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Written By: Anshumala | Published : July 19, 2018 8:31 PM IST
प्रेगनेंसी के दिनों में अक्सर महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। ये बदलाव मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह के हो सकते हैं। इन बदलावों से उनके दिल और दिमाग पर गहरा असर होता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि प्रेगनेंसी और प्रसव के दौरान महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। यह अध्ययन मेयो क्लिनिकल प्रोसीडिंग्स मैग्जीन में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 4.9 करोड़ प्रसव के आंकड़े जुटाए। यह आंकड़े वर्ष 2002 से 2014 के बीच के हैं। अध्ययन में यह पता चला कि महिलाओं में प्रेगनेंसी के दिनों में या डिलीवरी के बाद के शुरुआती हफ्तों में हार्ट अटैक की दर में 25 फीसदी का इजाफा देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जन्म देने वाली महिलाओं में से 1061 को लेबर या प्रसव के दौरान हार्ट अटैक हुआ। 922 महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान प्रसव हुआ, जबकि 2390 महिलाओं को शिशु को जन्म देने के बाद हार्ट अटैक हुआ।
कई अध्ययनों में यह बात साबित हो चुकी है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हार्ट अटैक होने की आशंका कम रहती है। लेकिन इस अध्ययन में शामिल 2002 से 2014 के बीच प्रेगनेंट महिलाओं के आंकड़े बताते हैं कि प्रेगनेंसी में हार्ट अटैक का खतरा अधिक बढ़ गया था। शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी या डिलवीर के तुरंत बाद हॉस्पिटल में रहते हुए हार्ट अटैक हुआ, उनमें मृत्यु दर 4.5 फीसदी थी।
एनवाईयू लैंगोन हेल्थ में मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर नैथेनियल स्माइलोविज का कहना है कि यह काफी हैरान कर देने वाली बात है। बच्चों को जन्म देने की उम्र में महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा न के बराबर होता है। सामान्य रूप से कम उम्र वाली महिलाओं में हार्ट अटैक होने का खतरा बहुत कम रहता है। यह बहुत ही असाधारण बात है। कई बार प्रेगनेंसी और उसके तुरंत बाद का समय उनके लिए संवेदनशील हो सकता है। ऐसे में कई महिलाओं में इस दौरान दिल से संबंधित बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि, अब तक यह बात साफ नहीं हो पाई है कि प्रेगनेंसी के दौरान या फिर डिलीवरी के तुरंत बाद दिल की बीमारी होने के क्या कारण हो सकते हैं? शोधकर्ता डॉक्टर स्माइलोविज के अनुसार, आजकल की अधिकतर महिलाएं अधिक उम्र में गर्भधारण को तवज्जो देने लगी हैं। ऐसे में अधिक उम्र की महिलाओं में युवा महिलाओं के मुकाबले दिल की बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। 20 से 30 साल की उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं के मुकाबले 35 से 39 साल की उम्र में गर्भवती होने वाली महिलाओं को हार्ट अटैक होने की आशंका पांच गुना तक बढ़ जाती है। यह खतरा 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में और भी अधिक रहता है। यदि आपको मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारी है, तो फिर खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.