
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Rujul Jhaveri
Monsoon Care Pregnancy
झमाझम बारिश की बूंदें, जहां आपको गर्मी से राहत दिता हैं। वहीं, अपने साथ कई तरह की समस्याएं लाती हैं। मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए यह मौसम कई तरह की चुनौतियां अपने साथ लेकर आता है। दरअसल, बरसात में नमी बढ़ने, जलभराव, दूषित पानी और मच्छरों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में थोड़ी-सी सावधानी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी में शरीर की इम्यूनिटी में प्राकृतिक बदलाव होते हैं, जिसके कारण कुछ संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा बारिश में फिसलने, भोजन से जुड़ी समस्याओं और मच्छर जनित बीमारियों से भी बचाव जरूरी है।
मुंबई स्थित नारायणा हॉस्पिटल की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. रुजुल झावेरी का कहना है कि मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं को साफ-सफाई, खान-पान और संक्रमण से बचाव को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए। सही सावधानियां अपनाकर इस मौसम में भी स्वस्थ और सुरक्षित गर्भावस्था संभव है।
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। वहीं, जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ जाती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव होते हैं, ताकि शरीर भ्रूण को स्वीकार कर सके। इसी कारण कुछ संक्रमणों से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अगर आप प्रेग्नेंसी में मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों से सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो कुछ बातों पर ध्यान दे सकते हैं, जैसे-
मानसून में दूषित पानी से टाइफाइड, हेपेटाइटिस A और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं को सिर्फ उबला हुआ या फिर फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए। इसके साथ बाहर जाते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और बाहर का पानी पीने से बचें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दूषित पानी और अन-हाइजेनिक तरीके से रहने की वजह से कई संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था में डिहाइड्रेशन और संक्रमण दोनों मां और बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
मानसून में भोजन जल्दी खराब हो सकता है। बाहर का खाना, खासकर खुले में रखा भोजन, फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अपने डाइट में ताजे फल, अच्छी तरह पकी हुई सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा कोशिश करें कि दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, आयरन और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में जोड़ें।
वहीं, कोशिश करें कि इस सीजन में सड़क किनारे मिलने वाला खाना, कच्ची सलाद, अधपका मांस या अंडा और लंबे समय से रखा हुआ भोजन ना खाएं। CDC के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को खाने-पीने की चीजों की वजह से भी इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए भोजन की स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
मानसून में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। कोशिश करें कि इस सीजन में पूरी बाजू के कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का ही इस्तेमाल करें, घर के आसपास पानी जमा ना होने दें और डॉक्टर की सलाह के बाद ही मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
अगर तेज बुखार, शरीर में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते या असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
मानसून में गीले फर्श और सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं। गर्भावस्था में गिरने से चोट लगने का खतरा रहता है। इस स्थिति से बचने के लिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें, गीली जगह पर धीरे चलें, सीढ़ियां उतरते समय रेलिंग पकड़ें और जलभराव वाली जगहों पर जाने से बचें। अगर गिर जाएं तो दर्द न होने पर भी डॉक्टर को जानकारी दें।
मानसून की उमस में पसीना और नमी के कारण फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए रोज नहाएं, शरीर को सूखा रखें, सूती और आरामदायक कपड़े पहनें। साथ ही बारिश में भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलें।
Disclaimer : मानसून में गर्भवती महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है। साफ पानी पीना, पौष्टिक भोजन लेना, मच्छरों से बचाव करना, स्वच्छता बनाए रखना और नियमित डॉक्टर चेकअप कराना सुरक्षित प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी होता है। हर गर्भावस्था अलग होती है, इसलिए किसी भी परेशानी या नए लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।