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Written By: Anshumala | Updated : May 23, 2019 12:49 PM IST
इंटरनेशल डे टू एंड ऑब्सटेट्रिक फिस्ट्यूला 2019 © Shutterstock.
ऑब्सटेट्रिक फिस्ट्यूला एक चिकित्सा स्थिति है, जिसमें बच्चे के जन्म के परिणामस्वरूप बर्थ कैनाल में एक छेद विकसित हो जाता है। यह योनि और मलाशय, मूत्रवाहिनी या मूत्राशय के बीच हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप मूत्र या मल असंयमित रूप से न चाहते हुए भी आता है यानी बार-बार आने लगता है। प्रसव के दौरान पर्याप्त देखभाल और केयर ना मिल पाने के कारण इस समस्या से देश भर में हजारों गरीब महिलाएं इसकी शिकार हो जाती हैं।
ऑब्सटेट्रिक फिस्ट्यूला अक्सर प्रसव और बच्चे के जन्म के दौरान विकसित होता है। इस दौरान जब शिशु का सिर मैटर्नल पेल्विस में आता है और ठीक तरह से मां की यानि से बाहर निकल नहीं पाता है, तब यह समस्या होती है। ऐसा अक्सर योनि के बहुत छोटे या सही तरह से विकसित न होने से होता है। शिशु शरीर या सिर से काफी बड़ा हो या खराब स्थिति (malposition) में हो।
ऑब्सटेट्रिक फिस्ट्यूला एक तरह का छेद है, जो योनि और मलाशय या मूत्राशय के बीच हो जाता है। ऐसा तब होता है जब एक महिला को लंबे समय तक प्रसव पीड़ा झेलनी पड़ती है या बच्चा पैदा करने में काफी समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला को मूत्र या मल दोनों ही असंयमित रूप से आने लगता है। ऑब्सट्रक्टेड लेबर से जूझ रही महिला में जब लेबर या प्रसव को नजरअंदाज किया जाता है या उस पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तब ऐसी स्थिति में लेबर छह से लेकर सात दिनों तक रह सकता है।
गर्भाशय के संकुचन के दौरान (uterine contractions) मां के ऊतकों पर लगातार सख्त हड्डियों से (मां के पेल्विस और शिशु के सिर) दबाव पड़ता है। इससे धीरे-धीरे रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे ऊतकों को नुकसान पहुंचता है। फिस्ट्यूला आमतौर पर ब्लैडर या मूत्राशय और वेजाइना के बीच विकसित होता है। मुख्यरूप से योनि और मलाशय के बीच यह समस्या उत्पन्न होती है।
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जटिलताओं में प्रसव में बाधा (ऑब्सट्रक्टेड लेबर), मेडिकल केयर में कमी, कुपोषण, टीनएज प्रेग्नेंसी, बांझपन, सामाजिक अलगाव और गरीबी, अशिक्षा जैसे कारक शामिल हो सकते हैं। कई अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाओं में फिस्ट्यूला होने की औसत उम्र 22-23 वर्ष होती है। लेकिन इससे प्रभावित अधिकतर महिलाएं कम उम्र 13-14 वर्ष की होती हैं।
यूरिनरी या फेकल (मल) इनकंटीनेंस जो लगातार हो सकता है या सिर्फ रात में।
पेट फूलना या फ्लैट्यूलेंस (flatulence)।
दुर्गंध युक्त वेजाइनल डिस्चार्ज।
लगातार वेजाइनल या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होना।
वेजाइन और उसके आसपास के भागों में खुजली और दर्द होना।
सेक्स करते समय दर्द महसूस होना।
ऑब्सटेट्रिक फिस्ट्यूला का निदान मुख्य रूप से इसके लक्षणों पर आधारित होता है। इसका सही तरीके से निदान करने के लिए मिथाइलेन ब्लू का इस्तेमाल किया जाता है।
सिजेरियन सेक्शन के उपयुक्त उपयोग के साथ ऑब्सटेट्रिक फिस्ट्यूला लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है। उपचार आमतौर पर सर्जरी द्वारा किया जाता है। यदि जल्दी इलाज किया जाता है, तो एक मूत्र कैथेटर का उपयोग उपचार में मदद कर सकता है। इसमें काउंसलिंग भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है। सब-सहारा अफ्रीका, एशिया, अरब क्षेत्र और लैटिन अमेरिका में एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 2 मिलियन महिलाओं में एक वर्ष में लगभग 75,000 नए मामले सामने आते हैं। हालांकि, यह बीमारी विकसित देशों में रहने वाली महिलाओं में काफी कम ही पाया जाता है। ऐसे में इसे गरीबी का रोग कहा जाता है।