
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Updated : February 5, 2026 3:45 PM IST
Medically Verified By: Dr. Archana Dhawan Bajaj
क्या आपने हाल ही में कंसीव किया है? अगर हां, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है। लेकिन, अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं या भविष्य में करेंगी, तो इस आर्टिकल में दी गई जानकारी आपके लिए भी जानना बहुत जरूरी है। बता दें कि प्रेग्नेंसी के पूरे सफर को 3 तिमाही में बांटा जाता है और आज हम आपको पहली तिमाही के बारे में विस्तार में बताने जा रहे हैं-
जब महिला कंसीव करती है, तो यह खुशी सिर्फ एक कपल तक नहीं रह जाती। बल्कि, इसकी खुशी घर के सभी सदस्यों और रिश्तेदारों को भी होती है। प्रेग्नेंसी का पता चलना, एक ऐसा पल होता है जिसमें कपल अपने जीवन में सबसे ज्यादा खुश होता है। वहीं, अगर प्रेग्नेंसी के पूरे सफर की बात करें, तो यह हर महिला के जीवन का एक बेहद खास और भावनात्मक अनुभव होता है। हालांकि, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को हार्मोनल बदलावों की वजह से कई तरह के शारीरिक और मानसिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के पूरे सफर (9 महीने) को तीन तिमाही में बांटा गया है। इसमें सबसे पहले पहली तिमाही आती है, जो बेहद संवेदनशील होती है। पहली तिमाही में 12 सप्ताह आते हैं, यही वह समय होता है जब गर्भ ठहरता है और शिशु का विकास शुरू हो जाता है। इस दौरान सब लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि पहली तिमाही में शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं? पहली तिमाही में शिशु का कितना विकास हो जाता है? पहली तिमाही में क्या लक्षण महसूस होते हैं? आइए, नर्चर की स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज (Dr. Archana Dhawan Bajaj, Gynaecologist and IVF Expert at Nurture) से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब-
UCSF हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, भ्रूण के विकास के लिए पहली तिमाही बहुत अहम होता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही गर्भधारण से लेकर 12 सप्ताह यानी 3 महीने तक की अवधि को कहा जाता है। इस दौरान भ्रूण तेजी से विकसित होकर शिशु का शुरुआती रूप लेता है। हालांकि, इस समय गर्भपात का बेहद खतरा रता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही को बेहद नाजुक समय माना गया है, इसलिए इस दौरान विशेष ध्यान और सावधानी की जरूरत होती है प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही को, प्रेग्नेंसी का पहला चरण भी कहा जाता है। इस दौरान महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में महिला को कई तरह के लक्षणों का अनुभव होता है इस दौरान महिला को कई मेडिकल टेस्ट करवाते पड़ते हैं और शिशु का विकास भी इसी तिमाही में तेजी से होता है।

डॉ. अर्चना धवन बताती हैं, "पहली तिमाही 12 सप्ताह तक चलती है। इस दौरान महिला को कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।"
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में महिला को उल्टी और मतली जैसा अनुभव हो सकता है। उल्टी और मतली को प्रेग्नेंसी का पहला संकेत भी माना जाता है। उल्टी या मतली की समस्या दिन के किसी भी समय पर हो सकती है। ऐसा शरीर में हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है।
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में महिला को हर वक्त थकान महसूस हो सकती है। इस दौरान महिला को ज्यादा नींद आ सकती है। दरअसल, ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को गर्भस्थ शिशु को संभालने में लगा देता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में महिला को ज्यादा थकान लग सकती है।
पहली तिमाही में बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। ऐसा हार्मोनल बदलाव और बढ़ते गर्भाशय के कारण होता है।

