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How to manage anxiety during pregnancy: गर्भावस्था (Pregnancy) एक महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और भावनात्मक दौर होता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। यह बदलाव कई बार भावनात्मक अस्थिरता का कारण बन जाते हैं और महिलाएं एंजायटी (Anxiety) और डिप्रेशन (Depression) का शिकार हो जाती है। प्रेग्नेंसी में होने वाली मानसिक परेशानियां सिर्फ महिला की नहीं होती है, बल्कि इसका असर गर्भ में पलने वाले शिशु पर भी पड़ता है। आइए दिल्ली के एंलाटिस हेल्थ केयर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता से जानते हैं प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन और एंग्जायटी कैसे मैनेज किया जा सकता है।
डॉ. मनन गुप्ता के अनुसार, एंजायटी (Anxiety) का मतलब है किसी बात को लेकर अत्यधिक चिंता और डर महसूस करना, जबकि डिप्रेशन (Depression) का मतलब है लगातार उदासी या नेगेटिव सोच का हावी होना। इस तरह की परेशानी प्रेग्नेंसी में होना बहुत ही आम बात है। प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव, शारीरिक थकान, परिवार की उम्मीदें और डिलीवरी को लेकर डर के कारण महिलाओं में एंग्जायटी के मामले देखे जाते हैं।
डॉ. मनन बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में मां की मानसिक स्थिति का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है। जब मां तनाव में होती है तो शरीर में Cortisol जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं। प्रेग्नेंसी में एंजायटी से बच्चे को नीचे बताई गई परेशानियां हो सकते हैं।
प्रेग्नेंसी में लगातार तनाव के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क के विकास पर असर पड़ सकता है। मां के मानसिक तनाव के कारण बच्चे के सीखने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन पर असर हो सकता है।
डिप्रेशन और तनाव के कारण मां का खानपान प्रभावित होता है, जिससे जन्म के समय बच्चे का वजन सामान्य से कम हो सकता है।
महिलाओं में होने वाली ज्यादा एंजायटी और डिप्रेशन से प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बच्चे को आगे स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
गर्भ में बच्चे का इम्यून सिस्टम भी मां की मानसिक स्थिति से प्रभावित हो सकता है। इससे बच्चे को बीमारियां जल्दी हो सकती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान आपको एंजायटी और डिप्रेशन की परेशानी हो रही है या नहीं, इसे आप नीचे बताए गए लक्षणों से पहचान सकते हैं।
लगातार उदासी या चिंता में रहना
बार-बार रोना
नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना
खाना न खाना या ओवरईटिंग
बहुत ज्यादा डर या पैनिक अटैक होना
नकारात्मक सोच या खुद को दोषी ठहराना
सिरदर्द, पेट दर्द जैसी शारीरिक समस्याएं
प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक देखभाल जितनी जरूरी है, उतना ही मां की मानसिक देखभाल भी जरूरी है। प्रेग्नेंसी में अगर आप एंजायटी या डिप्रेशन से जूझ रही हैं, तो नीचे बताए गए उपायों को अपना सकती हैं।
प्रेग्नेंसी में होने वाले डिप्रेशन से राहत पाने के लिए किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से काउंसलिंग लेना बहुत मददगार होता है। काउंसलर विभिन्न प्रकार की थेरेपी के जरिए आपकी मदद कर सकते हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान एंजायटी और डिप्रेशन से बचाव के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि अपनी भावनाओं को मन में न रखें। पार्टनर, परिवार या दोस्तों से खुलकर बात करना मानसिक बोझ हल्का कर सकता है।
प्रेग्नेंसी में मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने के लिए रोजाना 15 मिनट योग जरूर करें। योग करने से शरीर की सभी इंद्रियां एक समान आती हैं और मानसिक परेशानियां दूर रहती हैं।