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Written By: Jitendra Gupta | Published : March 27, 2023 4:00 PM IST
प्रेगनेंसी डाइट में होंगे ये 7 विटामिन-मिनरल्स तो 3 किलो से ऊपर का होगा आपका बच्चा! जानें जरूर विटामिन-मिनरल्स
Important vitamins and minerals in pregnancy : गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए ज़रूरी है। सही पोषण मिलने से बच्चे का विकास ठीक से होता है। साथ ही संतुलित आहार लेने से मां में भी गर्भावस्था की समस्याओं से बचाव हो सकता है जैसे गैस्टेशनल डायबिटीज, एक्लेम्पिसया और जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ना। इसके अलावा आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम से युक्त आहार का सेवन करने से बच्चे को जन्मजात दोषों जैसे न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट आदि से सुरक्षित रखा जा सकता है और गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास ठीक से होता है। खासतौर पर गर्भावस्था की पहली तिमाही में फोलिक एसिड का सेवन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न्यूरल ट्यूब के विकास के लिए ज़रूरी होता है। बाद में न्यूरल ट्यूब ही दिमाग और रीढ़ की हड्डी में विकसित होती है।
जेपी हॉस्पिटल के डिपार्टमेन्ट ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एण्ड गायनेकोलोजी, एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ. रीनू जैन कहती हैं कि बच्चे के साथ-साथ सही पोषण मां के लिए भी बेहद जरूरी है। क्योंकि उचित पोषक आहार लेने से मां एनिमिया, थकान, अवसाद आदि से सुरक्षित रहती है और उसका स्वास्थ्य ठीक बना रहता है। संतुलित आहार लेने से मां का वज़न भी ठीक रहता है। जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ने और गर्भावस्था एवं डिलीवरी के समय जटिलता की संभावना कम हो जाती है। उचित पोषणके अभाव में मां और बच्चे दोनों को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसेः
अगर एक महिला गर्भावस्था के दौरान पोषक आहार का सेवन नहीं करती तो उसके बच्चे का वज़न जन्म के समय कम हो सकता है।
फोलिक एसिड, बी-विटामिन की कमी से न्यूरल ट्यूब में दोषों जैसे स्पाइना बाईफिदा की संभावना बढ़ती है।
आयरन की कमी से मां में एनीमिया हो सकता है। इस स्थिति में खून में रैड ब्लड सैल्स की कमी हो जाती है, जिससे शरीर को आॅक्सीजन की सप्लाई ठीक से नहीं हो पाती।
कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ज़रूरी पोषक तत्वों जैसे कैल्शियम, मैग्निशियम, विटामिन सी की कमी से समय से पहले प्रसव की संभावना बढ़ती है।
कैल्शियम और मैग्निशियम की कमी से प्रीक्लैम्पसिया की संभावना बढ़ती है। यह गर्भावस्था की एक गंभीर जटिलता है जिसमें मां का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और लिवर, किडनी जैसे अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
कुछ पोषक तत्वों जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड, फोलेट और विटामिन डी की कमी से गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन यानि अवसाद की संभावना बढ़ती है। इसलिए ज़रूरी है कि महिला गर्भावस्था क दौरान संतुलित एवं पोषक आहार का सेवन करें। इस दौरान मां की पोषक आहार की ज़रूरत बढ़ जाती है क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए अतिरिक्त पोषण की ज़रूरत होती है। यहां हम ऐसे कुछ पोषक तत्वों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सेवन गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए-
विटामिन बी9 कहलाने वाला फोलेट गर्भ में पल रहे बच्चे के नर्वस सिस्टम के विकास के लिए बेहद ज़रूरी है। हरी पत्तेदार सब्ज़ियों, सिट्रस फलों, बीन्स और साबुत अनाज में फोलेट पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन बहुत ज़रूरी है। हीमोग्लाबिन ही बढ़ते बच्चे में आॅक्सीजन पहुंचाता है। आयरन के स्रोतों में रैड मीट, मछली, बीन्स और फोर्टीफाईड अनाज शामिल हैं।
कैल्शियम बच्चे की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए ज़रूरी है। डेयरी प्रोडक्ट्स, हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और टोफु में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
ओमेगा-3 फैटी एसिड बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास के लिए ज़रूरी है। फैटी फिश जैसे सालमन और अलसी के बीज में ओमेगा-3 एसिड पाया जाता है।
प्रोटीन बच्चे के टिश्यूज़ के विकास के लिए ज़रूरी है। मीट, पोल्ट्री, मछली, अण्डा, बीन्स और डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
विटामिन डी, कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों एवं दांतों को मजबूत बनाने के लिए ज़रूरी है। फैटी फिश, अण्डे और फोर्टीफाईड डेयरी प्रोडक्ट्स विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं।
आयोडीन बच्चे के दिमाग और थाॅयराईड के विकास के लिए ज़रूरी है। आयोडीन युक्त नमक, डेयरी प्रोडक्ट्स एवं सीफूड में आयोडीन पाया जाता है।
यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि इन पोषक तत्वों का जरूरत से अधिक सेवन भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान अपनी पोषण संबंधी जरूरतों को जानने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।