
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : August 8, 2018 6:52 PM IST
प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। लगभग 6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन की परेशानी होती है। इनमें से कुछ पहले से ही हाई बीपी की मरीज़ होती हैं तो कुछ को प्रेगनेंसी की दौरान यह समस्या होती है। अगर कोई महिला प्रेगनेंसी के दौरान पहले 20 हफ्तों में हाइपरटेंशन से पीड़ित होती है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है लेकिन अगर गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर होने का पता चले तो इस स्थिति को प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है।
इस बारे में हमने बात की गायनकोलॉजिस्ट, डॉ. नूपुर गुप्ता से जिन्होंने बताया कि गर्भधारण की योजना बना रही और गर्भवती महिलाओं को अपने डॉक्टर को ज़रूर बताना चाहिए कि वे हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। इस जानकारी के आधार पर डॉक्टर आपको दवाइयों की सलाह देते हैं। इसी तरह अगर आप जेस्टेशनल हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं, तो उसके हिसाब से दवाइयां तय की जाती हैं। इसके अलावा डॉक्टर ब्लड प्रेशर की नियमित जांच के लिए कह सकता है। अगर कोई महिला हाइपरटेशन से पीड़ित है, तो उसे 28 हफ्तों तक हर चौथे हफ्ते अपना बीपी चेक करना चाहिए और उसके बाद बीपी चेक करने की फ्रीक्वेंसी बढ़ानी चाहिए। यानि 28 से 36 हफ्ते तक हर दूसरे हफ्ते बीपी चेक करना चाहिए और उसके बाद 40 हफ्तों तक हर हफ्ते चेक करना चाहिए।
अगर आप घर पर ही अपना बीपी चेक कर रही हैं और वो 140/90 मिमी /एचजी के आसपास है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। दूसरा गर्भावस्था में पैरों में सूजन आम बात है लेकिन अगर सूजन कम नहीं हो रही और उसमें दर्द है, तो आप सतर्क हो जाएं। जेस्टेशनल हाइपरटेंशन के अन्य लक्षण सिरदर्द,हाथों में सूजन और आंखों की रौशनी कम होना भी है।
डॉ. नुपुर सलाह देती हैं कि, ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने का एक सबसे बेहतर उपाय है कि आप अपने भोजन में नमक की मात्रा कम कर दें। हमेशा लैटरल पोजीशन में लेटना चाहिए और नियमित रूप से बीपी चेक करना ना भूलें। साथ ही समय पर दवाइयां लेें।
चित्रस्रोत: Shutterstock.