‘प्रीनेटल एनीमिया’ से बचना है तो गर्भावस्‍था में रखें इन बातों का ध्‍यान

आज लूसी विल्‍स का जन्‍मदिन है, लूसी विल्स को प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए प्रसवपूर्व एनीमिया यानी प्रीनेटल एनीमिया से बचाने के लिए जाना जाता है। भारत में आज भी दस में से छह गर्भवती महिलाएं प्रीनेटल एनीमिया से ग्रस्‍त हैं।

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Written By: Yogita Yadav | Published : May 10, 2019 7:12 PM IST

गूगल ने आज डूडल बनाकर लूसी विल्‍स को उनके 131वें जन्‍मदिन पर याद किया है। लूसी विल्‍स को दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं के लिए भगवान के रूप में याद किया जाता है। लूसी विल्स का जन्म 10 मई 1888 को हुआ था। लूसी एक रक्त विशेषज्ञ (haematologist) और मेडिकल रिसर्चर भी थीं। उन्‍होंने अपनी शोध में यह साबित किया था कि एक गर्भवती स्‍त्री के लिए फॉलिक एसिड क्यों जरूरी है। आज हर विशेषज्ञ और डॉक्टर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए फॉलिक एसिड को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं और इससे भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह देते हैं। फॉलिक एसिड एक प्रकार का विटामिन-बी है, जो प्राकृतिक रूप से हरी सब्जियों और खट्टे फलों में पाया जाता है।

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प्रीनेटल एनीमिया से बचाता है फॉलिक एसिड

दरअसल, फॉलिक एसिड शरीर में खून की कमी नहीं होने देता है। ऐसे में महिलाओं को प्रसवपूर्व एनीमिया से बचाने में यह काफी मदद करता है। लूसी विल्स की मृत्य 16 अप्रैल 1964 में हुई थी। उनका पूरा जीवन शोध कार्यों और यात्रा में व्यतीत हुआ था। शोध के सिलसिले में लूसी कई बार भारत भी आई थीं। मुंबई में गर्भवती महिलाओं में प्रसवपूर्व एनीमिया से बचाने के लिए उन्होंने कई शोध पर काम किया था। साथ ही उन्होंने अपने शोध के जरिए गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए उपयुक्त न्यूट्रिशन को खोचने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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prenatal-anemia जब आप गर्भवती होती हैं, तो आपके शरीर को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक रक्त वहन करना पड़ता है। अत: आपकी आयरन की आवश्यकता भी उसी अनुसार बढ़ जाती है। © Shutterstock.

गर्भावस्‍था में कितना जरूरी है आयरन

आपको आयरन की आवश्यकता हीमोग्लोबिन बनाने के लिए होती है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न अंगों तथा ऊतकों में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब आप गर्भवती होती हैं, तो आपके शरीर को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक रक्त वहन करना पड़ता है। अत: आपकी आयरन की आवश्यकता भी उसी अनुसार बढ़ जाती है। यदि आपको आहार से आयरन की उतनी मात्रा नहीं मिल पा रही, जितनी शरीर को जरूरत है, तो आपको आयरन की कमी या आयरन की कमी वाला एनीमिया हो सकता है। कुछ लोग इसे खून की कमी भी कहते हैं।

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ज्‍यादातर महिलाएं होती है गर्भावस्‍था में एनीमिया की शिकार

सर्वेक्षणों में पता चलता है कि भारत में 10 में से छह गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। कुछ अनुमान के अनुसार एनीमिया का यह आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है। भारत में बहुत सी महिलाएं शाकाहारी हैं और शाकाहारी आहार में आमतौर पर आयरन की मात्रा कम होती है। शायद इसीलिए भारतीय महिलाओं में आयरन की कमी या एनीमिया दुनियाभर में सबसे अधिक है। इसका मतलब है कि भारत में बहुत सी महिलाओं में गर्भवती होने से पहले ही आयरन की कमी होती है।

प्रीनेटल एनीमिया से बढ़ जाते हैं जोखिम

  • शिशु का अपनी गर्भावधि (जैस्टेशनल) उम्र के हिसाब से छोटा होना।
  • समय से पहले शिशु का जन्म होना (प्रीमैच्योर)।
  • कम वजन का शिशु पैदा होना।

