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डॉक्टर कहती हैं कि इनफर्टिलिटी के लिए करीब 40% पुरष जिम्मेदार होते हैं.
शादी के बाद जब कोई कपल बेबी प्लान करता है तो हर महीने कंसीव करने की उम्मीद रहती है। वैसे तो प्रेगनेंसी का सबसे पहला लक्षण (Pregnancy early symptoms) पीरियड मिस होना होता है लेकिन जब कोई बेबी के लिए बहुत बेकरार होता है तो उनसे पीरियड मिस होने का इंतजार नहीं हो पाता और वो ओवेल्यूशन (Ovulation) के 1 हफ्ते बाद से ही घर में प्रेगनेंसी किट (Pregnancy Kit) लाकर यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट (Urine Pregnancy Test) करने लगते हैं। कई महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो प्रेगनेंसी किट को यूज तो करती हैं लेकिन उन्हें इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका पता नहीं होता है। कई लोगों की शिकायत होती है कि जब उन्होंने किट में यूरिन डाला तो 1-2 मिनट तक सिर्फ 1 लाइन आई लेकिन 5 मिनट बाद देखा तो दूसरी लाइन हल्की दिख रही थी, क्या ये प्रेगनेंसी है? आइए आज जानते हैं कि आखिर प्रेगनेंसी किट में सही रिजल्ट देखने का तरीका क्या है और यूरिन डालने के बाद कितनी देर इंतजार करना चाहिए?
प्रेगनेंसी किट में हमेशा सुबह के पेशाब का इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि कुछ डॉक्टर कहते हैं कि किट को दिनभर के किसी भी पेशाब के साथ यूज किया जा सकता है। किट यूज करने के लिए सबसे पहले किट को खोलें और ड्रापर की मदद से किट में 4 बूंदे पेशाब की डालें। पेशाब डालने के तुरंत बाद किट महिला के शरीर में HCG हॉर्मोनको रीड करती है और स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाती है। इसके लिए आपको सिर्फ 2 मिनट का इंतजार करना होता है। अगर 2 मिनट के अंदर किट की स्क्रीन में 2 लाइन आती हैं तो इसका मतलब ये है कि आप प्रेगनेंट हैं और अगर सिर्फ 1 लाइन आती है तो आप मतलब आप प्रेगनेंट नहीं हैं। कई लोग ऐसे होते हैं जो किट में पेशाब डालते के 5 मिनट बाद रिजल्ट देखते हैं। ये तरीका सही नहीं है। क्योंकि 5 से 7 मिनट के बाद अगर आप प्रेगनेंट नहीं भी हैं तब भी आपको वहां एक हल्की लाइन दिख सकती है। डॉक्टर 2 या ज्यादा से ज्यादा 3 मिनट के अंदर रिजल्ट चेक करने की सलाह देते हैं।
एक ओर जहां समय आगे बढ़ रहा है, जमाना एडवांस हो रहा है और नई-नई टेक्नोलॉजी आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर इनफर्टिलिटी का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। आपको बता दें कि इनफर्टिलिटी दो तरह की होती है, पहली होती है प्राइमरी इनफर्टिलिटी(Primary infertility) और दूसरी होती है सेकेंडरी इनफर्टिलिटी (Secondary infertility). प्राइमरी इनफर्टिलिटी वो होती है जिसमें एक शादीशुदा कपल बिना प्रोटेक्शन लिए 1 साल तक इंटरकोर्स करता है लेकिन महिला कंसीव नहीं कर पाती है। जबकि सेकेंडरी इनफर्टिलिटी वो होती है जिसमें महिला 1 बार तो कंसीव कर लेती है लेकिन फिर दोबारा नहीं कर पाती है। इसके पीछे महिला और पुरष दोनों जिम्मेदार हो सकते हैं। गायनोकॉलोजिस्ट अर्चना निरूला कहती हैं कि इनफर्टिलिटी के लिए करीब 40% पुरष जिम्मेदार होते हैं। इसलिए सबसे पहले पुरुष का सीमन एनालिसिस कराना चाहिए।
डिसक्लेमर: ये जानकारी कई रिपोर्ट पढ़ने और महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभवों के आधार पर बताई जा रही है। प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करने या प्रेगनेंसी कंफर्म करने के लिए आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।