प्रेग्नेंसी में नाइट शिफ्ट जॉब करना कितना है सुरक्षित? बता रहे हैं डॉक्टर

प्रेग्नेंसी के दौरान अगर नाइट शिफ्ट में जॉब कर रहे हैं, तो डॉक्टर से इसके जोखिमों के बारे में जरूर जान लें। ताकि आगे होने वाली परेशानियों से आप पहले से सुरक्षित हो सकें। आइए जानते हैं डॉक्टर से क्या नाइट शिफ्ट में जॉब करना सुरक्षित है या नहीं?

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 21, 2026 7:00 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Madhavi Reddy Vennapusa

Night Shift in Pregnancy : आज के समय में कई महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान भी काम करती हैं, जिनमें कुछ को नाइट शिफ्ट में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी में रात की शिफ्ट करना मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित है? इस विषय पर जानकारी के लिए हमने हैदराबाद स्थित नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी रेड्डी वेन्नापुसा से बातचीत की है। आइए डॉक्टर इस विषय पर क्या कहती हैं?

क्या प्रेग्नेंसी में नाइट शिफ्ट करना है सेफ?

डॉ. माधवी का कहना है कि प्रेग्नेंसी में लगातार नाइट शिफ्ट करने से शरीर की नैचुरल सर्केडियन रिद्म यानी सोने-जागने के चक्र पर असर पड़ सकता है। शरीर का यह चक्र हार्मोन, नींद, एनर्जी और मानसिक स्वास्थ्य को कंट्रोल करता है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो प्रेग्नेंसी में कुछ परेशानियां होने का खतरा रहता है। ऐसे में अगर आप एक शब्दों में समझें, तो प्रेग्नेंसी में नाइट शिफ्ट करना सुरक्षित बिल्कुल भी नहीं होता है।

प्रेग्नेंसी में नाइट शिफ्ट करने से क्या परेशानियां हो सकती हैं?

एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान लंबे समय तक रात में काम करते हैं, तो इससे कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, समय से पहले डिलीवरी और बच्चे का कम वजन होने जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, रात में काम करने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे शरीर में थकान और कमजोरी बढ़ती है।

लगातार थकावट होने पर काम के दौरान दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। कई बार पर्याप्त आराम न मिलने से शरीर को रिकवर होने में भी परेशानी होती है, जिसका असर मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों पर पड़ सकता है।

हर महिला के लिए नहीं होता है समान खतरा

डॉक्टर बताती हैं कि हर गर्भवती महिला पर नाइट शिफ्ट का असर एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि महिला कितनी लगातार नाइट शिफ्ट कर रही है, उसकी ड्यूटी कितने घंटों की है और काम कितना शारीरिक रूप से कठिन है।

अगर कभी-कभार नाइट शिफ्ट करनी पड़े, तो उसका खतरा थोड़ा कम हो सकता है। वहीं, लगातार बदलती शिफ्ट, लंबी ड्यूटी या रातभर खड़े होकर काम करने जैसी स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं।

किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

डॉक्टर कहती हैं कि अगर प्रेग्नेंसी में नाइट शिफ्ट करनी जरूरी हो, तो कुछ सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है, जैसे-

  • लगातार कई नाइट शिफ्ट से बचें
  • बीच-बीच में ब्रेक जरूर लें
  • ज्यादा भारी सामान उठाने से बचें
  • शरीर को हाइड्रेट रखें
  • पौष्टिक भोजन लें
  • दिन में पर्याप्त नींद पूरी करें
  • तनाव कम करने की कोशिश करें, इत्यादि।

इसके अलावा, कार्यस्थल पर सपोर्टिव माहौल होना भी बहुत जरूरी है। कंपनियों को गर्भवती कर्मचारियों के लिए शिफ्ट में बदलाव, आराम का समय और कम शारीरिक मेहनत वाले काम की सुविधा देनी चाहिए।

डॉक्टर से सलाह लेना क्यों जरूरी है?

एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही महिलाओं को अपने डॉक्टर से नौकरी और शिफ्ट के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। खासतौर पर उन महिलाओं को अधिक सावधानी की जरूरत होती है जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, जुड़वा प्रेग्नेंसी या समय से पहले डिलीवरी का इतिहास रहा हो।

Disclaimer : ध्यान रखें कि डॉक्टर महिला की मेडिकल हिस्ट्री और काम की परिस्थितियों को देखकर यह तय कर सकते हैं कि नाइट शिफ्ट जारी रखना सुरक्षित है या नहीं। सही सलाह, पर्याप्त आराम और समय पर प्रेग्नेंसी चेकअप के जरिए मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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