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Blood Pressure in Pregnancy: ब्लड प्रेशर (BP) को रक्तचाप कहा जाता है। ब्लड प्रेशर वह दबाव होता है, जो हृदय द्वारा पंप किए जाने पर खून, धमनियों की दीवारों पर डालता है। यह बताता है कि हृदय को रक्त पंप करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ रही है। बीपी को mmHg में मापा जाता है। सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg माना जाता है। अगर ब्लड प्रेशर इससे ज्यादा होता है, तो यह हाई बीपी कहलाता है। वैसे तो हर व्यक्ति का बीपी कंट्रोल में होना चाहिए। लेकिन, प्रेग्नेंसी के दौरान बीपी का नियंत्रण में रहना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि हाई या लो बीपी प्रेग्नेंट महिलाओं में जटिलताएं पैदा कर सकता है। इसलिए अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो बीपी को नियंत्रण में रखने की कोशिश करें। आइए, नर्चर की स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में बीपी कितना होना चाहिए?
प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का ब्लड प्रेशर लगभग 120/80 mmHg के आसपास होना चाहिए। प्रेग्नेंसी में 90/60 mmHg से लेकर 130/80 mmHg के बीच का स्तर सामान्य माना जाता है। लेकिन, अगर ब्लड प्रेशर इससे कम या ज्यादा होता है, तो बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इससे कई तरह की जटिलताएं हो सकती हैं। प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव की वजह से ब्लड प्रेशर हल्का कम या ज्यादा हो सकता है।
प्रेग्नेंसी की पहली और दूसरी तिमाही में ब्लड प्रेशर थोड़ा कम हो सकता है। इस दौरान रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और हार्मोन प्रोजेस्टेरोन का प्रभाव बढ़ता है। इस स्थिति को सामान्य माना जाता है। लेकिन, अगर आपको कुछ लक्षण महसूस हो तो इन्हें नजरअंदाज बिल्कुल न करें। जैसे-
अगर तीसरी तिमाही की बात करें, तो इस दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यह सामान्य होता है, लेकिन अगर बीपी 140/90 mmHg या उससे अधिक पहुंच जाए तो इस स्थिति की अनदेखी न करें और डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें। प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति को गंभीर माना जाता है। यह प्रीक्लेम्पसिया जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। इस दौरान प्रेग्नेंट महिला में ब्लड प्रेशर बढ़ता है, साथ ही पेशाब में प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ सकती है। इससे शिशु और मां दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए अगर आपको सिरदर्द, धुंधला दिखना, चेहरे और हाथ-पैरों में अत्यधिक सूजन जैसे लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से जरूर मिलें।
प्रेग्नेंसी में बीपी कम होना भी एक गंभीर स्थिति है। हार्मोनल बदलाव और रक्त वाहिकाओं के फैलने की वजह से बीपी कम हो सकता है। इसकी वजह से चक्कर आने, कमजोरी, बेहोशी और थकान जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
प्रेग्नेंसी में बीपी बढ़ना एक गंभीर स्थिति हो सकती है। हाई बीपी मां और शिशु, दोनों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इससे महिला को समय से पहले प्रसव हो सकता है। हाई बीपी की वजह से शिशु का वजन कम हो सकता है, इतना ही नहीं कुछ मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं। आंखों की रोशनी धुंधली हो सकती है और प्लेसेंटा में खून की कमी हो सकती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।