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Written By: Yogita Yadav | Updated : May 10, 2019 5:27 PM IST
मां बनने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है एक स्त्री का स्वस्थ होना। इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य शामिल हैं। कितने ही मामलों में ऐसा देखने में आया है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद स्त्री मां नहीं बन पाती। © Shutterstock.
बिगड़े हुए लाइफस्टाइल और बढ़ते प्रदूषण के बीच मनुष्य के शरीर में कई तरह के बदलाव आए हैं। जिन बीमारियों का हमने कभी नाम भी सुना था, अब उनके बारे में हर रोज सुन रहे है। इनमें कुछ तो ऐसे रक्त संबंधी विकार हैं, जिनके बारे में पहले पता न किया जाए तो होने वाले बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है। इसलिए अगर आप भी मां बनने की प्लानिंग कर रहीं हैं तो इन खास बातों का जरूर ध्यान रखें।
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मां बनने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है एक स्त्री का स्वस्थ होना। इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य शामिल हैं। कितने ही मामलों में ऐसा देखने में आया है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद स्त्री मां नहीं बन पाती। इसके लिए डॉक्टर मानसिक तनाव को जिम्मेदार ठहराते हैं। उस पर घर-बाहर दोनों की जिम्मेदारियां संभालती स्त्री के लिए मां बनने का निर्णय मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार होने का भी होता है। अगर आप भी कर रही हैं मां बनने की तैयारी, तो इन खास बातों का जरूर ध्यान रखें।
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करवाएं जरूरी टेस्ट
जब आप तन-मन से स्वस्थ होंगी, तभी स्वस्थ बच्चे की मां बन पाएंगी। इसलिए बहुत जरूरी है कि गर्भधारण से पहले ही कुछ जरूरी जांच अवश्य करवा लें। जिससे अगर किसी तरह का रक्त विकार अथवा अन्य कोई समस्या है तो उसके बारे में पता चल सके और समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकें। इन दिनों प्री-मेरिटल चैकअप भी एक व्यवस्था है, जिसमें जोड़े विवाह पूर्व ही अपने दांपत्य के लिए जरूरी जांच करवाते हैं।
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वजन न बढ़ने दें
गर्भावस्था से पहले आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) बच्चे के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से पहले मां के बीएमआई और बच्चे के चयापचय के बीच संबंध देखा। शोधकर्ता यह मानते हैं कि मां के मोटापे की वजह से बच्चे की चयापचय क्रिया प्रभावित होती है। इससे पहले हुए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के दौरान बच्चे को होने वाली बीमारी, मसलन सेरेब्रल पाल्सी, मिर्गी और अन्य प्रमुख जन्म दोषों का मोटापे के बीच संबंध पाया।
एनआईएच की ओर से हुए अध्ययन में पता चला है कि गर्भधारण के लिए सूरज की रोशनी में रहना जरूरी है। © Shutterstock.
न लें तनाव
इजरायल के वेजमान इंस्टीट्यूट में हुए अध्ययन में बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं के ज्यादा तनाव लेने से उनके बच्चों के बड़े होने पर ज्यादा खाने की आदत पड़ जाती है। चूहों पर हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मां के चिंता में रहने से चूहों में कुछ आनुवांशिक बदलाव देखे गए, जो चूहों के परिपक्व होने पर उनमें ज्यादा खाने की आदत को जन्म देते हैं।
विटामिन डी है जरूरी
एनआईएच की ओर से हुए अध्ययन में पता चला है कि गर्भधारण के लिए सूरज की रोशनी में रहना जरूरी है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन महिलाओं में विटामिन डी कमी थी, उनके मुकाबले जिनमें विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मिली, उनके गर्भ गिरने के बाद दोबारा गर्भधारण की संभावना ज्यादा पाई गई।
खानपान का ध्यान रखें
गर्भावस्था के दौरान आपने क्या खाया, यह आपको अपने बच्चे में दिखता है। ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के अध्ययन में मां के खानपान की आदतों और चयापचय का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है। इसलिए, डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्यवर्धक चीजें खाने की सलाह देते हैं।
व्यायाम भी करें
स्पेन के एक अध्ययन में बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान व्यायाम जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस व्यायाम का फायदा मां और बच्चे दोनों को मिलता है। अक्सर लोग गर्भावस्था में ज्यादा कामकाज से बचने को कहते हैं, लेकिन इस अध्ययन के नतीजे इस भ्रांति को खारिज करते हैं।