
... Read More
Written By: Anshumala | Published : October 5, 2018 10:31 AM IST
Exposure to the disease was associated with the risk of autism regardless of the severity of the mother's hyperemesis gravidarum. © Shutterstock
प्रेगनेंसी में अक्सर महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है। यह बहुत कॉमन समस्या है। हालांकि, जब यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाती है तो कई दूसरी समस्याएं भी होने का रिस्क बढ़ जाता है। ऐसे में इसे नजरअंदाज करने से बचें और अपनी डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें। मार्निंग सिकनेस प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है। (इसे भी पढ़ें- प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए करें एक्सरसाइज, लेकिन जरा संभलकर)
क्या होता है मॉर्निंग सिकनेस में
इस दौरान उल्टी, जी मिचलाना जैसी समस्याएं होती हैं। खाने-पीने का मन नहीं करता, थकान महसूस हो सकती है। यह समय सोकर उठने के बाद महिलाओं को महसूस होती है। हालांकि, सिकनेस की समस्या कुछ महिलाओं को शाम में होती है। मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से कोई नुकसान नहीं होता है। जब यह समस्या गंभीर हो जाए तो इसे दूर करना जरूरी होता है। दरअसल, मॉर्निंग सिकनेस की समस्या ज्यादा होने को ''हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम'' कहते हैं। इस दौरान अधिक उल्टी होने से आप कुछ खाएंगी नहीं, जो आपके साथ-साथ पेट में पल रहे बच्चे के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
क्यों होती है अधिक मॉर्निंग सिकनेस
बहुत सी महिलाओं को बहुत ज्यादा मार्निंग सिकनेस होती है। इसमें उल्टी, जी मिचलाने और पेट में दर्द होता है। हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम की परिस्थति में गर्भवती महिला को हॉस्पिटल में भर्ती भी कराना पड़ सकता है। साथ ही बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस दौरान थोड़ी बहुत एक्सरसाइज करना जरूरी होता है।
(इसे भी पढ़ें- यूं पहचाने बच्चे के दिल में छेद है या नहीं)
हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम के संकेत
- बहुत ज्यादा जी मिचलाना
- डिहाइड्रेशन
-वजन कम होना
- सिरदर्द और बेहोश होना
- लो ब्लड प्रेशर
- बार-बार पेशाब आना
- हृदय गति का बढ़ना
इसे भी पढ़ें- महिलाओं में बांझपन की समस्या को दूर करे चक्रासन
कारण
बहुत ज्यादा मॉर्निंग सिकनेस होने का एक कारण है ह्यूमन क्रोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीबी) का बढ़ जाना होता है। यह एक हार्मोन होता है जिसका स्तर स्वस्थ आहार का सेवन ना करने या शारीरिक गतिविधियां करने से नहीं होता है।
शिशु भी हो सकता है प्रभावित
वैसे तो मॉर्निंग सिकनेस भ्रूण को प्रभावित नहीं करती है लेकिन जब यह अत्यधिक मात्रा में होती है तो इसका भ्रूण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे बच्चे का वजन और विकास दोनों प्रभावित होता है। प्रेगनेंसी में पौष्टिक आहार लेना है जरूरी, जानें इन दिनों कैसा हो आपका डायट चार्ट
यूं करें डील
जब आपको बहुत ज्यादा और हद दिन मॉर्निंग सिकनेस की समस्या सता रही हो, तो इसे कम करने का सबसे आसान उपाय अपनी डायट में बदलाव करना है। इसके लिए थोड़े-थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाती रहें। खाली पेट कभी भी न रहें क्योंकि इससे जी मिचलने की समस्या होती है। खूब सारा पानी पिएं। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या दूर होती है। अगर यह समस्या फिर भी दूर नहीं होती है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें। प्रेगनेंसी के दौरान अपना खास ध्यान रखना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।