प्रेगनेंसी के दौरान आपके दिमाग में होते हैं ये 3 अच्छे बदलाव!

बेबी ब्रेन की समस्या है सच लेकिन इससे प्रेगनेंट महिला की याद्दाश्त कम नहीं होती।

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Written By: Editorial Team | Published : November 29, 2017 1:02 PM IST

प्रेगनेंसी के दौरान, कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। जहां हम सभी हार्मोन, बेबी बम्प, मॉर्निंग सिकनेस और भोजन ने नफरत के बारे में बात करते हैं। लेकिन शायद ही कभी, हम दिमाग में परिवर्तन जैसे सबसे महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में बात करते हैं। बहुत सारी स्टडीज़ कहती हैं कि बेबी-ब्रेन (baby-brain) एक असली समस्या है और गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क में होने वाले बदलाव हमेशा के लिए हो सकते हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि ये बदलाव मां को प्रभावित कर सकते हैं और आजीवन प्रभाव डाल सकते हैं।  लेकिन कुछ स्टडीज़ से पता चलता है कि इन बदलावों का हमारे दिमाग पर सकारात्मक असर भी पड़ता है और यह फायदेमंद साबित होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान ये 3 अच्छे बदलाव होते हैं

1.  ग्रे मैटर (grey matter) में बदलाव होकर बच्चे के साथ लगाव बढ़ता है

साल 2016 में जर्नल नेचर न्यूरोसाइंस में छपी एक स्टडी में सुझाया गया कि प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोनल परिवर्तनों ने मस्तिष्क के आगे और अस्थायी भागों से ग्रे मैटर कम किए। ये दिमाग के वो हिस्से हैं जो विभिन्न कार्यों से जुड़े हुए हैं और सामाजिक व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि ग्रे मैटर में जितनी कमी होती है शिशु के प्रति आपका लगाव उतना बढ़ता है। इसलिए, ऐसी महिलाएं जिनकी प्रेगनेंसी के दौरान ग्रे मैटर में काफी कमी आती है, उनके मन में बच्चे को लेकर नकारात्मक भावनाएं कम होती हैं।

2. इससे याद्दाश्त कमज़ोर नहीं होती

. मेरी अपनी प्रेगनेंसी और डिलिवरी के बाद के मेरे अनुभवों से और अन्य मांओं ने मुझे जो बताया, उसके आधार पर मैं कह सकती हूं कि प्रेगनेंसी और पोस्टपार्टम समय में मेमरी लॉस सच बीच है। लेकिन एक अध्ययन के मुताबिक प्रेगनेंसी में दिमाग में होनेवाले बदलावों से मेमरी पर असर नहीं होता। लेकिन, जैसा कि इस दौरान मस्तिष्क सिकुड़ जाता है, तो खतरे के संकेत को पहचानने या उसकी सजगता बढ़ाता है और बच्चे की देखभाल करते समय ये सब मां के लिए किसी विशेष शक्ति जैसी लगती है। लेकिन अचानक से याद्दाश्त या मेमरी कम होने का मस्तिष्क के आकार के साथ कुछ लेना-देना नहीं करना है। रिसर्च करने वालों का मानना है कि इसकी वजह तनाव हो सकता है।

3. पोस्टपार्टम (postpartum) तकलीफों से निपटने में मदद

चूंकि मस्तिष्क डिलिवरी के बाद बच्चे के साथ आपके रिश्ते को और बेहतर बनाने में मदद करता है। यह एक तरह से मां को बच्चे जन्म के जन्म के बाद का डिप्रेशन या बेबी ब्लूज़ का सामना करने में मदद करता है और बच्चे के साथ आपका लगाव बेहतर हो जाता है।

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अनुवादक: Sadhana Tiwari.

चित्रस्रोत:Shutterstock Images.

संदर्भ:Hoekzema, E., Barba-Müller, E., Pozzobon, C., Picado, M., Lucco, F., García-García, D., … & Ballesteros, A. (2017). Pregnancy leads to long-lasting changes in human brain structure. Nature neuroscience, 20(2), 287-296.

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