Advertisement

डिलीवरी के बाद जरूर करें ये व्‍यायाम, होगा लाभ

गर्भावस्‍था मेंं कमजोर हुई पेल्विक मसल्‍स को दुरुस्‍त करते हैं ये व्‍यायाम।

पेल्विक फ्लोर मांशपेशियों की एक ऐसी परत से बनाता है जो हमेशा एक सख्त झूले के समान, सामने की प्यूबिक हड्डी से रीढ़ की हड्डी की जड़ तक खिचीं रहती हैं। आपका पेल्विक फ्लोर आपके मूत्राशय, योनि, गर्भाशय और आंत को सहारा प्रदान करता है और यह मूत्राशय और आंत के नियंत्रण के लिए भी बहुत आवश्यक है। आपकी पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां सेक्सुअल आनंद में भी एक जरुरी भूमिका निभाती हैं। यदि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान पेल्विक फ्लोर पर दबाव बढ़ता है, तो वह खिंच सकता है जिससे पेल्विक फ्लोर की मांशपेशियों को भारी नुकसान पहुँच सकता है। जिससे आपको हँसते, खाँसते या दौड़ते समय मूत्र रिसाव हो सकता है। इस समस्या को मूत्र तनाव असंयमिता कहा जाता है।

 यूरिन के अवांछित रिसाव से आराम 

गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद के समय में मूत्र तनाव असंयमिता एक सामान्य समस्या है। आधी से ज्यादा महिलाओं को अपने पहले बच्चे के समय और तीन में से एक महिलाओं जिनको एक बच्चा पहले ही हो चुका है, थोड़े बहुत मूत्र रिसाव का अनुभव होता है। यूरीन  के  अवांछित रिसाव से बचने के लिए, अपनी पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को भींच कर ऊपर उठाये, हर बार जब आप हँसे, छीकें या खांसे, व्यायाम करें, लिफ्ट, धक्का या खीचें। इस क्षेत्र को तनाव से बचाने के लिए, आपको पेट एवं पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को भारी लिफ्टों, धक्कों, या खिंचाव से पहले कसने और उठाने की आदत डालनी चाहिए।

Also Read

More News

कमजोर हो जाता है पेल्विक फ्लाेेेर 

गर्भावस्था के दौरान, हॉर्मोन पेल्विक के मुख के सभी लिगामेंट और मांशपेशियों को नरम बना देता है ताकि बच्चे का सिर प्रसव के दौरान बाहर धकेला जा सके। यहाँ तक की वह औरतें भी जो सीज़रियन सेक्शन के ज़रिये बच्चा पैदा करती हैं, उनका भी पेल्विक फ्लोर गर्भावस्था के दबाव और भार के कारण कमजोर पड़ सकता है। इन मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए पेल्विक फ्लोर व्यायाम/केगेल व्यायाम करना महत्वपूर्ण है। इन व्यायामों को आपकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन जाना चाहिए, न कि सिर्फ जब तक आप गर्भवती हैं।

 रोजाना करें केगेल व्‍यायाम 

रोजाना कई बार केगेल व्यायाम करने का प्रय्त्न्न करें। यदि आपको शुरुवात के समय मांसपेशियों के अतिश्रम के कारण केगेल व्यायाम करते समय असुविधा होती है, तो आप जो व्यायाम कर रहें हैं, उनकी संख्या को कम करें और असुविधा के समाप्त होने पर उन्हें धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू करें। केगेल व्यायाम बैठे-बैठे, खड़े या लेटे हुए, किसी भी समय किये जा सकते हैं। लेकिन, यह जरुरी है कि आप केगेल व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाये और अपनी पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां को विकसित करने और सुदृण बनाने के लिए उन्हें उन्हें नियमित रूप से करें।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

Stay Tuned to TheHealthSite for the latest scoop updates

Join us on