पहली तिमाही में आपको स्तनों में बदलाव नजर आ सकते हैं। स्तन भारी और संवेदनशील महसूस हो सकते हैं। इस दौरान महिला को स्तनों में हल्का दर्द भी हो सकता है।
पहली तिमाही में हार्मोनल बदलावों की वजह से मूड स्विंग्स हो सकते हैं। इसकी वजह से महिला में चिड़चिड़ापन देखने को मिल सकता है।
पहली तिमाही में महिला को हल्का पेट दर्द हो सकता है। इसके अलावा, स्पॉटिंग होना भी नॉर्मल है। लेकिन, अगर आपको पेट में ज्यादा दर्द हो रहा है तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। इस दौरान वजाइना से व्हाइट डिस्चार्ज भी ज्यादा हो सकता है।
स्वस्थ प्रेग्नेंसी के लिए शुरुआती जांच बहुत जरूरी होती है। इस दौरान कुछ मेडिकल टेस्ट करवाए जाते हैं, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु की सेहत का पता चलता है।
जब महिला किसी महीने में महिला को पीरियड नहीं होता है, तो डॉक्टर प्रेग्नेंसी जांच के लिए यूरिन टेस्ट करवा सकते हैं। इससे गर्भ ठहरने की पुष्टि होती है।

प्रेग्नेंसी को कंफर्म करने के लिए बीटा hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन) टेस्ट को किया जाता है। इस टेस्ट की मदद से हार्मोन के स्तर का पता भी लगाया जाता है। आपको बता दें कि बीटा एचसीजी एक हार्मोन है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटा द्वारा बनता है। इस टेस्ट की मदद से गर्भावस्था की पुष्टि की जाती है।
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में ब्लड ग्रुप (A, B, AB, O) और Rh फैक्टर (+ या -) का टेस्ट कराना बहुत जरूरी होता है। अगर मां Rh नेगेटिव (-) और बच्चा Rh पॉजिटिव (+) है, तो इस स्थिति में Rh असंगति (incompatibility) हो सकती है। इससे बचने के लिए महिला को 28वें सप्ताह में एंटी-डी इंजेक्शन लगाया जाता है। यह बच्चे को एनीमिया और पीलिया से बचाता है।
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में हीमोग्लोबिन टेस्ट भी किया जाता है। हीमोग्लोबिन टेस्ट, एनीमिया का पता लगाने और मां-शिशु की सेहत की जांच के लिए बहुत जरूरी होता है। आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी में नॉर्मल हीमोग्लोबिन का स्तर 12g/gL या उससे अधिक होना चाहिए। अगर इससे कम हीमोग्लोबिन होता है, तो इसे एनीमिया माना जाता है।

पहली तिमाही में महिला डायबिटीज और थायराइड का टेस्ट भी किया जाता है। शुगर और थायराइड टेस्ट, मां और बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। अगर डायबिटीज और थायराइड का समय पर पता चल जाता है, तो इससे समय से पहले प्रसव और गर्भकालीन डायबिटीज से बचा जा सकता है।
पहली तिमाही में संक्रमण की जांच भी होती है। इस अवस्था में हेपेटाइटिस बी, एचआईवी और सिफिलिस आदि के टेस्ट किए जाते हैं। इससे मां और शिशु को प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
पहली तिमाही में आमतौर पर 6 से 8 सप्ताह में अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इससे गर्भ की स्थिति, हार्टबीट आदि की जांच की जाती है।

पहली तिमाही में शिशु का विकास बहुत तेजी से होता है। जानें, सप्ताह के हिसाब से शिशु का कब, कितना विकास हो जाता है-
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में आपकी डाइट बेहद खास होनी चाहिए। इस दौरान आपको अपनी डाइट में प्रोटीन, फाइबर और सभी विटामिन्स जरूर शामिल करने चाहिए।

प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में महिलाएं अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क हो जाती हैं। वे अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने लगती हैं। लेकिन, इस दौरान आपको कुछ सावधानियां भी जरूर अपनानी चाहिए।
डॉ. अर्चना धवन बताती हैं, "अगर प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में आपको पेट में तेज दर्द, अधिक रक्तस्त्राव, तेज बुखार, बार-बार चक्कर और उल्टी आने जैसी समस्याएं हो तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये किसी जटिलता का संकेत हो सकता है।" वह आगे कहती हैं कि प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही बेहद नाजुक होती है। यह एक नई जिंदगी की मजबूत नींव रखती है। इस दौरान नियमित जांच बहुत जरूरी है। इससे मां और शिशु, दोनों की सेहत सुरक्षित रहेगी और शिशु का विकास भी सामान्य तरीके से होता रहेगा।

Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।