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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 8, 2022 1:21 PM IST
उम्र बढ़ने पर नौकरीपेशा महिलाओं के लिए कंसीव करने का बेस्ट तरीका है ये, 35 साल में भी बन सकेंगी मां
how to get pregnant in 35 : जो कामकाजी महिलाएं देरी से मां बनने की सोच रही हैं उनके लिए एग फ्रीजिंग, एक ऐसी तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु निकाल कर उन्हें फ्रीज कर के स्टोर कर दिया जाता है। बाद में अपनी सहूलियत और इच्छानुसार जब महिला मां बनना चाहे तो उसके अंडाणुओं को भ्रूण के रूप में गर्भाशय में पहुंचा दिया जाता है। मां बनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत पल होता है, लेकिन आज की इस भाग दौड़ वाले जिंदगी में कामकाजी महिलाओं को कई कारणों से अपने परिवार से ज्यादा करियर को तवज्जो देनी पड़ रही है।
गुंजन आईवीएफ वर्ल्ड ग्रुप की फाउंडर और चेयरमैन डॉक्टर गुंजन गुप्ता गोविल का कहना है कि उनके लिए ये किसी चुनौती से कम नहीं है। करियर के सामने परिवार बढ़ाने के विषय में सोचना भी उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। यहां कह सकते हैं कि न चाहते हुए भी कामकाजी महिलाओं को परिवार के मुकाबले अपने करियर को प्राथमिकता देनी पड़ रही है।
करियर के अलावा तनाव, समय का अभाव और बढ़ती भाग-दौड़ की वजह से भी अकसर कई महिलायें सही समय पर मां नहीं बन पाती हैं। इन सभी कारणों में तनाव एक मुख्य कारण है, क्योंकि इसकी वजह से हार्मोंस में बहुत उतार-चढ़ावहोने लगते हैं, जिसकी वजह से महिला की प्रजनन क्षमता पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इन सबके अलावा जब महिला के शरीर में अंडाणु बनने के समय में उतार-चढ़ाव आने लगे या फेलोपियन टयूब में कोई अवरोध हो तो भी मां बनने में रुकावट आती है। इस समस्या का एक बहुत अच्छा समाधान एग फ्रीजिंग है।
एग फ्रीजिंग, एक ऐसी तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु निकाल कर उन्हें फ्रीज कर के स्टोर कर दिया जाता है। बाद में अपनी सहूलियत और इच्छानुसार जब महिला मां बनना चाहे तो उसके अंडाणुओं को भ्रूण के रूप में गर्भाशय में पहुंचा दिया जाता है। हालांकि एग फ्रीजिंग के लिये कोई खास उम्र निर्धारित नहीं है, लेकिन फिर भी डॉक्टर 34 से 35 साल की उम्र में एग फ्रीज करवा लेने की सलाह देते हैं।
कामकाजी महिला जब गर्भाधारण के लिए खुद को तैयार करती है तो उसे अपने अपरिपक्व गर्भ का बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है, इसलिए उन्हें अन चीजों से बचना चाहिएः
1-दफ्तर का माहौल बहुत भाग-दौड़ और तनाव वाला होता है, इसलिए जरूरी है कि वह स्वयं को तनावमुक्त रखे।
2-नकारत्मक विचार मन में न आने दे और हमेशा खुश रहे।
3-मां यदि गर्भावस्था के दौरान खुश रहती है तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बहुत अच्छा एवं स्वस्थ होने लगता है।
4-साथ ही ऐसे में महिला का पौष्टिक आहार बहुत जरूरी है, क्योंकि गर्भावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है।
5-जंक फूड खाने की बजाय घर का बना ताजा भोजन ही करना चाहिए और मौसमी फलों और सब्जियों के सेवन की मात्रा भी बढ़ा देनी चाहिए।
6-दफ्तर में हमेशा अपने पास कुछ हल्के स्नैक्स तथा पानी साथ रखें ताकि बहुत देर तक आपको भूखा ना रहना पड़े।
वैसे तो गर्भावस्था में थकान काफी हो जाती है, लेकिन कामकाजी महिलाओं के लिए दफ्तर में आराम संभव नहीं हो सकता, इसलिए कोशिश करें कि खुले आरामदेह कपड़े तथा फ्लैट चप्पल पहन कर ही दफ्तर जाए, क्योंकि इस अवस्था में शरीर पर सूजनआ जाना आम बात होती है। अपनी मेज के नीचे कोई छोटा स्टूल रख लें ताकि पैर थोड़ा ऊपर उठा के बैठ सकें, इससे पैरों में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। एक और समस्या जो कामकाजी महिलाओं के सामने आती है, वह है रोज दफ्तर कैसे जाया जाए।
यह बहुत नाजुक समय होता है, इसलिए जहां तक संभव हो ज्यादा भीड़-भाड़ वाले वाहनों में यात्रा करने से बचना चाहिए। साथ ही जिन रास्तों पर गढ्ढे हों उन सड़कों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। तेज तेज चलना या भागना बिलकुल बंद कर दें और कोई ऐसा काम करने की कोशिश ना करें, जिसमें आपके गिरने या आपको चोट लग जाने का खतरा हो। कोशिश करें की सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की बजाय लिफ्ट का इस्तेमाल करें। काफी और सिगरेट यदि पीती है तो बिलकुल बंद कर दें। कैफीन और निकोटीन होने वाले शिशु के लिए बहुत घातक होता है। साथ ही शराब यदि पीती हैं तो उसका सेवन भी बिलकुल बंद कर दें। यह बच्चे के साथ-साथ आपके लिए भी बहुत हानिकारक है। ऐसे व्यायाम करें जो खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए होते हैं। इससे आप गर्भावस्था में भी बिलकुल फिट महसूस करेंगी और साथ ही डिलीवरी में भी ज्यादा कठिनाई नहीं होगी।