सामने आया गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के नया वैज्ञानिक तरीका!

शुक्राणुओं की रफ्तार में इज़ाफा करता हुआ नया आविष्कार!

WrittenBy

Written By: Agencies | Updated : January 4, 2017 6:09 PM IST

स्रोत - IANS Hindi

महिलाओं के गर्भधारण न कर पाने के कई कारण हो सकते हैं, उनमें से एक शुक्राणुओं का सुस्त होना भी है। लेकिन वैज्ञानिक इस कमी को दूर करने का तरीका भी ढूंढ रहे हैं। पहली बार जर्मन वैज्ञानिकों ने एक मोटरचालित 'स्पर्मवोट' (स्पर्म रोबोट) बनाने में कामयाबी हासिल की है जो उन स्वस्थ शुक्राणुओं को तैरने में मदद करेगी जिसकी गति थोड़ी धीमी होती है, लेकिन गर्भधारण के लिए वे बिल्कुल सक्षम होते हैं। गर्भधारण नहीं कर पाने का एक प्रमुख कारण शुक्राणुओं की तैरने की चाल सुस्त होना भी है। हालांकि इसका इलाज कृत्रिम गर्भाधारण या अन्य प्रजनन तकनीक से किया जाता है, लेकिन यह शत-प्रतिशत कामयाब नहीं है।

जर्मनी के आईएफडब्ल्यू ड्रेसडेन के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव नैनोसाइंस के शोधार्थियों ने एक माइक्रोमोटर बनाने में कामयाबी हासिल की है जो शुक्राणुओं की पूंछ में चिपक कर उसकी गति बढ़ाने का काम करती है।प्रयोगशाला में इस मोटर ने अपने काम को बेहद सटीक तरीके से किया और शुक्राणुओं को संभावित निषेचन के लिए अंडाणु तक तेजी से पहुंचाकर उससे अलग हो गया। 

शोधकर्ता मरियाना मेडिना-सेनचेझ, लुकास स्वार्ज, ओलीवर जी स्मिड और उनके साथियों का कहना है कि इस तकनीक के क्लिनिकल टेस्टिंग से पहले इसमें सुधार करने की जरूरत है।  ब्रिटेन ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंब्राइलॉजी विभाग के अनुसार फिलहाल उपलब्ध कृत्रिम गर्भाधान तकनीक की सफलता दर 30 फीसदी से भी कम है। वहीं, आईवीएफ (इन वित्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक कहीं ज्यादा सफल है, लेकिन इस पर काफी अधिक खर्च होता है। 

इस शोध को एसीएस जर्नल नैनो लेटर्स में प्रकाशित किया गया है।

चित्र स्रोत - Shutterstock


Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source