
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Epilespsy and pregnancy: एपिलेप्सी या मिर्गी की बीमारी के बारे में कई तरह की भ्रांतियां और मिथक (Epilepsy Myths) लोगों में देखे जाते हैं। जिसकी वजह से मिर्गी की मरीजों को अलग-अलग तरह समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। जैसे एक कॉमन मिथक यह है कि मिर्गी से पीड़ित महिलाओं के लिए साधारण तरीके से गर्भधारण (Can Epilespsy cause problems in pregnancy?) करना संभव नहीं होता और उनका बच्चा स्वस्थ नहीं होता। लेकिन, यह बात पूरी तरह से सच नहीं है। जानकारों के अनुसार मिर्गी से पीड़ित महिलाओं में भी स्वस्थ बच्चों को जन्म दे सकती हैं।
मिर्गी की बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 12 फरवरी को विश्व मिर्गी दिवस (World Epilepsy Day 2024) मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य मिर्गी की बीमारी से जुड़ी सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना है और साथ ही मिर्गी से पीड़ित लोगों को साधारण तरीके से जीवन जी पाने लायक माहौल तैयार करना है।
बता दें कि मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर (Neurological disorder) है और यह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों में भी पायी जाती है। हालांकि, जब किसी महिला को मिर्गी की बीमारी हो तो उन्हें इस बात की चिंता हमेशा सताती है कि वह महिला क्या गर्भधारण (conceiving) कर पाएगी और क्या उनका बच्चा स्वस्थ होगा। हालांकि इन सबके लिए महत्वपूर्ण यह है कि मिर्गी पीड़ित महिला सही तरीके की ट्रीटमेंट (Epilepsy cure) ले, सही समय पर दवाएं लें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सभी जरूरी बातों पर अमल करें।
गर्भधारण करने से पहले एपिलेप्सी से पीड़ित महिला को काफी पहले से तैयारियां शुरू करनी पड़ती हैं। अगर महिला मिर्गी की दवाइयां खा रही हैं तो प्रेगनेंसी से पहले अपने न्यूरोलॉजिस्ट से बात जरूर करें। प्रेगनेंसी से पहले दवाओं में बदलाव किए जाते हैं और कोशिश की जाती है बच्चे को दवाओं के साइड-इफेक्ट्स से बचाया जा सके। हालांकि स्टडीज और रिसर्च में यह कहा गया है कि मिर्गी की अधिकांश दवाएं ऐसी हैं जिनकी वजह से फर्टिलिटी पॉवर प्रभावित नहीं होती हैं।
मिर्गी की वजह से महिलाओं को गर्भधारण में अन्य महिलाओं की तुलना में थोड़ी परेशानियां अधिक हो सकती हैं। मिर्गी की दवाइयों की वजह से भी बच्चे पर खराब असर पड़ सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर और ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ सकता है। इसी तरह इन महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद डिप्रेशन में जाने की संभावना हो सकती है।
जिन महिलाओं को मिर्गी की वजह से अनिद्रा जैसी परेशानी होती है तो उन्हें नॉर्मल डिलिवरी में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, दवाओं के सेवन के कारण प्रेगनेंसी के दौरान कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इसी तरह लेबर पेन के समय अगर मिर्गी का दौरा आए तो यह भी परेशानी का कारण हो सकता है। दरअसल दौरे की वजह से बच्चे तक ऑक्सीजन की सप्लाई रूक सकती है। इसीलिए, डॉक्टर के सम्पर्क में लगातार रहें, समय पर सोनोग्राफी कराएं और रिपोर्ट्स के आधार पर सावधानियां बरतें।
एपिलेप्सी की मरीज महिलाओं के बच्चों पर मां की बीमारी का असर इस बात पर निर्भर करता है जो कि मां को किस तरह की और कितनी मात्रा में दवाएं दी जा रही हैं। जिन महिलाओं को बहुत अधिक दवाइयां खिलायी जा रही हैं उनके बच्चे पर असर देखा जा सकता है। इसी तरह जन्म के समय वजन अन्य बच्चों की तुलना में कम हो सकता है। बच्चे की हेल्थ का ख्याल रखने के लिए यह जरूरी है कि आप किसी अनुभवी और जानकार पीडियाट्रिशियन की देखरेख में बच्चे की परवरिश करें।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई बीमारी और प्रेगनेंसी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी हैं। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)