PCOS Awareness Month: पीसीओएस के बाद क्या गर्भधारण है मुमकिन, एक्सपर्ट से जानें PCOS के बाद प्रेगनेंसी का चांस कितना

पीसीओएस के कारण और लक्षण क्या हैं और पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में गर्भधारण की संभावना कितनी है, जानने के लिए पढ़ें यह लेख।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : January 17, 2024 6:14 PM IST

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम-पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) एक हार्मोनल डिसॉर्डर (hormonal disorder) है जो रिप्रॉडक्टिव एज या प्रजनन के लिए सक्षम मानी जानी वाली उम्र में अधिक देखी जाती है। साल 2020 में की गयी एक स्टडी के अनुसार, भारत में 20-29 वर्ष के आयु वर्ग की लगभग 16 प्रतिशत महिलाओं को पीसीओएस (PCOS in India) से पीड़ित हैं। पीसीओएस की वजह से महिलाओं को लम्बे समय तक और कभी-कभी ताउम्र कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। पीसीओएस एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं जिसकी वजह से ओवरी का आकार बढ़ जाता है। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में इर्रेग्यूलर पीरियड्स ( irregular periods) की समस्या हो सकती है और इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में मेल सेक्स हार्मोन्स एंड्रोजन (androgen) का निर्माण अधिक हो सकता है जिसकी वजह से ओव्युलैशन (ovulation) की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

पीसीओएस के कारण और लक्षण क्या हैं और पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में गर्भधारण की संभावना कितनी है इन सब विषयों पर जानकारी दीं, डॉ. विद्या भट्ट (Dr. Vidya V Bhat, Medical Director of RadhaKrishna Multispecialty Hospital, Bengaluru, is a Laparoscopic Surgeon and Fertility Specialist) ने। पीसीओएस से जुड़े यह सभी महत्वपूर्ण तथ्य जानें यहां।

क्या पीसीओएस के कारण गर्भधारण में मुश्किलें आ सकती हैं?

पीसीओएस महिलाओं में इंफर्टिलिटी या बांझपन की एक बड़ी वजह (causes of infertility in women) है। आंकड़ों के अनुसार, ओव्युलैशन से जुड़ी 85 प्रतिशत से अधिक समस्याएं (ovulatory disorder) पीसीओएस की वजह से ही होती हैं। पीसीओएस के विभिन्न कारण हो सकते हैं जिनमें से कुछ स्थितियां ये भी हैं-

  • एंड्रोजन हार्मोन्स का हाई लेवल (High levels of androgens)
  • हाई ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance)
  • पर्यावरण से जुड़े मुद्दे (प्रदूषण, केमिकल्स आदि)
  • हार्मोनल इम्बैलेंस (hormonal imbalance)
  • तनाव (stress)
  • लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं और बीमारियां

पीसीओएस की वजह से महिलाओं में एग्स के उत्पादन और रीलिज होने की प्रक्रिया में रूकावटें आती हैं और इसी के चलते महिलाओं के लिए गर्भधारण करने में दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं, गर्भधारण करने के बाद भी महिलाओं में गर्भपात या मिसकैरीज की संभावना भी बहुत अधिक बढ़ सकती हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स के अनुसार, पीसीओएस से पीड़ित 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में आसानी से और बिना किसी मेडिकल सपोर्ट के गर्भधारण करना आसान हो सकता है।

PCOS के लक्षण क्या हैं?

डॉ. विद्या के अनुसार, पीसीओएस से पीड़ित कम उम्र की महिलाओं और लड़कियों में कोई लक्षण नहीं दिखायी देते हैं। वही. पीसीओएस से पीड़ित अधिकांश महिलाओं को लम्बे समय तक अपनी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं होती। हालांकि, इसकी वजह से महिलाओं में इस तरह के लक्षण दिखायी दे सकते हैं-

  • मेंस्ट्रुअल साइकल से जुड़ी अनियमितताएं (menstrual irregularities)
  • मोटापा (obesity)
  • हाइपर एंड्रोजेनिज्म (hyper-androgenism)
  • शरीर पर काले दाग-धब्बे दिखायी देना
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस ( insulin resistance)
  • हाई बीपी या डायबिटीज से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन्स

भारत में क्यों बढ़ रहे हैं पीसीओएस के मामले

भारत में पिछले कुछ वर्षों में पीसीओएस के मामलों में 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी देखी गयी है। वहीं, कोरोना महामारी के दौरान लोगों की लाइफस्टाइल में आए बदलावों के कारण भी पीसीओएस को गम्भीर होते देखा गया। घर में बंद रहने, देर तक एक जगह बैठकर टीवी देखने, जंक फूड का सेवन, कसरत ना करने और सोने-जागने के समय में बदलाव के कारण महिलाओं में पीसीओएस का खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ चुका है। इसके अलावा अनियमित पीरियड्स या हेवी ब्लीडिंग जैसी समस्याओं पर ध्यान ना देने की वजह से भी पीसीओएस के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं, डॉक्टरों से कंसल्टेशन और रेग्यूलर चेकअप्स की कमी के चलते भी पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा।

PCOS  से राहत और बचाव के लिए क्या उपाय करने चाहिए

सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट और कंसल्टेंट डॉ. शिवानी सबरवाल (Dr. Shivani Sabharwal is a Gynecologist in Karol Bagh, Delhi) का कहना है कि एक हेल्दी और एक्टिव लाइफस्टाइल की मदद से मेंटली और फिजिकली हेल्दी रह पाना आसान हो सकता है। पीसीओएस के मरीजों या हाई-रिस्क ग्रुप में आनेवाली महिलाओं और लड़कियों के लिए डॉ. संभरवाल इन बातों का ध्यान रखने की सलाह देती हैं-

  • बैलेंस्ड डाइट लें और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स का सेवन करें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें।
  • तनाव को कंट्रोल करें और स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए हर तरीके से प्रयास करें।
  • हेल्दी वेट मेंटेन करें।
  • हेवी पीरियड फ्लो होने पर डॉक्टर द्वारा बतायी गयी दवाइयों का सेवन करें।

डॉ. सबरवाल कहती हैं कि पीसीओएस के बाद महिलाओं के लिए कंसीव कर पाना संभव होता है। लेकिन, अगर समय पर इस समस्या का निदान हो और सही तरीके से इलाज को आगे बढ़ाया जाए तो पीसीओएस की समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है।

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