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क्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होना नॉर्मल है? जानें स्थिति कब बनती है खतरनाक

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होना आम समस्या नहीं है। शुरुआती 3 महीने में हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। लेकिन, अगर ज्यादा रक्तस्त्राव हो रहा है, तो डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।

क्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होना नॉर्मल है? जानें स्थिति कब बनती है खतरनाक

Written by Anju Rawat |Published : February 6, 2026 9:00 AM IST

Bleeding During Pregnancy:  प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। इस दौरान मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, उल्टी-मतली और पेट दर्द जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है। लेकिन, कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग या स्पॉटिंग भी होती है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में ब्लीडिंग को सामान्य माना जाता है। लेकिन, अगर ज्यादा ब्लीडिंग यानी रक्तस्त्राव हो रहा है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों में कई महिलाओं को हल्की गुलाबी या भूरे रंग की स्पॉटिंग होती है। यह भ्रूण के गर्भाशय की दीवार में इम्प्लांटेशन के कारण हो सकता है। यह हार्मोनल बदलाव की वजह से भी रक्तस्त्राव हो सकता है। नर्चर के स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज (Dr. Archana Dhawan Bajaj, Gynaecologist and IVF Expert at Nurture)

क्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होना नॉर्मल है?

प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में अक्सर लोग ब्लीडिंग को नॉर्मल मान लेते हैं। जबकि, हर प्रकार की ब्लीडिंग को सामान्य मान लेना बिल्कुल सही नहीं है।

अगर आपको ब्लीडिंग हो रही है और खून का रंग गहरा लाल है तो इस संकेत की अनदेखी न करें।

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ब्लीडिंग के साथ पेट दर्द, चक्कर आना या कमजोरी भी हो रही है तो यह संकेत भी सामान्य नहीं है।

आपको बता दें कि शुरुआती प्रेग्नेंसी में ज्यादा ब्लीडिंग होना, गर्भपात का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, ज्यादा ब्लीडिंग किसी संक्रमण का संकेत भी हो सकता है। यह स्थिति मां और भ्रूण, दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में ब्लीडिंग हो सकता है, लेकिन अगर ज्यादा हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें।

दूसरी और तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग

डॉ. अर्चना धवन बताती हैं, "प्रेग्नेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग होना सामान्य नहीं है। अगर दूसरी और तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग हो रही है, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।"

प्लेसेंटा प्रीविया: जब प्लेसेंटा, गर्भाशय के निचले हिस्से को ढक देता है तो इस स्थिति में ब्लीडिंग हो सकती है।

प्लेसेंटल एब्रप्शन: जब प्लेसेंटा बच्चे के जन्म से पहले ही गर्भाशय की दीवार से अलग होने लगता है, तो इस स्थिति में ब्लीडिंग हो सकती है।

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग के जोखिम को कैसे कम करें?

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग के जोखिम को कम करने के लिए आप लाइफस्टाइल और डाइट का खास ख्याल रखें।

  • प्रेग्नेंसी में रेगुलर चेकअप जरूर कराना चाहिए।
  • बैलेंस डाइट लें। अपनी डाइट में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें।
  • आपको पर्याप्त नींद और आराम जरूर करना चाहिए।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान आपको भारी वजन उठाने से बचना चाहिए।

हर प्रेग्नेंसी अलग होती है और ब्लीडिंग का कारण भी अलग-अलग होता है। अगर हल्की ब्लीडिंग हो रही है, तो यह सामान्य हो सकती है। लेकिन, अगर ब्लीडिंग लगातार और ज्यादा हो रही है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।