
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : May 13, 2026 4:38 PM IST
Medically Verified By: Dr. Indira Sarin
gestational hypertension
What is gestational hypertension : प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं का ब्लड प्रेशर काफी ज्यादा हाई रहता है, जिसे मेडिकल भाषा में गैस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है। हम में से कई लोगों का यह मानना है कि डिलीवरी के बाद यह समस्या अपने आप खत्म हो जाती है, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर का असर लंबे समय तक महिलाओं की सेहत पर पड़ सकता है। अगर समय रहते इसकी निगरानी और सही देखभाल न की जाए, तो आगे चलकर हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। आइए वीडियो के जरिए डॉ. इंदिरा सरीन, कंसल्टेंट यूरोगायनोकोलॉजी और पेल्विक फ्लोर रिकंस्ट्रक्शन सर्जन, नारायणा हॉस्पिटल से विस्तार से समझते हैं इस बारे में-
जब प्रेग्नेंसी के 20वें सप्ताह के बाद किसी महिला का ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ने लगे, तो उसे गैस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है। यह स्थिति उन महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, जिन्हें पहले से हाई बीपी की समस्या नहीं होती। कई मामलों में यह हल्का होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह प्रीक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है।
डॉक्टर कहते हैं कि डिलीवरी के बाद ब्लड प्रेशर नॉर्मल हो सकता है, लेकिन शरीर पर उसका असर पूरी तरह खत्म नहीं होता। जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी रहा हो, उनमें भविष्य में क्रॉनिक हाइपरटेंशन यानी स्थाई हाई ब्लड प्रेशर का खतरा अधिक रहता है।
Pregnancy Long Term Impact
इसके अलावा, ऐसी महिलाओं में हार्ट की बीमारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क भी सामान्य महिलाओं की तुलना में ज्यादा पाया गया है। कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि गैस्टेशनल हाइपरटेंशन भविष्य में मेटाबॉलिक सिंड्रोम और डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है।
कुछ महिलाओं में गैस्टेशनल हाइपरटेंशन होने की संभावना अधिक होती है, जो निम्न हैं
ऐसी महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच और डॉक्टर की निगरानी की जरूरत होती है।
गैस्टेशनल हाइपरटेंशन कई बार बिना लक्षण के भी हो सकता है, लेकिन कुछ संकेत गंभीर हो सकते हैं, जैसे-
इन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में आपको फौरन अपने डॉक्टर की सलाह की जरूरत है।
डॉक्टर कहते हैं कि डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराते रहना चाहिए। हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कम रखना दिल की सेहत के लिए जरूरी है। अगर डॉक्टर दवाएं देते हैं, तो उन्हें समय पर लेना भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।
Dislaimer : डॉक्टर का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी को सिर्फ अस्थाई समस्या समझना सही नहीं है। समय रहते सावधानी और लाइफस्टाइल में बदलाव करके फ्यूचर की कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।