IVF स्पेशलिस्ट ने बताए फर्टिलिटी से जुड़े 5 मिथ, 50% लोग आज भी करते हैं भरोसा
बदलती लाइफस्टाइल के बीच फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन आज भी इससे जुड़े कई मिथक समाज में फैले हैं। इस लेख में आईवीएफ स्पेशलिस्ट की मदद से जानेंगे ऐसे कौन से मिथक हैं, जिन पर आज भी लोग आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं।
फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता भी हमारे शरीर का एक आम बॉडी फंक्शन है, यानी जिस तरह हमारा शरीर खाना पचाता है, किडनी फिल्टर करती है और हार्ट ब्लड पंप करता है उसी प्रकार फर्टिलिटी भी एक फंक्शन है और कई बार इसे जुड़ी गड़बड़ी हो सकती है। लेकिन जब किसी को फर्टिलिटी से जुड़ी कोई समस्या हो जाती है, तो लोग इस बारे में खुलकर बात नहीं करते बल्कि आगे-पीछे बाते होने लगती हैं। यही कारण है कि फर्टिलिटी या इनफर्टिलिटी से जुड़ी आजकल बहुत सी अफवाह बहुत से मिथक बन जाते हैं। डॉ. साक्षी चोपड़ा, आईवीएफ स्पेशलिस्ट, कैलाश दीपक हॉस्पिटल, न्यू दिल्ली ने इस बारे में बेहद जरूरी जानकारी दी और बताया कि आखिर वे कौन से मिठक हैं जिन पर लोग आज भी भरोसा करके बैठे हुए हैं। इस लेख में हम आपको इसी बारे में कुछ खास जानकारियां देने वाले हैं।
इनफर्टिलिटी की दिक्कत महिलाओं में ही होती है
आज भी भारत में एक बड़ी संख्या में लोगों को लगता है कि इनफर्टिलिटी सिर्फ महिलाओं की वजह से होती है। जबकि ऐसा होता क्योंकि लगभग 40 से 50 प्रतिशत मामलों में मेल फैक्टर भी जिम्मेदार होता है। इसलिए अगर प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ रही है, तो इवैल्यूएशन हमेशा हसबैंड और वाइफ दोनों का होना चाहिए। कई बार लोग सिर्फ महिला की जांच करवाते हैं, जिससे सही डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट में देरी हो सकती है।
आईवीएफ के बच्चे अनहेल्दी होते हैं
अक्सर कुछ कपल आईवीएफ कराने से भी डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि आईवीएफ के बच्चे अनहेल्दी होते हैं। हालांकि, ऐसा कुछ नहीं होता है। आईवीएफ से पैदा होने वाला बच्चा भी उतना ही हेल्दी होता है, जितना नैचुरली कंसीव बच्चा होता है। अंतर सिर्फ इतना होता है कि फर्टिलाइजेशन लेबोरेटरी में कराया जाता है, उसके बाद एंब्रियो को यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए सिर्फ आईवीएफ से प्रेगनेंसी होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चा कम हेल्दी होगा।
आईवीएफ से बच्चे की गारंटी मिलनी चाहिए
अक्सर कुछ लोग यह भी कहते है कि अगर वे पैसे लगाकर आईवीएफ कराएंगे तो उससे बच्चा होने की गारंटी भी तो मिलनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता क्योंकि आईवीएफ में भी गारंटी नहीं होती। आईवीएफ का सक्सेस महिला की एज, एग्स की क्वालिटी, स्पर्म की क्वालिटी, एम्ब्रियो की ग्रेडिंग और इनफर्टिलिटी की वजह पर डिपेंड करता है। इसलिए हर कपल का ट्रीटमेंट और उसका आउटकम अलग हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि मिथ्स पर भरोसा करने के बजाय सही जानकारी लें और समय पर फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लें। सही जानकारी और सही समय पर शुरू किया गया ट्रीटमेंट, पैरेंट बनने की संभावना को बेहतर बना सकता है।
आईवीएफ के बारे में समझना भी जरूरी है कि यह एक पेनलेस प्रोसीजर है यानी इसे करते समय दर्द नहीं होता है। इसमें इंजेक्शन की नीडल बहुत छोटी होती है, जो सिर्फ स्किन में जाती है। और जो एग्स निकाले जाते हैं, वो एनेस्थीसिया के अंडर निकाले जाते हैं, इसलिए यह भी एक कंफर्टेबल प्रोसेस होता है। अधिकांश पेशेंट्स इस प्रोसीजर को अच्छी तरह टॉलरेट कर लेते हैं और बहुत जल्दी अपनी नॉर्मल रूटीन में वापस आ जाते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल फर्टिलिटी को लेकर जुड़े मिथकों के बारे में जानकारी देना है इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।