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नेशनल सेफ मदरहुड डे : प्रेगनेंसी में इन 7 बातों का जरूर रखें ख्याल, डिलीवरी में नहीं आएगी कोई परेशानी

आज है नेशनल सेफ मदरहुड डे। © Shutterstock.

प्रेगनेंट महिलाओं को कॉफी-चाय भी कम ही पीनी चाहिए। कॉफी में मौजूद कैफीन भ्रूण के लिए सही नहीं होता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी कॉफी नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे बेचैन और चिड़चिड़े हो जाते हैं।

Written by Anshumala |Published : April 11, 2019 2:58 PM IST

आज ''नेशनल सेफ मदरहुड डे'' है। ईश्वर ने महिलाओं को मां बनने का एक नायाब तोहफा दिया है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। हालांकि, देश में आज भी कई ऐसी महिलाएं हैं, जो बच्चे को जन्म देने के दौरान मौत की आगोश में चली जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण और देखभाल न मिलना। साथ ही जागरूकता की कमी से भी प्रसव के दौरान आज भी अधिकतर महिलाओं की मौत हो जाती है, खासकर छोटे शहरों और गांवों में। इसी को ध्यान में रखते हुए देश में प्रत्येक वर्ष ''राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस'' (NSMD) महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

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खुद भी महिलाओं को होना होगा जागरूक

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अधिकतर महिलाएं ऐसी हैं, जो प्रेगनेंसी के दिनों में अपने खानपान और सेहत का ध्यान नहीं रखती हैं। शारीरिक तकलीफ को छिपा लेती हैं, जिसकी वजह से डिलीवरी के दौरान कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रेग्नेंसी एक ऐसी अवस्था है जब आपको सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जरा सी भी लापरवाही, प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीनों को मुश्किलों भरा बना सकता है। आप कुछ बातों को ध्यान में रखकर अपनी प्रेगनेंसी को हेल्दी बना सकती हैं। इससे आपको प्रसव के दौरान कोई शारीरिक तकलीफ भी नहीं होगा और बच्चा भी स्वस्थ होगा। शोधकर्ताओं की मानें तो हेल्दी बच्चा और सुरक्षित डिलीवरी के लिए इन पांच चीजों पर ध्यान रखें तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने खुशनुमा बीतेंगे।

तनाव से रहें दूर

कई अध्ययन के अनुसार, गर्भवती महिलाओं के लिए मानसिक तनाव उनके और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए काफी हानिकारक होता है। अधिक तनाव लेने से बच्चे के बड़े होने पर उनमें ज्यादा खाने की आदत पड़ जाती है। तनाव से प्रसव के दौरान भी कई तरह की समस्याएं आती हैं।

धूप भी है जरूरी 

गर्मी के दिनों में प्रेगनेंट महिलाओं के लिए धूप जरूरी होता है, पर दिन की नहीं, सुबह के समय की धूप। यह हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए जरूरी है। एक शोध के अनुसार, प्रेगनेंसी के दिनों में यदि शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी कमी है, तो धूप में आधे घंटे जरूर बैठें। इससे बच्चे की भी हड्डियां मजबूत होंगी।

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बैलेंस डायट

गर्भावस्था के दौरान संपूर्ण आहार का सेवन करने से शरीर को पर्याप्त रूप से पोषक तत्व मिलते हैं। आपकी डायट का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी होता है। मां के खानपान की आदतों और चयापचय का सीधा असर बच्चे के शारीरिक विकास पर पड़ता है। फल, सब्जी, दालें, अनाज, दूध, दही, मांस-मछली, अंडा, दूध से बने खाद्य पदार्थ आदि का भरपूर सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खूब खाएं। गर्मी के दिनों में बाहर का कुछ भी खाने से बचें।

करें योग और एक्सरसाइज 

अक्सर महिलाओं को लगता है कि प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज करने से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, पर यह बात सच नहीं है। एक अध्ययन के अनुसार, प्रेगनेंसी में भी महिलाएं डॉक्टर की सलाह से एक्सरसाइज कर सकती हैं। एक्सरसाइज और कुछ योगासन करने से मां और बच्चे दोनों की सेहत पर सकारात्मक असर होता है। शारीरिक रूप से आप जितना एक्टिव रहेंगी, उतना ही आपकी डीलवरी आसानी से होगी।

वजन पर रखें कंट्रोल

प्रेगनेंसी से पहले आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) बच्चे की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। शोध में शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से पहले मां के बीएमआई और बच्चे के चयापचय के बीच संबंध देखा। शोधकर्ता यह मानते हैं कि मां के मोटापे की वजह से बच्चे की चयापचय क्रिया प्रभावित होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान बच्चे को होने वाली बीमारी जैसे सेरेब्रल पाल्सी, मिर्गी और अन्य प्रमुख जन्म दोषों का मोटापे के बीच संबंध होता है।

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कॉफी का सेवन कम करें 

प्रेगनेंट महिलाओं को कॉफी-चाय भी कम ही पीनी चाहिए। कॉफी में मौजूद कैफीन भ्रूण के लिए सही नहीं होता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी कॉफी नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे बेचैन और चिड़चिड़े हो जाते हैं।

स्मोकिंग और ड्रिंकिंग

प्रेग्नेंसी की अवस्था में स्मोकिंग और ऐल्कोहल का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें। स्मोक करने से ब्लड वेसल्स टाइट हो जाती हैं। चूंकि, नाल (Placenta) ब्लड वेसल्स से भरा होता है ताकि भ्रूण को जरूरी पोषक तत्व मिल सके, लेकिन स्मोकिंग और ड्रिंकिंग की वजह से ये ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे आपके शिशु तक पोषण नहीं पहुंच पाता।

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