी का खतरा भी ज्यादा देखा जाता है। यह समझना होगा कि पीसीओएस एक ऐसी बीमारी है, जो सिर्फ ओवरी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। पीसीओएस का संबंध हार्मोनल असंतुलन, वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से होता है। खासकर पेट और शरीर के ऊपरी हिस्से में बढ़ा हुआ वजन सोते समय सांस की नली पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है और बार-बार सांस रुकने की समस्या हो सकती है।

पीसीओएस का नींद से कनेक्शन

पीसीओएस और नींद का संबंध दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। खराब नींद हार्मोन के संतुलन को और बिगाड़ सकती है, जिससे पीसीओएस की समस्याएं बढ़ सकती हैं। पर्याप्त नींद न लेने से घ्रेलिन (Ghrelin) नामक भूख बढ़ाने वाला हार्मोन बढ़ सकता है और लेप्टिन (Leptin) नामक पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन कम हो सकता है। इससे भूख बढ़ने लगती है, खाने की इच्छा ज्यादा होती है और ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे वजन नियंत्रित करना और मुश्किल हो जाता है।

नींद की कमी का हार्मोन असंतुलन से कनेक्शन

पीसीओएस के लक्षण सिर्फ पीरियड्स या प्रेगनेंसी से जुड़े नहीं बल्कि नींद से जुड़े भी हो सकते हैं और ऐसे में अगर नींद पूरी नहीं हो पाती है तो उसका असर शरीर के हार्मोन संतुलन पर भी पड़ता है। इसलिए खराब नींद और शरीर का तनाव बढ़ना कोर्टिसोल और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोन लेवल को प्रभावित करती है। प्रोलैक्टिन बढ़ने से प्रजनन हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पीरियड्स और ओव्यूलेशन पर असर पड़ सकता है। ये समस्याएं पहले से ही पीसीओएस वाली महिलाओं में आम होती हैं।

हार्मोन असंतुलन का इंसुलिन रेजिस्टेंस से कनेक्शन

इंसुलिन भी एक हार्मोन है और जब शरीर में हार्मोन असंतुलन होता है, तो उससे इंसुलिन हार्मोन लेवल भी प्रभावित होने लगता है जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा काफी बढ़ सकता है। पीसीओएस से पीड़ित कई महिलाओं के शरीर में इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं करता, जिससे ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होते हैं। ऐसे में खराब नींद स्थिति को और ज्यादा प्रभावित करती है और स्थिति को गंभीर बना सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे ब्लड शुगर कंट्रोल, ऊर्जा का स्तर और नियमित व्यायाम व स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

खर्राटे जैसे लक्षणों को इग्नोर न करें

इसलिए पीसीओएस में होने वाले स्लीप एपनिया को सिर्फ खर्राटे समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार थकान के अलावा इससे सुबह सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई, मूड में बदलाव और वजन नियंत्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक इलाज न कराने पर नींद की समस्या पीसीओएस से जुड़ी हार्मोनल और मेटाबॉलिक परेशानियों को और बढ़ा सकती है।

डॉक्टर से बात करना बेहद जरूरी

पीसीओएस से पीड़ित जिन महिलाओं को निम्न लक्षण महसूस हो रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द स्त्री रोग विशेषज्ञ यानी गायनेकोलॉजिस्ट से इस बारे में संपर्क कर लेना चाहिए -

  • ज्यादा खर्राटे होना
  • रात को सांस लेने में दिक्कत
  • बार-बार नींद से जागना
  • रात के समय घुटन महसूस होना
  • दिन में नींद आना
  • सुबह सिरदर्द के साथ उठना
  • दिनभर थकान रहना

पीसीओएस के इलाज का उद्देश्य सिर्फ पीरियड्स को नियमित करना या प्रजनन संबंधी समस्याओं तक सीमित रहना नहीं है। बल्कि पीसीओएस के इलाज में निम्न चीजों का ध्यान रखना भी जरूरी है -

  • नियमित व्यायाम करना
  • संतुलित आहार लेना
  • जरूरत पड़ने पर वजन नियंत्रित करना
  • अच्छी लाइफस्टाइल आदतें अपनाना
  • नींद में सुधार लाना
  • खर्राटे जैसी समस्याओं की जांच कराना

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल पीसीओएस और स्लीप एपनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।