डायबिटीज में गर्भधारण करने से जुड़ी एक्सपर्ट टिप्स

अगर कोई डायबिटिक महिला गर्भधारण की कोशिश कर रही है तो उसे कई बातों का ध्यान रखना होगा।

WrittenBy

Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 3, 2018 4:18 PM IST

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैल सकती है। टाइप-1 टायबिटीज अनुवांशिक होती है जबकि टाइप-2 डायबिटीज सुस्त और ख़राब जीवनशैली की वजह से होती है। इसीलिए अगर कोई डायबिटिक महिला गर्भधारण की कोशिश कर रही है तो उसे कई बातों का ध्यान रखना होगा। प्रेगनेंसी के लिये प्लानिंग की जरुरत हैं और अगर आप डायबिटिक हैं तो आपको मेटिकुलोस प्लानिंग करनी चाहिए| ब्लड शुगर लेवल्स हाई होने से गर्भाधारण के समय समस्या हो सकती हैं और प्रेगनेंसी में आगे चलकर भी कुछ समस्याएं हो सकतीहैं | लेकिन अगर ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित कर लिया जाए तो गर्भधारण में आसानी होती है। अगर कोई महिला डायबिटीज़ की मरीज़ है तो उसे गर्भधारण से पहले ब्लड ग्लूकोज़ लेवल और अपनी सेहत दोनों कंट्रोल में लाने के लिए डॉक्टरी मदद जरूर लेनी चाहिए| डॉ. मेघना सरवैया (कंसल्टेंट गायनाकोलॉजिस्ट, क्लाउडनाईन हॉस्पिटल, मुंबई) के मुताबिक अगर डायबिटीक मां अपने रक्त में शुगर लेवल को कंट्रोल कर लेती है तो उसे गर्भधारण और गर्भावस्ता में कोई परेशानी नहीं होगी।

इसके साथ ही उन्होंने कुछ और खास जानकारियां दीं:-

क्या करें गर्भधारण से पहले

प्रेगनेंसी प्लानिंग के लिए सहमत होने के बाद गर्भधारण से पहले अपने डॉक्टर से विचार-विमर्श करें। कुछ ज़रूरी टेस्ट्स के साथ ब्लड शुगर लेवल भी चेक कराने की सलाह दी जा सकती है| अगर आप ब्लड शुगर लेवल्स को कंट्रोल करने के लिये दवाइयां या हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट ले रहे हैं तो कंसीव करने के लिये ये सुरक्षित है या नहीं अपने डॉक्टर से जरूर पूछें | मेटाफोर्मिन दवाई प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित मानी जाती हैं |  एंडोक्रोनोलॉजिस्ट आपके शरीर के परिस्थिती अनुसार आपको मेटफोर्मिन और इन्सुलिन या सिर्फ इन्सुलिन की सलाह दे सकते हैं| आमतौर पर गर्भधारण के दौरान किसी अन्य प्रकार की दवा की सलाह नहीं दी जाती| डॉ. सरवैया ने बताया कि इसके अलावा वजन कम करने, मीठा कम खाने, डायट मैनेजमेंट और स्मोकिंग -शराब छोड़ने जैसी सलाहें दी जाती हैं| इसके अलावा अगर दिल, किडनी या लीवर की किसी समस्या से आप पीड़ित हैं तो डायबिटीज की वजह से उसका भी उपचार मां बनने से पहले ही कराना ज़रुरी हैं | प्रेगनेंसी की वजह से ये समस्याए बढ़ सकती हैं और पेट में पलते बच्चे के सेहत के लिये हानिकारक हो सकती हैं|

गर्भधारण के दौरान रखें इन बातों का ख्याल

खून में शुगर लेवल नॉर्मल होने का मतलब है कि सुबह खाली पेट यह 70 एम जी/डी एल होना चाहिए और नाश्ता करने दो घंटों बाद यह 140 एम जी/डी एल के स्तर तक होना चाहिए। ब्लड शुगर नियंत्रित होने के बाद आपका डॉक्टर आपको गर्भधारण के लिए कोशिश करने को कह सकता है। फर्टाइल पीरियड में सेक्स करने से आपके जल्दी प्रेगनेंट होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आपका शुगर लेवल कंट्रोल हो जाए तो फिर आप 2-3 महीनों में कंसीव कर सकती हैं, मगर ध्यान रखें गर्भधारण के बाद भी ब्लड ग्लूकोज़ लेवल नियंत्रण में ही रहे। इसके अलावा डॉ.सरवैया कहती है प्रेगनेंसी के दौरान शुगर लेवल सही रखने के लिए आप जो भी दवाइयां खाएं वह किसी डायबेटॉलॉजिस्ट या एंडोक्रोनॉलॉजिस्ट की सलाह से ही लें।

प्रेगनेंसी के दौरान भी ना करें लापरवाही

गर्भधारण के बाद भी शुगर लेवल कंट्रोल में रखना एक हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए बहुत ज़रूरी है। शुगर लेवल बढ़ने से मां और बच्चा दोनों को खतरा हो सकता है। शुगर लेवल कम करने के लिए डॉ. मेघना ने कुछ और टिप्स दीं

  • सही डायट
  • दवाइयां सही समय पर लें
  • नियमित ब्लड टेस्ट करें
  • रोजाना एक्सरसाइज करें

चित्रस्रोत: Shutterstock.

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source