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क्या आपको पता है कि मछली का तेल गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ्य रहने के लिए जरुरी होता है?

पौष्टिकता गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। जो भी माँ खाती है उसका असर शिशु पर पड़ता है. अध्ययन के अनुसार मछली के तेल में ओमेगा३ फैटी एसिड होता हैं जो भ्रूण के हेल्दी रहने , तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क, आँख, दिल के अच्छे तरह से विकास के लिए जरुरी होता है। जरुरी फैटी एसिड माँ और शिशु दोनों के स्वस्थ रहने के बहुत ही जरुरी होता है। फैटी एसिड में जो डी.एच.ए होता है वह भ्रूण के मस्तिष्क के सही तरह से विकास और ज्ञानात्मक विकास के लिए बहुत जरुरी होता हैं। डी.एच.ए का लेवल कम होने पर समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वजन और बच्चों में अतिसक्रियता का कारण बन जाता है।डी. एच. ए एक स्वस्थ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटक होता है।एक अध्ययन के अनुसार जो माँ गर्भावस्था के दौरान, बच्चा होने के बाद तीन महीनों तक स्तनपान करवाने के दौरान मछली के तेल के तेल का सेवन करते हैं वे ज्यादा बुद्धिमान होते हैं। पढ़े- घरेलु हिंसा का बुरा प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है

आस्ट्रेलिया में हुए एक ताजा अध्ययन में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं द्वारा मछली के तेल का सेवन करने से गर्भस्थ शिशु में प्रतिरक्षी क्षमता में वृद्धि होती है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, वेस्टर्न आस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान मछली के तेल में पाई जाने वाली पॉलीअनसेचुरेटेड वसा अम्ल को अनुपूरक आहार के रूप में दिए जाने से गर्भस्थ शिशु में एलर्जी, हृदय संबंधी एवं पाचन संबंधी बीमारियों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पढ़े- अब आनुवांशिकता मोटापा का कारण नहीं बन सकता है

यह अध्ययन 36 गर्भवती महिलाओं पर किया गया। मुख्य शोधकर्ता सुसेन प्रेसकॉट ने आस्ट्रेलियन ब्रॉडकॉस्टिंग कॉर्पोरेशन को बताया कि इस अध्ययन से साबित हो चुका है कि गर्भवास्था के दौरान मछली के तेल का सेवन जन्म के बाद बच्चे में प्रतिरक्षी क्षमता बढ़ा सकता है। इसी विश्वविद्यालय द्वारा इससे पहले किए गए शोध में निष्कर्ष दिया गया था कि मछली का तेल गर्भ के अंदर शिशु के विकास में सहायक होता है तथा गर्भपात के जोखिम को कम करता है।

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स्रोत: IANS Hindi

चित्र स्रोत:  Getty images


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