
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : August 4, 2025 1:31 PM IST
Medically Verified By: Dr. Rujul Jhaveri
Managing Oversupply Of Milk: वे महिलाएं जो पहली बार मां बनती हैं उनके लिए बच्चे को स्तनपान करवाना बहुत ही ज्यादा मुश्किलों भरा होता है। इस दौरान जहां कुछ महिलाएं मिल्क प्रोडक्शन न होने को लेकर परेशान रहती हैं तो कुछ का ब्रेस्ट मिल्क इतना अधिक में प्रोड्यूस होता है कि उन्हें बिल्कुल समझ नहीं आता कि भला इसे कैसे मैनेज किया जाए। अगर आप भी हाल ही में मां बनी हैं और मिल्क की ओवर सप्लाई से परेशान तो गूगल करना छोड़ दें।
क्यों? क्योंकि आज हम आपको इस लेख में एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल, मुंबई की गाइनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियनडॉ. रुजुल झावेरी के बताए सुझाव बताने वाले हैं, जिनकी मदद से आप मिल्क प्रोडक्शन के ओवर फ्लो को मैनेज कर सकते हैं।
दूध उत्पादन को नियंत्रित करने के लिएएक बार में केवल एक स्तन से ही दूध पिलाएं। अपने शिशु के लिए संतुलित आहार सुनिश्चित करने के लिए अपने स्तनों की हल्के से मालिश करें। दोनों स्तनों को अत्यधिक उत्तेजित होने से बचाने के लिए यह एक बहुत ही कारगर उपाय है।
पीठ के बल आधा लेट कर बच्चे को दूध पिलाना आराम वाली पोजीशन होती है। डॉक्टर ने बताया कि 'आराम के लिए इस पोषण मुद्रा का प्रयास करें। स्तन दूध के अत्यधिक रिसाव को नियंत्रित करने में गुरुत्वाकर्षण की सहायता लें। शिशु के गाल को स्तन के पास रखते हुए, सुनिश्चित करें कि शिशु आपके पेट पर हो। इससे शिशु को सहज रूप से आपके स्तन तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। यह मुद्रा एक बार में दूध की मात्रा में महत्वपूर्ण अंतर ला सकती है।'
अपनी दो उंगलियों का उपयोग 'कैंची' की तरह करें और दूध पिलाते समय स्तन को कसकर पकड़े, ताकि प्रवाह धीमा हो जाए और शिशु के लिए यह अधिक आरामदायक हो। आप लेट डाउन के समय शिशु को उतार भी सकती हैं और बाद में उसे फिर से पकड़ सकती हैं।
डॉक्टर रुजुल झावेरी ने बताया कि 'पहले चार से छह हफ्तों तक पंपिंग न करें। गर्म पानी से स्नान करके और हाथों से सावधानीपूर्वक दूध निकालकर, दूध की ओवरसप्लाई को कम करें। ध्यान रखें कि ज्यादा दूध न निकालें, अत्यधिक दूध उत्पादनको रोकने के लिए संयम बरतना जरूरी है।'
कई महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग में मिल्क प्रोडक्शन को और बढ़ाने के लिए तरह-तरह के नुस्खे आजमाती हैं। इसके लिए डॉक्टर ने सुझाव दिए कि 'ब्रेस्टफीडिंग बढ़ाने के लिए स्तनपान बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों और जड़ी-बूटियों से सावधान रहें। नियंत्रण बनाए रखने के लिए सेवन सीमित करें। मेथी, शतावरी या सोआ जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन न करें, जिनके बारे में माना जाता है कि वे दूध उत्पादन बढ़ाती हैं।'
मांएं इस बात को समझें कि ज्यादा दूध आना शुरुआती दौर का हिस्सा है। ज्यादातर मांएं यह चेक करने के लिए इसका अनुभव करती हैं कि उनके बच्चे के लिए पर्याप्त दूध है या नहीं। लेकिन आप इस प्रक्रिया पर भरोसा रखें। कई मांएं बिना किसी एक्स्ट्रा एफर्ट्स के कुछ ही दिनों में खुद को नियंत्रित करना सीख जाती हैं।
एक शिशु जो आमतौर पर हर 2-3 घंटे में दूध पीता है, वह लगातार कुछ घंटों तक हर 30 मिनट से एक घंटे में दूध पी सकता है। अगर आपके दूध की आपूर्ति पर्याप्त है और आपका शिशु क्लस्टर फीडिंग कर रहा है, तो यह संभवतः सामान्य है
अगर बच्चा बार-बार दूध निकाल रहा है, तो हर बार दूध पिलाने के बाद डकार दिलाएं और उसे सीधा रखें। यदि समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
यह पता लगाने के लिए कि आपके बच्चे का पेट भर गया है, कुछ संकेत हैं जिन पर आप ध्यान दे सकते हैं। शिशु का दूध पीना बंद करना, स्तन से दूर हटना, या मुट्ठी खोलना और शरीर को आराम देना यह बताता है कि उसका पेट भरा हुआ है।
जी हां, पीठ के बल आधा लेट कर बच्चे को दूध पिलाना आराम वाली पोजीशन होती है। इसमें बच्चे को दूध पिलाने से कोई दिक्कत नहीं है।