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जब किसी महिला को पता चलता है कि वो मां बनने वाली है तो वो खुशी से झूमने लगती है। इस खुशी में गर्भवती का पति, उसके घरवाले और सगे-संबंधी भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी की शुरुआत में होने वाली स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग (Spotting in early pregnancy) कभी-कभी खुशियों पर फुलस्टॉप लगा देती है। कंसीव होने के बाद अगर कोई महिला ब्राउन डिस्चार्ज या स्पॉटिंग का सामना करती है तो दिमाग में सबसे पहले मिसकैरेज होने का डर आता है। यदि किसी महिला का पहले मिसकैरेज हो चुका है या प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के कुछ दिनों के बाद ही ब्लीडिंग हुई थी तो वो ज्यादा डर जाती हैं। लेकिन आपको बता दें कि प्रेगनेंसी की शुरुआत में ब्लीडिंग होना या फिर भूरे रंग का डिसचार्ज होना बहुत नॉर्मल है।
20-30% महिलाओं ऐसी होती हैं जो गर्भावस्था की पहली तिमाही में हल्की ब्लीडिंग या ब्राउन डिस्चार्ज महसूस करती हैं। प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग या ब्लीडिंग क्यों होती है और इसके क्या कारण हैं? क्या ब्लीडिंग का मतलब हमेशा मिसकैरेज होता है? 6ठें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड कराते वक्त महिला को क्या पता चल सकता है? ऐसे आदि महत्वपूर्ण सवालों का जवाब जानने के लिए हमने सीनियर गायनोकॉलोजिस्ट डॉक्टर अरुणा कालरा (Dr. Aruna Kalra, Senior Gynecologist & Obstetrician at CK Birla Hospital) से खास बातचीत की है और उन्होंने प्रेगनेंसी में होने वाली स्पॉटिंग या ब्राउन डिसचार्ज के कारण (Reason of Brown Discharge in Early Pregnancy) बताए हैं। आइए एक-एक कर जानते हैं सभी सवालों के जवाब-
उत्तर-1 डॉक्टर कहती हैं कि प्रेगनेंसी की शुरुआत में या प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद ब्लीडिंग होना बहुत कॉमन है। इसके डरने वाली कोई बात नहीं होती है। करीब 30 प्रतिशत महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में हल्की ब्लीडिंग होती है। ये ब्लीडिंग सामान्य हार्मोनल बदलाव के कारण भी हो सकती है और गर्भावस्था की जटिलता का लक्षण भी हो सकती है। प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने के निम्न कारण हो सकते हैं:-
1. सबकोरियोनिक हेमेटोमा (Subchorionic Hematoma)- यह तब होता है जब कोरियोन के पास खून इकट्ठा हो जाता है, इस स्थिति में स्पॉटिंग हो सकती है।
2. एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic pregnancy)- इसका मतलब होता है जब फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस के बाहर या फैलोपियन ट्यूब में इंप्लांट हो जाता है। इस स्थिति में भी हल्की स्पॉटिंग हो सकती है।
3. सर्विकल इरिटेशन (Cervical irritation)- सेक्स के बाद वजाइना से हल्की ब्लीडिंग होना सर्विकल इरिटेशन का कारण हो सकती है।
4. इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation bleeding)- यह प्रेगनेंसी की शुरुआत का एक संकेत हो सकती है। जब एक फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय की परत से चिपकता है तब भी हल्की ब्लीडिंग हो सकती है।
5. प्रेगनेंसी लॉस (Pregnancy loss)- वजाइना से ब्लीडिंग होना गर्भावस्था के नुकसान का संकेत भी हो सकता है।
उत्तर-2 नहीं, गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान हल्की ब्लीडिंग का मतलब हमेशा मिसकैरेज नहीं होता है। यह कई अन्य कारणों से भी हो सकती है। यह महिलाओं में बहुत आम है और आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होती है। हालांकि पूर्ण संतुष्टि के लिए आपको गायनोकॉलोजिस्ट से मिलना चाहिए।
उत्तर-3 छठे सप्ताह के दौरान, योक सैक (yolk sac), एक छोटे गुब्बारे के आकार की तरह गेस्टेशनल सैक (gestational sac) के अंदर दिखाई देना चाहिए।
उत्तर-4 हाँ बिल्कुल! छह सप्ताह की गर्भवती अगर प्रेननेंसी के किसी भी लक्षण को महसूस नहीं कर रही है तो ये नॉर्मल है। याद रखें, हर प्रेगनेंसी अलग होती है और सबका अनुभव अलग हो सकता है। कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो पूरी प्रेगनेंसी के दौरान कभी भी मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness in pregnancy) का अनुभव नहीं करती हैं।