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क्या बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं के लिए पेशाब कंट्रोल कर पाना मुश्किल हो जाता है?

बच्चे के जन्म के बाद 6 सप्ताह या 3 महीनों के भीतर आपको इसके विपरीत परिणाम दिखायी पड़ेंगे।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 12, 2018 12:54 PM IST

वैजाइनल डिलिवरी के बाद अक्सर हंसते, रोते या एक्सरसाइज़ करते समय पेट पर दबाव बनने पर अचानक से यूरीन की बूंदे निकल जाती है। यह वैजाइनल डिलिवरी के बाद महिलाओं को होनेवाली सबसे आम समस्या है। बच्चे के जन्म के बाद ब्लैडर पर कंट्रोल नहीं पाता है। हालांकि बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिनों तक यह समस्या सभी महिलाओं को होती है।

इस समस्या को स्ट्रेस इन्कान्टनन्स कहते हैं जो प्राकृतिक रुप से बच्चे को जन्म देने यानि वैजाइनल डिलिवरी होने के बाद या लेबर रुम में कठिन स्थितियों से गुज़रने के बाद महिलाओं को होनेवाली एक समस्या है। ऐसा कहा जाता है कि ऐसी महिलाएं जो सी-सेक्शन कराती हैं या अंतिम समय में जिनका सी-सेक्शन किया जाता है वे भी इस तकलीफ से बच नहीं पातीं। उन्हें भी कुछ हद तक इस तरह की तकलीफ हो सकती है।

साथ ही अगर आपका एपिड्यूरल किया जाता है, तो आपके ब्लैडर के आसपास की नसें  सुन्न महसूस होने लगती हैं। इसलिए डिलिवरी के कुछ दिन बाद तक आपको ब्लैडर पर नियंत्रण रखने में बहुत दिक्कत होगी। यहां तक कि आपको कई बार खुद-ब-खुद पेशाब हो जाएगी। हालांकि बच्चे के जन्म के बाद 6 सप्ताह या 3 महीनों के भीतर आपको इसके विपरीत परिणाम दिखायी पड़ेंगे। कई बार तो यह परेशानी काफी लंबे समय तक रह सकती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें और उनकी मदद लें।

ब्लैडर पर दोबारा कंट्रोल पाने के लिए पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ेस मददगार साबित हो सकती हैं। आपके पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के मज़बूत बनने से आपका ब्लैडर पर दोबार नियंत्रण हो सकेगा। इसलिए आप इस बात का ध्यान रखें कि आप नियमित रुप से इन एक्सरसाइज़ेस की प्रैक्टिस कर रही हों। एक और आसान उपाय है मैटर्निटी पैड का इस्तेमाल। जिन्हें आप अपने अंडरगार्मेंट्स को गीले होने से बचाने के लिए पहन सकती हैं। ध्यान दीजिए कपड़ों को गीला होने से बचाना ज़रुरी है क्योंकि गीले अंडरगार्मेंट्स से वैजाइनल एरिया में इंफेक्शन होने का ख़तरा होता है। बार-बार वॉशरुम जाएं ताकि बहुत अधिक पेशाब डायपर पर न टपके। कुछ बहुत गंभीर स्थितियों में इस समस्या से राहत के लिए सर्ज़री की सलाह दी जाती है। एक बात का ध्यान रखें कि भले ही सर्ज़री आपको इस समस्या से राहत दिलाती हो लेकिन उसके भी अपने ही नुकसान है। इसलिए सर्ज़री से पहले अच्छी तरह जांच करा लें।