एक टेस्ट से अपने होने वाले बच्चे को बचा सकते हैं कई बीमारियों से

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : November 26, 2018 6:03 PM IST

प्रेगनेंसी के समय अगर कुछ सतर्कता बरती जाय तो होने वाले बच्चे को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है। बच्चा जब जन्म लेता है तो उसमें दो तरह के जींस होते हैं एक मां से और एक पिता से आता है। दोनों तरह के जींन मिलकर बच्चे को आकार देते हैं। कुछ बीमारियां बच्चे में जेनेटिक रूप से आती हैं। जैसे मां-बाप से चेहरा और शरीर को आकार मिलता है उसी तरह बीमारियां भी आ जाती हैं। लेकिन कुछ बीमारियों को हम प्रेगनेंसी के दौरान सतर्कता बरत कर होने वाले बच्चे को बचा सकते हैं। कुछ जेनेटिक डिसऑर्डर परिवार में कई पीढ़ियों से चले आते हैं। इस बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। इसके लिए जेनेटिक टेस्टिंग कराना होता है। जेनेटिक टेस्टिंग के बारे में जानते हैं कुछ खास तथ्य.......

क्या है जेनेटिक टेस्टिंग ?

होने वाले बच्चे को जेनेटिक डिसऑर्डर से बचाने के लिए किये जाने वाले टेस्ट को जेनेटिक टेस्टिंग कहते हैं। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है  कि मां-बाप में ऐसा कौन सा जीन है जो बच्चे को जेनेटिक बीमारी दे सकता है। इस टेस्टे के लिए कुछ खास नहीं करना होता है बस ब्लड के नमूने की जांच होती है।

किसे होती है जेनेटिक टेस्टिंग की ज़रुरत ?

हर किसी को जेनेटिक टेस्टिंग की ज़रूरत नहीं होती है। अगर आपके परिवार में जेनेटिक डिसऑर्डर का इतिहास है तभी आप यह जांच करवाएं।

किसे जेनेटिक टेस्टिंग जरूर कराना चाहिए ?

अगर इनमें से कोई भी जेनेटिक डिसऑर्डर आपके या आपके पार्टनर के परिवार पीढ़ियों से चला आ रहा हो तो ऐसे में आप जेनेटिक टेस्टिंग करवा सकते हैं।

  • ब्रेस्ट कैंसर
  • ओवेरियन कैंसर
  • सीलिएक रोग
  • मैक्यूलर डिजनेरेशन
  • बाइपोलर डिसऑर्डर
  • मोटापा
  • पार्किंसंस डिसीज़
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस

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