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Written By: Editorial Team | Published : November 27, 2017 3:51 PM IST
Children who are well nourished the first two years of life are likely to stay well nourished later. © Shutterstock
बच्चे के जन्म के समय होनेवाली तकलीफ और लेबर पेन के वक़्त कैसा महसूस होता है यह केवल एक मां ही समझ सकती है और शायद वही इसे बयां भी कर सकती है। दुनियाभर की भाषाओं के सभी शब्द भी उस खुशी का वर्णन नहीं कर सकते जो एक मां अपने बच्चे के जन्म के समय महसूस करती है। 2 बार सी-सेक्शन से गुज़रने के बाद मैं यह समझ सकी हूं सी-सेक्शन का अनुभव हर बार और हर किसी के लिए अलग-अलग होता है। मैंने कुछ महिलाओं से बात की जो वैजाइनल बर्थ न देने के बाद सी-सेक्शन से गुज़री और उन्होंने हमें बताया कि कैसा रहा उनका अनुभव।
मुझे डर लग रहा था कि मैं फिर से कभी चल नहीं पाउंगी: 'सी-सेक्शन के लिए ऑपरेशन थियेटर में ले जाने से पहले, मुझे नहीं पता था कि वहां क्या-क्या प्रक्रियाएं होती है। मैं उम्मीद कर रही थी कि बच्चे का जन्म वैजाइनल ही होगा, लेकिन अचानक मेरा लेबर पेन रुक गया। मुझे ऑपरेशन थियेटर में ले गए, जहां मुझे बताया गया कि मुझे कमर के नीचे के हिस्से को सुन्न करने के लिए रीढ़ की हड्डी में एनेस्थेसिया दिया जाएगा। जैसे ही शॉट दिया गया, वैसे ही मेरे शरीर का निचला भाग भारी और कठोर हो गया, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो एनेस्थेसिया सचमुच काम करा था। लेकिन मुझे डर लग रहा था अगर मैं इस बिस्तर से कभी उठ नहीं पाऊं तो क्या होगा। 'रूपा झा, झारखंड, 24 साल।
मुझे यकीन नहीं था कि मैं अपने बच्चे को देख सकूंगी: 'मेरी पूरी गर्भावस्था के दौरान, मुझे नहीं लगता कि मेरा बच्चा बहुत हरकते करता है और अक्सर डॉक्टर से इस बारे में शिकायत करती थी। लेकिन उसने हमेशा उन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। मैं पूरी प्रेगनेंसी में परेशान थी और मुझे लगा कि मेरे बच्चे के साथ कुछ गलत था। जब मेरे लेबर पेन की शुरूआत हुई तो मेरे मन में नकारात्मक विचारों का एक भंवर था। किसी तरह यह तनाव और डर मेरे शरीर में उतर गया और मेरा सर्विक्स खुल ही नहीं पा रहा था। 9 घंटे तक लेबर में रहने के बाद डॉक्टरों ने फैसला किया कि मेरा सी-सेक्शन किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया के दौरान जब मैं जाग रही थी, तो मुझे डर लग रहा था कि शायद मैं अपने बच्चे को जीवित नहीं देख पाऊंगी। लेकिन एक बार ऑपरेशन समाप्त हो गया और जब मैंने बच्चे को रोते हुए सुना, तो राहत मिली। 'झुंपा घोष, कोलकाता, 27 साल।
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अनुवादक: Sadhna Tiwari
चित्रस्रोत : Shutterstock Images.
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