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Written By: Jitendra Gupta | Updated : October 28, 2020 6:21 PM IST
गर्भावस्था के 20वें सप्ताह में इन दवाओं का सेवन बच्चे की किडनी को कर सकता है खराब, FDA ने जारी की चेतावनी
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिन्सट्रेशन ने नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) के लेबल में बदलाव की आवश्यकता की बात कही है। लेबल में बदलाव की ये घोषणा ड्रग सेफ्टी कम्युनिकेशन में की गई है। इन बदलावों की नई लेबलिंग करते वक्त ये बताना होगा कि अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान 20 या उससे अधिक सप्ताह के बाद इन दवाओं का सेवन करती है तो ये गर्भ में पल रहे बच्चे में दुर्लभ या फिर गंभीर किडनी की समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके साथ ही बच्चे में एमनियोटिक द्रव (amniotic fluid) का स्तर भी कम हो सकता है और महिला को गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) में आइबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन, डाइक्लोफेनेक, और सेलेकॉक्सिब जैसी दवाएं शामिल हैं। बरसों से लोग कई स्वास्थ्य स्थितियों में दर्द और बुखार के इलाज के लिए इन दवाओं का सेवन करते आ रहे हैं। ये दवाईयां या तो डॉक्टर के पर्चे पर लिखी होती है या फिर कुछ लोग इन्हें मेडिकल शॉप से खरीदना पसंद करते हैं।
दरअसल ये दवाएं शरीर में कुछ रसायनों के उत्पादन को रोक कर काम करती हैं, जो सूजन का कारण बनते हैं। एस्पिरिन भी एक नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा है हालांकि, ये सलाह एस्पिरिन (81 मिलीग्राम) के लो डोज पर लागू नहीं होती हैं। लो डोज वाली एस्पिरिन गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं के लिए एक जरूरी उपचार हो सकता है और इसे डॉक्टर की सलाह के साथ ही लिया जाना चाहिए।
एफडीए के सेंटर फॉर ड्रग इवैल्यूएशन एंड रिसर्च की कार्यवाहक निदेशक, पैट्रीजिया कैवाजोनी का कहना है कि यह गर्भवती महिलाओं के लिए बहुती ही जरूरी है कि वे गर्भावस्था के दौरान ली जानी वाली सभी दवाओं के लाभ और जोखिम को भलीभांति समझें। एजेंसी अपनी ओर से अपनी रेगुलेटरी अथॉरिटी का उपयोग कर महिलाओं और उनके डॉक्टर्स को गर्भवास्था के 20वें सप्ताह या उसके आस-पास इन नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं के जोखिमों के बारे में सूचित कर रही है।
ड्रग सेफ्टी कम्युनिकेशन में अजन्मे बच्चे में किडनी संबंधी समस्याएं या एमनियोटिक द्रव की कमी को गर्भावस्था के दौरान नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं के साथ जोड़कर देखा गया है। एजेंसी ने इस तरह के मामलों की समीक्षा की और मेडिकल साहित्य की समीक्षा की, जिसके बाद ये चेतावनी जारी की गई है।
गर्भावस्था के लगभग 20 सप्ताह बाद, अजन्मे बच्चे की किडनी अधिकांश एमनियोटिक द्रव का उत्पादन करना शुरू कर देती है, इसलिए इस द्रव का निम्न स्तर भ्रूण में किडनी की समस्याएं का कारण बन सकता है। एमनियोटिक द्रव के निम्न स्तर को ओलिगोहाइड्रामनिओस (oligohydramnios) जैसी चिकित्सा स्थिति के रूप में भी जाना जाता है। इसका पता दवा लेने के कुछ दिन या हफ्ते के बाद लगाया जा सकता है, लेकिन अगर आप नियमित रूप से इन दवाओं का सेवन करते हैं तो दो दिनों के भीतर भी इसका पता लगाया जा सकता है। यह स्थिति आमतौर पर तब दूर हो जाती है जब गर्भवती महिला नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं लेना बंद कर देती हैं।