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Written By: Editorial Team | Published : November 22, 2017 2:23 PM IST
प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाली डायबिटीज़ या जेस्टेशनल डायबिटीज़ (Gestational diabetes) एक ऐसी स्थिति है जहां डायबिटीज़ ना होने के बावजूद प्रेगनेंसी के समय महिला का ब्लड ग्लूकोज़ लेवल बढ़ जाता है। जेस्टेशनल डायबिटीज़ को अच्छी तरह कंट्रोल ना करने से जन्म के समय बच्चे का वजन अधिक हो सकता और जो वैजाइनल बर्थ को मुश्किल बना सकता है जिससे सी-सेक्शन डिलीवरी की ज़रूरत बढ़ सकती है। यही नहीं इसकी वजह से हाई बीपी, प्रीटरम बर्थ और गर्भपात या मिसकैरीज़ की संभावना भी बढ़ जाती है। जन्म के बाद बच्चों को विशेष देखभाल की ज़रूरत पड़ती है क्योंकि इस समय बच्चों का ग्लूकोज़ लेवल बहुत कम होने और पीलिया होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है। सभी महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज़ का पता लगाने के लिए जांच करानी चाहिए और अगर उनमें जेस्टेशनल डायबिटीज़ का पता लगता है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिनके बारे में बता रही हैं डॉ. कुसुम साहनी (सीनियर कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट प्रसूति एवं गायनोकॉलॉजी, फोर्टिस ला फेम)
1. डायट: जेस्टेशनल डायबिटीज़ की ज़्यादातर मरीज़ अपने भोजन में बदलाव करके और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाकर अपने ग्लूकोज़ लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं। एक अच्छे डायटिशन की सलाह लेना बेहतर है। दिन में 3 बार खाना खाने की बजाय, आप 6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं और कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें। कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की जगह सिंपल कार्बोहाइड्रेट लें। प्रोटीन का सेवन बढ़ा दें क्योंकि यह आपके भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आहार में फाइबर बढ़ाने से भी ग्लूकोज़ का स्तर नियंत्रित करने में मदद होती है।
2. कसरत: नियमित शारीरिक गतिविधि भी ग्लूकोज़ के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है। हर बार खाना खाने के बाद 20-30 मिनट चलना अच्छा होता है। चलने का एक अन्य लाभ यह है कि यह गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त वजन को बढ़ने नहीं देता है और आपको सक्रिय भी रखता है। अगर कोई और समस्या ना हो, तो इस तरह की गतिविधियां आपको और आपके बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाएगी। आप चाहें तो धीरे-धीरे इनका समय बढ़ा सकती हैं।
3. ब्लड शुगर चेक करते रहना: नियमित रूप से आपके ब्लड शुगर लेवल को चेक करना भी डिलीवरी के लिए ज़रूरी है। आपका डॉक्टर आपको बताएगा कि कब-कब और कितनी बार ब्लड शुगर लेवल चेक करना है। अगर डायट और एक्सरसाइज से आपका ग्लूकोज़ लेवल कंट्रोल नहीं होता तो आपको दवाइयां (गोलियां या इंजेक्शन इंसुलिन) लेनी पड़ती हैं। बच्चे के जन्म के बाद भी ग्लूकोज़ लेवल सामान्य होने तक चेक करते रहना चाहिए। बच्चे के ग्लूकोज़ के स्तर को भी जन्म के 24 घंटों के भीतर जांच लेना चाहिए। आगे चलकर डायबिटीज़ का ख़तरा न बढ़ जाए इसलिए एक हेल्दी वेट मेंटेन करें। अच्छी डायट और एक्सरसाइज फॉलो करें।
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अनुवादक: Sadhana Tiwari
चित्र स्रोत: Shutterstock Images.