
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : December 10, 2024 3:01 PM IST
Effects of air pollution in pregnancy: आजकल बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे वह श्वसन संबंधित समस्या हो या एलर्जी और अस्थमा का खतरा, लोगों में प्रदूषण के कारण इस प्रकार की समस्या बढ़ रही हैं। इसमें सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता गर्भवती महिलाओं और बच्चों को है। ऐसे में आज के लेख में हम प्रदूषण के कारण छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव और सावधानी के बारे में समझेंगे। डॉ. प्रिया गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां, दी जिसके बारे में हर किसी को जानना चाहिए।
चाहे वह छोटा शहर हो या फिर बड़ा शहर हर जगह प्रदूषण ने घातक रूप ले लिया है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार के खतरों की संभावना बनी रहती है, जैसे: उन्हें प्रदूषण के कारण गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है, जन्म दोष का खतरा बढ़ सकता है, गर्भावस्था में जटिलताएं बढ़ सकती हैं, प्रदूषण के कारण बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है। तो वहीं दूसरी तरफ बच्चों के लिए भी इससे बहुत ही हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं, जैसे: प्रदूषण के कारण बच्चों में श्वसन समस्याएं बढ़ सकती हैं, एलर्जी और अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है, बच्चों में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए उन्हें यह समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि क्या करें और क्या ना करें?
प्रदूषण के खतरे से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इन खास बातों पर ध्यान रखना चाहिए:
1. मास्क पहनना अनिवार्य: इस समय गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मास्क अवश्य पहन कर रहना चाहिए। यदि वे घर से बाहर निकलें, प्रदूषण वाली जगह पर जाएं तो मास्क पहनना ना भूलें।
2. स्वच्छ हवा में सांस लें: प्रदूषण वाले स्थानों से दूर रहें और अधिक पेड़ पौधे लगे हुए हरे भरे क्षेत्र के पास जाएं, यह ध्यान रखें कि जहां प्रदूषण हो वहां पर मुंह ढक कर रखना है या फिर मास्क का प्रयोग अवश्य करना है। स्वच्छ हवा में सांस लें और स्वस्थ रहें।
3. समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहें: कभी-कभी सांस से संबंधित समस्या होने लगती है और हम ध्यान नहीं दे पाते, परंतु यह समस्या प्रदूषण के कारण ही हो रही होती है। ऐसे में आपको समय-समय पर डॉक्टर से संपर्क करते रहना चाहिए और अपनी जांच कराते रहना चाहिए।
4. अपने खान-पान पर भी ध्यान रखें: प्रदूषण से तो बचें हीं साथ ही अपने खान-पान पर भी ध्यान रखें, पोषण युक्त आहार लें, खासकर हरी सब्जियां, दूध, दही, अंडा, मांस का सेवन करते रहें। इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
1. प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें: दिन के समय में आप इंडस्ट्रियल इलाके, अधिक ट्रैफिक वाले इलाके और प्रदूषण वाले क्षेत्रों से दूरी बनाकर रहें।
2. सुबह और शाम के समय बाहर जाने से बचें: बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस समय बढ़ते प्रदूषण के चलते सुबह और शाम को बाहर निकलने से बचना चाहिए। हालांकि वह अपनी सेहत और खेल के लिए ही बाहर निकलते हैं परंतु जब अधिक प्रदूषण हो तब वे ऐसा ना करें।
3. प्लास्टिक का उपयोग न करें: प्लास्टिक का उपयोग प्रदूषण के खतरे को और बढ़ाता है, ऐसे में प्लास्टिक के उपयोग से बचना चाहिए।
4. धूम्रपान करने वालों से दूर रहें: इस समय गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को धूम्रपान करने वालों से दूर रहना चाहिए। क्योंकि एक तरफ बढ़ता प्रदूषण और दूसरी तरफ धूम्रपान के कारण होने वाले नुकसान से उन्हें जल्दी समस्या उत्पन्न हो सकती है।