
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 26, 2026 12:00 PM IST
Medically Verified By: Dr. Anusha Rao P
numbness in hands during pregnancy
Tingling in the hands during pregnancy : प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। कुछ बदलाव सामान्य होते हैं, जबकि कुछ महिलाओं को असहज महसूस करा सकते हैं। इन्हीं में से एक है हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन या पिन्स एंड नीडल्स जैसा फील होना। कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान दूसरी और तीसरी तिमाही में इस तरह की परेशानी का अनुभव होता है।
इस विषय पर यशोदा हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन, गायनेकोलॉजिस्ट, लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जन डॉ. अनुषा राव पी का कहना है कि प्रेग्नेंसी में हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट होना काफी कॉमन है। हाल ही में हुए स्टडीज के अनुसार, लगभग एक-तिहाई प्रेग्नेंट महिलाओं को किसी न किसी लेवल पर जाकर इस तरह की परेशानी महसूस होती है। यह परेशानी रात के समय या सुबह उठने पर ज्यादा महसूस होती है।
डॉक्टर कहती हैं कि प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव और शरीर में बढ़ने वाला फ्लूइड रिटेंशन के कारण इस तरह की परेशानी महसूस होती है। दरअसल, हमारे शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने से कलाई के पास मौजूद मीडियन नर्व पर दबाव पड़ता है। इसी वजह से हाथों और उंगलियों में झनझनाहट, हल्का दर्द या सुन्नपन महसूस हो सकता है।
डॉक्टर इसे प्रेग्नेंसी से जुड़ा अस्थाई कार्पल टनल सिंड्रोम भी कहते हैं। यह स्थिति आमतौर पर गंभीर नहीं होती और डिलीवरी के बाद अपने आप ठीक होने लगती है।
कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान इस तरह की परेशानी ज्यादा महसूस होती है, जैसे-
हालांकि, हर महिला में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं। कुछ को सिर्फ हल्की झनझनाहट महसूस होती है, जबकि कुछ महिलाओं को हाथ कमजोर लगने लगते हैं।
हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट को कम करने के लिए कुछ आसान उपाय मददगार हो सकते हैं। जानते हैं इन उपायों को-
अगर आपके हाथों में झनझनाट या सुन्नपन महसूस हो रही है, तो इस उपायों का सहारा ले सकते हैं।
Disclaimer : ध्यान रखें कि अगर हाथों का सुन्नपन लगातार बढ़ रहा हो, दर्द बहुत ज्यादा हो, हाथों में कमजोरी महसूस हो रही हो या चीजें पकड़ने में दिक्कत आने लगे, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। कई बार यह किसी दूसरी न्यूरोलॉजिकल या मेडिकल समस्या का संकेत भी हो सकता है।