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वर्ल्ड ओबेसिटी डे: जानें भ्रूण के लिए कितना खतरनाक है जेस्टेशनल डायबिटीज़ और मोटापा!

जेस्टेशनल डायबिटीज़ वाली महिलाओं के बच्चों में मोटापे, दिल से जुड़ी गड़बड़ियों और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा जीवनभर के लिए होता है।

वर्ल्ड ओबेसिटी डे: जानें भ्रूण के लिए कितना खतरनाक है जेस्टेशनल डायबिटीज़ और मोटापा!
मां के अधिक वज़न का असर पेट में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है। © Shutterstock

Written by Sadhna Tiwari |Updated : October 10, 2018 4:43 PM IST

गर्भावधि मधुमेह या जेस्टेशनल डायबिटीज़, हाइपरटेंशन से लेकर मोटापा और एनीमिया , जैसी परेशानियां गर्भावस्था के दौरान बच्चे की सेहत पर असर डाल सकती हैं। भारती हॉस्पिटल के कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और साउथ एशियन फेडरेशन ऑफ एंडोक्राइन सोसायटीज के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. संजय कालरा बता रहे हैं कुछ ऐसी ही समस्याओं के बारे में जो गर्भावस्था के दौरान आपके बच्चे की सेहत पर असर डाल सकती हैं।

1.जेस्टेशनल डायबिटीज़- तकरीबन 4.9% बच्चों को जेस्टेशनल डायबिटीज़ की वजह से जन्म के समय गहन देखभाल के लिए नियोनटाल इंटेंसिव केयर में रखना पड़ सकता है। जबकि 32.3% को सांस से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज़ की समस्या होती है उनके बच्चों में मोटापे, दिल से जुड़ी गड़बड़ियों और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा जीवनभर के लिए होता है।

2.जेस्टेशनल हाइपरटेंशन- यह समस्या गर्भधारण के 20वें सप्ताह के आसपास उत्पन्न होती है, जो कि चिंता का एक विषय है। जेस्टेशनल हाइपरटेंशन में गर्भनाल की रक्त कोशिकाओं में ऑक्सिजन की कमी हो जाती है और भ्रूण को पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलती। जेस्टेशनल हाइपरटेंशन के कारण शिशुओं में पायी जाने वाली आम परेशानियों हैं- गर्भाशय में धीमा विकास, जन्म के समय कम वज़न, लो ब्लड शुगर और कमज़ोर मांसपेशियां। कुछ मामलों में बच्चों को किशोरावस्था की शुरुआत में हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है।

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3.माता का अधिक वज़न- गर्भावस्था में मां का वज़न अधिक होने से बच्चे को डायबिटीज़ की समस्या हो सकती है जिसके चलते मां को प्रीटर्म लेबर और बच्चे में मोटापा और डायबिटीज़ का खतरा उत्पन्न होता है। यही नहीं, प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों की मात्रा में थोड़ी-सी कमी के कारण भी बच्चे की सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है। जैसे, प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन डी की कमी के कारण न केवल बच्चे की हड्डियां कमज़ोर होती हैं बल्कि मां और बच्चे के शारीरिक विकास में भी बाधा आती है।