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मानसून में प्रेग्नेंट महिलाओं को किन-किन बीमारियों का रहता है खतरा? जानें कैसे रहें सुरक्षित

मानसून में प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह की समस्याएं होने का खतरा रहता है, जिसपर हमें ध्यान देने की जरूरत होती है। इस लेख मेें हम जानेंगे मानसून में प्रेग्नेंट महिलाओं को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 30, 2026 10:26 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Anusha Rao P

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन यह कई संक्रामक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह मौसम अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है, क्योंकि इस दौरान होने वाले संक्रमण न केवल मां के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी असर डाल सकते हैं। नमी, दूषित पानी, मच्छरों की बढ़ती संख्या और खराब स्वच्छता मानसून में कई बीमारियों को फैलने का मौका देती हैं।

हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, डॉ. अनुषा राव पी का कहना है कि प्रेग्नेंसी में महिलाओं को मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), फंगल इंफेक्शन, टायफाइड और हेपेटाइटिस A व E जैसी बीमारियों से विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।

1. डेंगू होने का खतरा

मानसून में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं। गर्भावस्था के दौरान डेंगू होने पर तेज बुखार, प्लेटलेट्स की कमी, डिहाइड्रेशन और गंभीर मामलों में समय से पहले प्रसव या मां और शिशु दोनों के लिए जटिलताएं हो सकती हैं। अगर आप डेंगू से सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो सोने से पहले मच्छरदानी लगाएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्रेग्नेंसी-सेफ मच्छर रिपेलेंट लगाएं। अपने पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें।

2. प्रेग्नेंसी में मलेरिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मलेरिया प्रेग्नेंसी में एनीमिया, गर्भपात, समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे में मच्छरों से बचाव बेहद जरूरी है।

3. गैस्ट्रोएंटेराइटिस की संभावना

बारिश के मौसम में दूषित भोजन और पानी के कारण पेट का संक्रमण आसानी से हो सकता है। लगातार दस्त और उल्टी से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जो गर्भावस्था में खतरनाक साबित हो सकती है। पेट से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए सिर्फ उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। कोशिश करें कि ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं। कटे हुए फल और स्ट्रीट फूड से बचें।

4. मानसून में हो सकता है यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण यूटीआई का खतरा पहले से ही अधिक होता है। मानसून की नमी और साफ-सफाई की कमी इसे और बढ़ा सकती है। अगर इसका इलाज समय पर न किया जाए, तो यह किडनी तक फैल सकता है और समय से पहले प्रसव का कारण भी बन सकता है। यूरिन इंफेक्शन होने पर पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और बदबूदार या धुंधला पेशाब, इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं।

5. फंगल इंफेक्शन होने का खतरा

प्रेग्नेंसी में अधिक नमी और पसीने के कारण त्वचा और प्राइवेट एरिया में फंगल संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे खुजली, जलन और लालपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आप फंगल इंफेक्शन से बचना चाहते हैं, तो शरीर को सूखा रखें, कॉटन के ढीले कपड़े पहनें और गीले कपड़े लंबे समय तक न पहनें।

मानसून में गर्भवती महिलाएं कैसे रखें खुद को सुरक्षित?

अगर आप प्रेग्नेंसी में मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों से बचना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ बातों पर ध्यान रख सकते हैं, जैसे-

  • हमेशा उबला या RO का फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
  • घर का ताजा और गर्म भोजन ही खाएं।
  • सड़क किनारे मिलने वाले भोजन से बचें।
  • हाथों को साबुन से नियमित रूप से धोएं।
  • मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाएं।
  • घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
  • नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप करवाएं, इत्यादि।

किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज?

अगर आपको प्रेग्नेंसी के इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • 100.4 डिग्री फेरेनाइड या उससे अधिक बुखार
  • पेशाब में जलन या दर्द
  • लगातार उल्टी या दस्त
  • शरीर में अत्यधिक कमजोरी
  • पेट में तेज दर्द
  • भ्रूण की हलचल में कमी, इत्यादि।

Discliamer : यह लेख सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य समस्या होने पर स्वयं इलाज न करें और योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।