गर्भावस्था में महिलाओं को अपना ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है। खासकर यात्रा करते समय उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। सफर का तनाव आपको थका सकता है और इससे भ्रूण पर असर पड़ सकता है। इस दौरान लंबा सफर भी घातक हो सकता है। डॉक्टर पहली तिमाही में यात्रा नहीं करने की सलाह देते हैं। वैसे आप दूसरी तिमाही यानि चौथे से सात महीने के बीच सफर कर सकती हैं लेकिन फिर भी आपको इससे बचना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
यात्रा पर जाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह ले लें। चलिए जानते हैं यात्रा के लिए दूसरी तिमाही का समय क्यों अच्छा है।
पहली तिमाही में शिशु के प्रमुख अंग विकसित हो जाते हैं इसलिए दूसरी तिमाही में यात्रा के दौरान गर्भपात की कम संभावनाएं हैं।
आपके मोर्निंग सिकनेस और मतली के लक्षण भी इस अवस्था तक लगभग सही होने लगते हैं और आप सड़क या हवाई यात्रा के दौरान खुद को बीमार महसूस नहीं करती हैं।
प्रारंभिक थकान और कमजोरी के चरण के बाद आप इस अवस्था में आपको ऊर्जा मिलने लगती है जिससे आपको आसानी से यात्रा करने में मदद मिलती है।
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प्रेगनेंसी के दौरान आप पहले ही जरूरी वैक्सीन ले चुकी होती हैं जिससे आप इन्फेक्शन के खिलाफ सेफ होती हैं। हालांकि लंबी दूरी की यात्रा करते समय आपको साफ-सफाई, खाने, स्थान आदि का ध्यान रखना चाहिए और खाने से पहले व बाद में हाथों को धोना चाहिए। क्योंकि आपकी इम्युनिटी कमजोर होती है और आपको इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है।
हालांकि दूसरी तिमाही के बाद यानी सातवें महीने के बाद यात्रा करने के बाद समय से पहले डिलीवरी की संभावना तेजी से बढ़ जाती है।
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