
... Read More
Written By: Anshumala | Published : July 26, 2018 6:01 PM IST
व्यस्तम जीवनशैली और महिलाओं के कामकाजी होने या बांझपन के चलते भी महिलाओं के लिए संतान सुख अब परेशानियों को सबब नहीं रहा। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ एक ऐसी तकनीक है, जिसमें महिलाओं में कृतिम गर्भाधान किया जाता है। यह तकनीक महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई है। बीते दशक में इस तकनीक का प्रयोग बेहद बढ़ गया है। भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में बांझपन और किराए की कोख यानी सरोगेट मदर्स का चलन भी बढ़ा है। बहुत सी महिलाएं ओवम यानी अंडाणु न बनना, गर्भाशय का कमजोर होना, थ्रेटंड एबरेशन और हैबिचुअल मिसकैरिज जैसे मामलों के कारण मां नही बन पातीं थीं।
मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर शोभा गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में 30 के बाद और पुरूषों में 35 वर्ष के बाद प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। आयु बढ़ने के साथ ही महिलाओं में डिम्ब ग्रंथियों से स्त्री बीज कम संख्या में उत्सर्जित होने लगते हैं और वे आसानी से निषेचित नहीं होते हैं। साथ ही जीन से जुड़ी विकृतियों के बढने का भी खतरा रहता है। गर्भाशय की धारण क्षमता कम हो जाने से गर्भाशय गर्भस्थ भू्रण को संभालने में असमर्थ रहता है। इस वजह से गर्भपात जैसी समस्याओं का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे आईवीएफ तकनीक का प्रयोग कारगर होता है।
सस्ते आईवीएफ के चक्कर में पड़ सकते हैं लेने के देने, सही चुनाव कर पाएं ढेरों खुशियां
क्या करते हैं डिंक कपल
''डबल इनकम नो किड'' (डिंक) कपल धारणा रखने वाली महिलाएं भी इस तकनीक को लेकर बहुत उत्साहित हैं। कुछ वर्षों पहले तक इस सपने को पूरा करने की कीमत अधिकतर कामकाजी महिलाओं को अपनी नौकरी छोड़कर चुकानी पड़ती थी, लेकिन वक्त ने उन्हें इस जंग में भी जीत दिला दी है। आजकल मेट्रो शहरों में ज्यादातर कपल डबल इनकम नो किड में भरोसा रखते हैं।
आईवीएफ से पाएं संतान सुख
कुछ सालों पहले तक भी युवतियां ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने पर विश्वास रखती थीं लेकिन इसके कारण अपनी फैमिली लाइफ से कोई समझौता नहीं करती थीं लेकिन अब कई बड़े शहरों में ऐसा आसानी से देखने को मिल जाता है। इन शादीशुदा जोड़ों को जब तक इस बात का ख्याल आता है कि अधिक पैसा कमाने के चक्कर में उन्होंने अपने परिवार बनाने पर ध्यान नहीं दिया तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। आईवीएफ तकनीक के बदौलत ऐसी महिलाओं को भी संतान का सुख आसानी से मिल जाता है। इस तकनीक से मनचाहे गुणों वाली संतान उत्पन्न करने के प्रयास भी होते हैं।
यह भी पढ़ें- इर्रेगुलर पीरियड्स का कारण सिर्फ प्रेगनेंसी नहीं, जानिए और कौन-कौन सी हैं वजहें
देर से होने वाली शादियां
45 साल के बाद इंसान का शरीर इस तरह के बड़े परिवर्तनों को झेलने की क्षमता खो देता है। पूरी दुनिया में प्रजनन संबंधी विषेशज्ञों और डॉक्टरों का आम मत है कि 50 वर्ष की उम्र के बाद महिला के गर्भधारण और बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया जोखिम से भरी होती है, हालांकि बीच-बीच में ऐसी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं कि 60 या यहां तक कि 65 साल की महिला ने बच्चों को जन्म दिया।
40 के बाद प्रेगनेंसी में आ सकती है दिक्कत
शांता आईवीएफ सेंटर की आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर अनुभा सिंह ने बताया कि 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में गर्भधारण की संभावना कुछ कारणों से कम हो सकती है। डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां होने के कारण अंडाणु कम बनते हैं या उम्र के कारण गर्भाशय में परिवर्तन होने लगते हैं और डिलीवरी कठिन हो जाती है। इसके अलावा जोड़ों में इतना लचीलापन नहीं रह जाता कि डिलीवरी आसानी से हो सके।
क्या है आईवीएफ टेक्नीक
डॉक्टर शोभा गुप्ता कहती हैं कि आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें महिलाओं में कृतिम गर्भाधान किया जाता है। इसमें निसंतान दंपत्तियों के अंडे व शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण बनाया जाता है और उसके बाद उसे महिला के शरीर में ट्रांसफर किया जाता है। आईवीएफ तकनीक का प्रयोग कर देश-विदेश में कई महिलाओं को मां बनने का सुख मिल पाया है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.