IVF में क्यों ज्यादा होते हैं ट्विंस! जानें Twins होने के चांस बढ़ाने के लिए क्या करें

How to get twins baby : ट्विंस बेबी कंसीव करने के लिए बहुत सी महिलाएं आईवीएफ का भी सहारा लेती हैं और ये बात हकीकत है कि आईवीएफ में ट्विंस होने की संभावना काफी हद तक ज्यादा होती है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : March 7, 2023 5:04 PM IST

How to get twins baby : आपने अपने आस-पास ऐसे कई घरों के बारे में सुना होगा, जहां ट्विंस होने की खुशियां मनाई गई हों या फिर मनाने जाने वाली हो। आमतौर पर नैचुरल प्रेगनेंसी में ट्विंस होना किसी चमत्कार से कम नहीं हालांकि कुछ महिलाओं के ट्रिप्लेट्स भी हुए हैं लेकिन ट्विंस का क्रेज अलग ही होता है। ट्विंस बेबी कंसीव करने के लिए बहुत सी महिलाएं आईवीएफ का भी सहारा लेती हैं और ये बात हकीकत है कि आईवीएफ में ट्विंस होने की संभावना काफी हद तक ज्यादा होती है। लेकिन क्यों इसकी जानकारी शायद ही ज्यादातर लोगों को हो। आइए आपको बताते हैं आईवीएफ में ट्विंस क्यों ज्यादा होते हैं और कैसे आप ट्विंस होने के सकसेस रेट को बढ़ा सकते हैं।

क्या है ट्विंस प्रेगनेंसी

बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ में कसलटेंट डॉ. रचिता मुंजाल का कहना है कि जब किसी महिला के यूट्रस में दो बच्चे बढ़ते हैं तो उसे ट्विंस प्रेगनेंसी कहते हैं। ट्विंस बेबी आईडेन्टिकल भी हो सकते हैं और नॉन आईडेन्टिक्ल भी। आईडेन्टिकल का मतलब है कि जब एक एग और स्पर्म मिलकर एम्ब्रायो बनाता है और वो एम्ब्रायो दो भांगों में बंट जाए तो आईडेन्टिकल ट्विंस होते हैं। आईडेन्टिकल ट्विंस की शक्ल लगभग-लगभग एक समान होती है।

नॉन आईडेन्टिक्ल ट्विंस की बात करें तो जब दो एग और दो स्पर्म मिलकर अलग-अलग एम्ब्रायो बनाते हैं और धीरे-धीरे यूट्रस में बढ़ने लगते हैं।

क्यों ज्यादा होते हैं ट्विंस

बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ में कसलटेंट डॉ. रचिता मुंजाल का कहना है कि दरअसल आईवीएफ के दौरान हम दो या फिर कुछ मामलों में तीन एम्ब्रायो भी ट्रांसफर करते हैं। इन एम्ब्रायो को लैब में एग और स्पर्म को फर्टलाइज किया जाता है, फिर ग्रो किया जाता है और गुड क्वालिटी वाले एम्ब्रायो को महिला के यूट्रस में फिर ट्रांसफर किया जाता है।

आईवीएफ में ट्विंस प्रेगनेंसी की संभावना और भी ज्यादा तब बढ़ जाती है जब हम डे 5 एम्ब्रायो को ट्रांसफर करते हैं। इसका मतलब है जब हम एग और स्पर्म को फर्टलाइज करते हैं तो लैब में इन्हें 5 से 6 दिन तक ग्रो किया जाता है। इसका इंप्लांटेशन काफी हाई होता है। कुछ साल पहले तक सिर्फ 3 दिन तक ही लैब में एम्ब्रायो को ग्रो किया जाता था और उसके बाद महिला के यूट्रस में ट्रांसफर में किया जाता है। लेकिन अब उन्नत तकनीक की मदद से इसे डे 5 तक ले जा पाते हैं। ये वो एम्ब्रायो है, जो 3 दिन से ग्रो करने के बाद डे 5 तक पहुंचता है यानि ये बेस्ट एम्ब्रायो है। इसकी वजह से भी ट्विंस के चांसेज और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं।

कितनी उम्र में संभवान ज्यादा

डॉ. रचिता मुंजाल कहती हैं कि ट्विंस की संभावना महिला की उम्र पर निर्भर करती है और अगर महिला की उम्र 35 से कम है तो ये संभावना बहुत ज्यादा रहती है। 35 से कम की महिलाओं को दूसरी उम्रदराज महिलाओं के मुकाबले एम्ब्रायो ट्रांसफर करने के बाद ट्विंस की संभावना बहुत ज्यादा होती है।

कैसे बढ़ाएं आईवीएफ का सकसेस रेट

डॉ. रचिता के मुताबिक, आप इन तरीकों से आईवीएफ के सकसेस रेट को बढ़ा सकती हैंः

1-हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें

2-डेली एक्सरसाइज या वॉक रूटीन फॉलो करें

3-हेल्दी डाइट ले सकते हैं यानि वेल बैलेंस्ड डाइट, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट शामिल हों।

कौन सी सावधानियां बरतें

डॉ. रचिता के मुताबिक, आप कुछ चीजों को अपने रूटीन से बाहर कर प्रेगनेंसी को हेल्दी बना सकती हैंः

1-अनहेल्दी आदतों को छोड़ दें

2-वर्कलाइफ बैलेंस करें

3-स्ट्रेस फ्री माइंड रखें

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