प्रीनेटल एनीमिया से बचने क लिए इतनी हो आयरन की मात्रा

गर्भधारण के बाद डॉक्टर के साथ आपकी पहली मुलाकात में वह आपको कई रक्त जांच कराने को कहेंगी। इनमें से एक ‘कम्पलीट ब्लड काउंट’ (सीबीसी) जांच होगी, जिससे आपके हीमोग्लोबिन के स्तर का पता चलेगा। अगर आपका हीमोग्लोबिन स्तर ठीक है, तो भी गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से बचने के लिए आपको रोजाना आयरन की एक गोली लेने की जरुरत होगी। अगर आपके रक्त की रिपोर्ट दर्शाती है कि आपको एनीमिया है, तो शायद आपको हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार आने तक प्रतिदिन आयरन की दो गोलियां लेनी पड़ सकती हैं।

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भारत में गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन का रिकमेंडेड डायटरी एलाउंस (आरडीए) प्रतिदिन 38 मि.ग्रा. है। एक अनुमान के मुताबिक अधिकांश महिलाओं को आहार से केवल 18 मि.ग्रा. आयरन ही मिल पाता है। इसलिए, एनिमिया से बचने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर) और स्वास्थ्य मंत्रालय सभी गर्भवती महिलाओं को आयरन सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। यह सप्लीमेंट गर्भावस्था की पहली तिमाही के बाद कम से कम 100 दिनों के लिए प्रतिदिन 100 मि.ग्रा. लेना चाहिए।

food-to-avoid-prenatal-anemia आयरन सप्लीमेंट लेने के साथ-साथ आयरन से समृद्ध आहार का सेवन भी जरुरी है। © Shutterstock.

आयरन संप्‍लीमेंट के साथ आहार का भी रखें विशेष ध्‍यान

आयरन सप्लीमेंट लेने के साथ-साथ आयरन से समृद्ध आहार का सेवन भी जरुरी है। आयरन के दो तरह के स्रोत हैं,  मांसाहारी स्रोत (हीम आयरन) - ये अधिक आसानी से शरीर द्वारा अवशोषित होते हैं और शाकाहारी स्रोत (नॉन हीम आयरन),  ये कम आसानी से शरीर द्वारा अवशोषित होते हैं।

मांसाहार में होता है ज्‍यादा आयरन

मटन (मेमना)

चिकन (मुर्गी), ख़ास तौर पर चिकन की जांघों और टांगों में पाया जाने वाला गहरे रंग का मांस अच्छा होता है।

सीपदार मछली जैसे झींगा (प्रॉन), शम्बूक (मसल्स), तिसरियो (क्लैम्स)

पारम्परिक तौर पर आयरन के भरपूर स्रोत के लिए कलेजी खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अनेक विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान कलेजी का सेवन न करने की सलाह देते हैं।

जानें आयरन के शाकाहारी स्रोत

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे चौलाई, पालक, फूलगोभी का हरा हिस्सा, शलगम का साग, पुदीना, मूली के पत्ते, प्याज की कलियां, सरसों का साग और मेथी का साग आयरन के अच्छे स्त्रोत हैं। इसलिए इन्हें किसी न किसी रूप में प्रतिदिन अपने आहार में शामिल करने का प्रयास करें। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 100 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए। इनमें आयरन और फॉलिक एसिड दोनों की भरपूर मात्रा होती है।

  • आयरन से भरपूर सब्जियां जैसे चुकंदर, कद्दू, शकरकंदी और हरी गोभी
  • मेवे और बीज जैसे काजू, नारियल, कद्दू के बीज, सरसों के बीज, तिल, पिस्ता, किशमिश, साबुत धनिया और अखरोट
  • फलियां और दालें जैसे सोयाबीन, लोबिया, राजमा, सूखी मटर, छोले, साबुत काले चने और अन्य दालें।
  • कुछ पेय जैसे खजूर का शरबत या नारियल पानी में भी कुछ आयरन होता है।
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