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Newborn Ki Health Care Kaise Kare: हर साल 7 नवंबर को ‘इन्फेंट प्रोटेक्शन डे’ (Infant Protection Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। बच्चे के जन्म के बाद का पहला साल उसके जीवन की नींव होता है। इस अवधि में जरा-सी लापरवाही भी गंभीर खतरे का कारण बन सकती है।
इसलिए माता-पिता को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। आइए हम एशियन हॉस्पिटल, फरीदाबाद) के हेड NICU और पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर सुमित चक्रवर्ती से जानते हैं कि शिशु को पहले साल में किन खतरों से बचाना जरूरी होता है और किन 5 बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
डॉक्टर सुमित चक्रवर्ती के अनुसार, 'पहले साल में बार-बार सर्दी-जुकाम या पेट के संक्रमण होना आम है, लेकिन स्वच्छता और टीकाकरण से इन खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है।'
हमारे यहां छठी के अवसर पर हवन कराने की परंपरा है। अगर हवन करना हो तो उसे खुले स्थान पर करें, घर के अंदर नहीं। क्योंकि हवन के धुएं से छोटे बच्चों को सांस लेने में तकलीफया दम घुटने का खतरा हो सकता है।
बच्चे को हमेशा मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं — न बहुत मोटे, न बहुत हल्के। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चे को हमेशा एक अतिरिक्त लेयर कपड़े पहनाना चाहिए। यानी अगर मां ने एक गर्म कपड़ा पहना है, तो बच्चे को दो लेयर पहनाएं। और अगर मां ने गर्म कपड़ा नहीं पहना है, तो बच्चे को कम से कम एक लेयर अवश्य पहनाएं।
कमरे में उचित तापमान बनाए रखें और तेज हवा या सीधी धूप से बचाएं। साथ ही कमरे को गर्म रखने के लिए धुआं बिल्कुल ना करें। इससे पूरे परिवार का दम घूंटने का खतरा रहता है। बच्चे के लिए ऑयल हीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं जो मार्केट में आसानी से उपलब्ध है।
शिशु का पहला साल उसकी सेहत, विकास और सुरक्षा के लिए सबसे संवेदनशील होता है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता न सिर्फ उसकी बीमारियों को रोक सकती है बल्कि उसे एक सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की शुरुआत दे सकती है। ‘एक सुरक्षित बचपन ही स्वस्थ भविष्य की नींव है।’
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
स्तनपान करने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। अगर बच्चा स्तनपान करेगा, तो वह ज्यादा स्वस्थ महसूस कर सकता है।
जी हां, अगर बच्चा सही तरीके से स्तनपान करता है, तो उसका स्तनपान से ही पेट भर जाता है। साथ ही, उसे सभी जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाते हैं।
एक शिशु जो आमतौर पर हर 2-3 घंटे में दूध पीता है, वह लगातार कुछ घंटों तक हर 30 मिनट से एक घंटे में दूध पी सकता है। अगर आपके दूध की आपूर्ति पर्याप्त है और आपका शिशु क्लस्टर फीडिंग कर रहा है, तो यह संभवतः सामान्य है
अगर आपका बच्चा चीजों को लेकर काफी स्लो है तो डॉक्टर से परामर्श लें।