करीना कपूर की नहीं हुई ड्यू डेट पर डिलीवरी, क्या डिलीवरी डेट पर बच्चा नहीं होने से बढ़ जाता है सिजेरियन का खतरा?
करीना कपूर की नहीं हुई ड्यू डेट पर डिलीवरी, क्या डिलीवरी डेट पर बच्चा नहीं होने से बढ़ जाता है सिजेरियन का खतरा?
Kareena Kapoor Pregnancy News in Hindi: करीना कपूर की ड्यू डेट 15 फरवरी थी, लेकिन अब तक उन्होंने बच्चे को जन्म नहीं दिया है। ऐसे में क्या यह सिजेरियन डिलीवरी के रिस्क को बढ़ाता है, जानिए नॉर्मल और सिजेरियन डिलीवरी के लक्षण व संकेत....
Written By: Anshumala | Updated : February 20, 2021 5:36 PM IST
करीना कपूर डिलीवरी ड्यू डेट निकली आगे, क्या होता है डिलीवरी डेट पर बच्चा नहीं होने पर?
Kareena Kapoor Pregnancy Latest in Hindi: करीना कपूर खान (kareena kapoor in hindi) किसी भी दिन अपने दूसरे बच्चे को जन्म दे सकती हैं। उनकी डिलीवरी डेट इसी महीने है। हालांकि, कुछ दिनों पहले सैफ अली खान ने कहा था कि 15 तारीख को करीना बच्चे को जन्म दे सकती (kareena kapoor's pregnancy due date) हैं। वैसे, अब तक कोई खुशखबरी सामने नहीं आई है। इससे पहले करीना कपूर (Kareena Kapoor Pregnancy News in Hindi) के पिता रणधीर कपूर ने भी कहा था कि 15 फरवरी के आसपास डिलीवरी होने की संभावना है।
मां बबीता कपूर पहुंचीं बेटी बेबो का हालचाल लेने
हाल ही में करीना कपूर (Kareena kapoor) की मां बबीता कपूर (Babita Kapoor) भी उनके नए घर में डिलीवरी से पहले उनसे मिलने गई थीं। प्रेग्नेंसी के 9वें महीने में भी बेबो (करीना कपूर) काफी एक्टिव नजर आती हैं। शूटिंग पर जाती रही हैं। खबरों के अनुसार, वे मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में अपने दूसरे बच्चे को जन्म दे सकती हैं। ड्यू डेट से पहले वो पिछले सप्ताह रुटीन चेकअप के लिए क्लिनिक भी गई थीं। वैसे ड्यू डेट बीत जाने के बाद अक्सर गर्भवती महिला (Pregnant women) को मन में ये चिंता सताने लगती है कि डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन? आइए जानते हैं किन परिस्थितियों में करवाना पड़ सकता है सिजेरियन डिलीवरी और क्या हैं इसके संकेत व लक्षण (C Section Delivery symptoms in Hindi)....
क्या 10वें महीने में बढ़ जाता है सिजेरियन डिलीवरी का खतरा?
डिलीवरी ड्यू डेट निकल जाने के बाद भी कई बार कुछ महिलाएं 10वें महीने में बच्चे को जन्म देती हैं। हालांकि, इस दौरान ये चिंता भी सताने लगती है कि नॉर्मल डिलीवरी होगी या सिजेरियन। नॉर्मल डिलीवरी (Normal Delivery) से एक बच्चे को जन्म देना सेहत के लिहाज से बेहतर माना जाता है। सिजेरियन डिलीवरी (C Section Delivery) थोड़ा रिस्की भी होता है और इसके कई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। किसी भी तरह का ऑपरेशन आपके शरीर को कमजोर बना देता है। करीना कपूरकी तरह आपकी डिलीवरी ड्यू डेट (Kareena kapoor's Delivery due date) बीत चुकी है और आपके मन में डर है कि सिजेरियन की नौबत ना आ जाए, तो कुछ संकेतों से पहचान सकती हैं कि बच्चा नॉर्मल होगा या सिजेरियन के जरिए.....
नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण (Normal Delivery Symptoms)
जब बच्चा डिलीवरी ड्यू डेट से दो से तीन सप्ताह पहले पेल्विक भाग में आ जाए और उसका हिलना-डुलना कम हो जाता है।
आखिरी महीने में मूत्राशय पर शिशु का दबाव पड़ने लगता है, जिससे बार-बार यूरिन पास करने का मन करता है।
कमर, जांघों, पेट के निचले हिस्सों में ऐंठन, दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है।
डिलीवरी से पहले कॉन्ट्रैक्शन यानी संकुचन होना।
वेजाइना से गाढ़ा डिस्चार्ज होना।
वेजाइना से खून आने को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लिक्विड यानी पानी निकलना शुरू हो जाए एम्नियोटिक फ्लूइड की थैली से, तो समझ लें नॉर्मल डिलीवरी होगी।
सिजेरियन डिलीवरी के संकेत (C Section Delivery symptoms)
सिजेरियन डिलीवरी की तब जरूरत पड़ती है, जब बच्चे या गर्भवती महिला को कोई समस्या हो रही हो।
प्रसव पीड़ा 10वें महीने में ना हो, शिशु को कोई तकलीफ हो, बिल्कुल भी हिलना-डुलना बंद कर दे, तो जांच करने के बाद डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दे सकता है।
9 महीने होने के बाद भी प्रसव पीड़ा ना हो, तो सिजेरियन डिलीवरी करवाना पड़ सकता है।
यदि आपको प्लेसेंटा प्रीविया की समस्या है, तो सिजेरियन डिलीवरी के चांसेज होते हैं।
प्रसव के दौरान यूट्राइन रप्चर की समस्या होने पर तुरंत सिजेरियन करने की नौबत आ जाती है। इसमें गर्भ में पल रहे शिशु को ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो पाती। हालांकि, यूट्राइन रप्चर रेयर है।
कई बार पहला बच्चा सिजेरियन से हुआ हो, तो दूसरे में भी सिजेरियन की जरूरत पड़ती है। हालांकि, हर प्रेग्नेंट महिला के केस में जरूरी नहीं कि यह स्थिति आए ही।
यदि गर्भ में जुड़वां या इससे अधिक बच्चे हों, तो सिजेरियन करवाना पड़ता है।
पहले से कोई शीरीरिक समस्या जैसे अचानक गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर हाई हो जाना, जेस्टेशनल डायबिटीज, हृदय रोग, एचआईवी या फिर कोई अन्य इंफेक्शन होने की स्थिति में भी सिजेरियन करवाना पड़ता है। इन शारीरिक समस्याओं में नॉर्मल डिलीवरी से मां या बच्चे की जान भी जा सकती है।
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