... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Agencies | Updated : January 4, 2017 6:09 PM IST
गरोदरपण - या काळात स्त्री शरीरात अनेक हार्मोनल बदल होत असतात. त्यामुळे केसगळतीची समस्या वाढते. पण प्रसुतीनंतर केस पुन्हा सक्षमपणे वाढतात.
मूल स्रोत: IANS Hindi
अक्सर लोग ये सोचते हैं कि प्रेगनेंसी में वज़न बढ़ रहा है इसका मतलब बेबी बहुत हेल्दी है। लेकिन हाल के एक रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है कि ऐसा होने से डिलीवरी के समय सामान्य से बड़े आकार के बच्चे को जन्म देना मां के लिए मुश्किल हो जाता है। इसलिए वज़न के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ले लेना अच्छा होता है। असल में महिला के लिए अधिक वज़न के बच्चे को जन्म देना बहुत ही मुश्किल का काम होता है अगर डिलीवरी नॉर्मल हुई तो! पढ़े-क्या प्रेगनेंसी के दौरान कच्चे फल और सब्ज़ी खाना सेफ है?
गर्भावस्था के दौरान अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं द्वारा सामान्य से अधिक आकार के बच्चे को जन्म देने की संभावना होती है। एक नए अध्ययन से मंगलवार को जानकारी मिली। अध्ययन में यह भी पता चला है कि उच्च रक्त शर्करा से पीड़ित महिलाओं की संतान के भी बड़े आकार के साथ जन्म लेने का खतरा होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर मेडिकल स्कूल से इस अध्ययन के सह-लेखक राचेल फ्रीथी ने बताया, 'नवजात के लिए अधिक और कम वजन के साथ जन्म लेना दोनों ही हानिकारक है।' इस अध्ययन के लिए शोधार्थियों ने 30 हजार स्वस्थ्य महिलाएं और उनकी संतानों के 18 विभिन्न शोध आंकड़ों का अध्ययन किया।
शोधार्थियों ने इस दौरान महिलाओं का रक्त शर्करा स्तर, लिपिड, वसा, रक्तचाप आदि का आकलन किया। शोर्थियों ने इस दौरान देखा कि मोटापे से संबंधित वसा का स्तर और लिपिड महत्वपूर्ण रूप से बच्चे का आकार प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार नहीं होते हैं।
यह शोध पत्रिका 'अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन' में प्रकाशित हुआ है।
चित्र स्रोत: Shutterstock