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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 5, 2022 10:18 AM IST
गर्मी के महीनों में होते हैं सबसे ज्यादा मिसकैरेज! साइंटिस्ट से जानिए किस महीने में बरतनी चाहिए सबसे ज्यादा सावधानी
क्या आप जानते हैं कि किस महीने में सबसे ज्यादा मिसकैरेज का खतरा रहता है? अगर आप एक महिला हैं और बेबी प्लानिंग कर रही हैं तो आपको ये पता होना चाहिए कि कौन-कौन से महीने आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं। एक शोध में ये खुलासा हुआ है कि गर्मियों में मिसकैरेज की संभावना दूसरे मौसम के मुकाबले ज्यादा होती है। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (BUSHP) का कहना है कि करीब 30 फीसदी गर्भवती महिलाओं को मिसकैरेज होता है और ये महिलाएं गर्भावस्था के 20वें सप्ताह तक पहुंचते-पहुंचते मिसकैरेज का शिकार हो जाती हैं।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इनमें से आधे से ज्यादा मिसकैरेज का कारणअज्ञात ही होता है लेकिन कुछ कारक हैं, जो इस जोखिम को बढ़ाने का काम करते हैं जैसे- पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, डिप्रेशन और एंग्जाइटी।
जर्नल एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित शोध के परिणाम मिसकैरेज के जोखिम और मौसम में बदलाव के विश्लेषण पर आधारित हैं। अध्ययन में पाया गया कि उत्तरी अमेरिका में गर्भवती महिलाओं को गर्मी के महीने में विशेषरूप से अगस्त के अंत तक मिसकैरेज का खतरा 44 फीसदी ज्यादा होता है। जबकि फरवरी तक गर्भवती महिलाओं को ये खतरा कम होता है। ये खतरा उन महिलाओं में ज्यादा देखा गया, जो गर्भावस्था के शुरुआती दौर में थीं, खासकर 8वें सप्ताह तक। जब प्रेगनेंसी के दौरान मिसकैरेज के खतरे को आंका गया तो शोधकर्ताओं ने पाया कि अगस्त के अंत तक गर्भपात का खतरा 31 फीसदी ज्यादा था, विशेषरूप से फरवरी के अंत तक।
अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि दक्षिण और मध्यपश्चिम में जहां गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है वहां अगस्त के अंत और सितंबर माह की शुरुआत में सबसे ज्यादा मिसकैरेज होता है।
ये परिणाम बताते हैं कि बहुत ज्यादा गर्मी और मौसम से जुड़े अन्य कारण व जीवनशैली विकल्प के कारण होने वाले संभावित मिसकैरेज को समझने के लिए और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है।
अध्ययन के लिए बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (BUSHP) के प्रोफेसर वीजलिंक और उनके सहयोगियों ने एक प्रेगनेंसी स्टडी ऑनलाइन (PRESTO) में गर्भधारण की तैयारी करने वाली महिलाओं में गर्भपात पर सर्वे डेटा का विश्लेषण किया। इसके अलावा 2013 से चल रहे एनआईएच की एक स्टडी से भी डेटा लिया गया।
अध्ययन में शामिल सभी महिलाओं ने अपने सामाजिक पहलू, जीवनशैली और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी साझा की। इस अध्यन में 6104 महिलाओं ने भाग लिया और करीब 12 महीनों तक उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। इन महिलाओं ने किसी भी प्रकार से हुए गर्भपात के बारे में जानकारी दी।