प्रेगनेंसी में 100 में से 10 महिलाओं को हो सकती है प्रीक्लेम्पसिया, डॉक्टर से जानें Preeclampsia के लक्षण और बचाव

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया की स्थिति देखी जाती है। यह एक गम्भीर स्थिति है लेकिन, अगर समय पर सही इलाज और डॉक्टरी मदद मिल जाए तो यह ठीक भी हो सकती है। डॉक्टर से जानिए कि, प्रेगनेंसी के दौरान प्रीक्लेम्पसिया की स्थिति क्यों बनती है और हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति से प्रीक्लेम्पसिया कैसे जुड़ी हुई है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 29, 2025 10:00 PM IST

What Is Preeclampsia: प्रीक्लेम्पसिया (Preeclampsia) एक जानलेवा स्थिति है जो प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं में देखी जाती है। यह स्थिति आमतौर पर 20वें सप्ताह में देखी जाती है। यह जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (gestational hypertension) या हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) का एक गम्भीर रूप है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में देखी जाती है। जैसा कि, प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा अधिक होता है। यह बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर लेवल अंदरूनी ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषकर लिवर और किडनियों को इससे सबसे अधिक डैमेज पहुंचता है।

प्रीक्लेम्पसिया क्यों है मां और बच्चे के लिए  नुकसानदायक ? (Reason Preeclampsia Is A High-Risk Pregnancy Condition)

गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. सोनल सिंघल ( Dr. Sonal Singhal, Consultant - Obstetrician & Gynaecologist, Motherhood Hospital, Gurgaon) बता रही हैं कि, अगर प्रेगनेसी में ब्लड प्रेशर लेवलको ठीक तरीके से मैनेज नहीं किया जाता तो यह प्रीक्लेम्पसिया मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रेगनेंसी में प्रीक्लेम्पसिया की वजह से ये समस्याएं हो सकती हैं-

  • प्री-टर्म बर्थ (preterm birth) या समय से पहले बच्चे का जन्म
  • लो बर्थ वेट ( low birth weight) यानि जन्म के समय बच्चे का वजन बहुत कम होना।
  • वहीं, कुछ दुर्लभ स्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

प्रीक्लेम्पसिया के लक्षण क्या हैं?- Symptoms Of Preeclampsia

डॉक्टर सिंघल के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया के जो लक्षण दिखायी देते हैं उनमें ये समस्याएं प्रमुख हैं-

  • हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure)
  • तेज सिरदर्द ( severe headaches)
  • साफ-साफ दिखायी ना देना (blurry vision)
  • अचानक से वजन बढ़ना (sudden weight gain)
  • कम मात्रा में यूरीन बनना (reduced urine output)

इन सबके अलावा कुछ महिलाओं को चेहरे पर सूजन (swelling in the face), हाथों और पैरों में सूजन (Swelling on hands, or even feet) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. सिंघल के अनुसार अगर आपको इसमें से किसी भी तरह के लक्षण दिखायी दें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

प्रीक्लेम्पसिया से बचाव के उपाय क्या हैं?- Preventive tips

मेडिकल चेकअप कराएं

प्रेगनेंसी के दौरान अपने डॉक्टर की बतायी हर बात पर ध्यान दें। प्रीक्लैम्प्सिया, थायराइड और जेस्टेशनल डायबिटीज ( gestational diabetes) जैसी स्थितियों का पता लगाने के लिए जिन भी टेस्ट्स की सलाह दी जाती है वे सभी टेस्ट कराएं।

हेल्दी वेट मेंटेन करें

अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपना वजन मेंटेन करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, अपनी डाइट में शामिल की जाने वाली चीजों के बारे में जानकारी इकट्ठा करें।

  • प्रेगनेंसी के दौरान जंक फूड खाने से बचें। इसी तरह तीखा, मसालेदार, प्रोसेस्ड और कैन्ड फूड खाने से बचें।
  • प्रेगनेंसी में स्मोकिंग और अल्कोहल के सेवन से बचें।
  • अपना ब्लड प्रेशर लेवल रोज चेक करें और डॉक्टर से इस बारे में बातचीत करते रहें।

स्ट्रेस को मैनेज करें।

अपने डॉक्टर द्वारा दी गयी दवाओं और सप्लीमेंट्स का सेवन समय पर करें।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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