
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : January 28, 2026 1:16 PM IST
Medically Verified By: Dr. Lipi Sharma
“एक नया जीवन इस दुनिया में लाने की क्षमता सिर्फ एक स्त्री रखती है” यह सिर्फ एक कहावत ही नहीं है बल्कि एक “अटल सच” है जिसे बदला नहीं जा सकता है।
लेकिन यह बात भी सच है कि मां बनना भी आसान नहीं है और शायद जब प्रकृति ने महिलाओं को यह शक्ति दी होगी तभी इतना ज्यादा दर्द सहन करने की क्षमता भी दी होगी। अब कुछ लोग यह कहने लगा जाएंगे कि आजकल तो मशीनों की मदद से और दवाओं की मदद से प्रेगनेंसी को काफी आसान बना दिया है, तो आपको जवाब देना होगा कि आजकल खराब जीवनशैली, प्रदूषण, काम के दबाव से बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य और न जाने कितनी स्थितियों के कारण प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लिकेशन आने लगी हैं। सरल शब्दों में कहें तो जितना मेडिकल सांइस एडवांसमेंट से प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को फायदा मिला है, उतना ही कुछ पहलुओं के कारण प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ी हैं।

यही कारण है कि आज मेडिकल साइंस इतना आगे पहुंच गया है लेकिन फिर भी महिलाओं में प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याएं होती रहती हैं। कुछ महिलाएं कंसीव ही नहीं कर पा रही हैं तो वहीं कुछ की प्रेगनेंसी ठहर ही नहीं पाती हैं वहीं कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान गंभीर कॉम्प्लिकेशंस का सामना करना पड़ता है। प्रेगनेंसी व उससे जुड़ी कॉम्प्लिकेशंस के बारे में तो पता है। लेकिन एक बच्चा होने के बाद दूसरी बार कंसीव न कर पाने के पीछे क्या हो सकता है।
ज्यादातर लोगों को सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन यह सुना हुआ है कि कुछ महिलाओं को एक बच्चा होने के बाद कई बार दूसरी या फिर तीसरी बार प्रेग्नेंट होने में दिक्कत होने लगती है। दरअसल, उसी को ही सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है। आज तेजी से बिगड़ती जा रही जीवनशैली, खराब खानपान और बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए सेकेंडरी इनफर्टिलिटी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसके बारे में हर किसी को पता होना जरूरी है।

दरअसल यह भी एक मेडिकल हेल्थ कंडीशन है, जिसे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है और इसमें पहला गर्भधारण ठीक हो जाता है, लेकिन दूसरी बार गर्भ ठहरने में दिक्कत आने लगती है।
इस स्थिति को सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है। इसका मतलब है कि पहले एक बार गर्भधारण हो चुका है, लेकिन अब दोबारा गर्भ ठहरने में दिक्कत आ रही है। समय पर इसकी जांच कराकर इलाज शुरु कर दिया जाए तो फिर से मां बनना संभव हो सकता है।
इनफर्टिलिटी की तरह की सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के भी कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन इनमें सबसे प्रमुख कारण महिला की उम्र बढ़ना होती है। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ ओवरी में अंडों की संख्या कम होने लगती है, जिसके कारण सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है।
अब आपको इस मैथ को समझना होगा कि पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में लगभग 5 साल का अंतर होता है, तो इसका मतलब है कि पहली प्रेगनेंसी के बाद ओवरी में इतने अंडे कम हो गए हैं कि दूसरी प्रेगनेंसी का समय आते-आते उनकी संख्या कम होने लगी है।

इसके अलावा भी कई अन्य कारण हो सकते हैं जिनके कारण दूसरी बार प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आने लगती है जैसे हार्मोनल असंतुलन होना जिसमें महिलाओं के शरीर में सही और सेफ प्रेगनेंसी के लिए सही हार्मोनल बैलेंस होना जरूरी है और ऐसा न होने पर सेकेंडरी इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। पीसीओएस होना जिसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम भी कहा जाता है और इसमें महिलाओं में होने वाली ऐसी बीमारी है, जिसके कारण प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आने लगती है और कई बार यह पहली प्रेग्नेंसी के बाद ही विकसित होता है। थायराइड के रोग जिसमें किसी महिला की थायराइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर पा रही है, तो इससे भी हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है और उसके कारण सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ता है। फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज उदाहरण के लिए पहली प्रेगनेंसी सही से होने के बाद कई बार बाद में भी फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज आ सकती है, जिससे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी विकसित होती है।
इसके अलावा अगर किसी महिला का पहली प्रेगनेंसी के बाद ज्यादा वजन बढ़ गया है, तो भी कंसीव करने में दिक्कत हो सकती है और सेकेंडरी इनफर्टिलिटी बन जाती है। वहीं जो महिलाएं लंबे समय से तनावग्रस्त हैं, धूम्रपान करती हैं या फिर जीवनशैली से जुड़ी कोई अन्य गलत आदत है तो भी सेकेंडरी इनफर्टिलिटी बन सकती है।
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का अगर समय रहते और सही से इलाज किया जाए तो ज्यादातर मामलों में इसका इलाज संभव हो जाता है। इसलिए लक्षण महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इसलिए हल्के से लक्षण महसूस होते ही डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि डॉक्टर आपके लक्षणों की जांच कर सकें और जरूरत पड़ने पर कुछ टेस्ट कर सकें। जांच आदि करने के बाद अगर सेकेंडरी इनफर्टिलिटी डायग्नोस हो जाती है, तो डॉक्टर समय रहते स्थिति के अंदरूनी कारण से अनुसार इलाज शुरु कर देते हैं।
साथ ही डॉक्टर आपको कुछ सलाह भी देंगे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी होने का खतरा कम हो जाता है। अगर आपको सेकेंडरी इनफर्टिलिटी है, तो संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव कम करें और शरीर के वजन के कंट्रोल रखने से इनफर्टिलिटी का रिस्क कम हो जाता है।
जिस प्रकार इनफर्टिलिटी महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकती है, उसी प्रकार सेकेंडरी इनफर्टिलिटी भी है। लेकिन पुरुषों के मामले में इसे उदाहरण के रूप में समझना होगा। जैसे पहली प्रेगनेंसी के समय किसी पुरुष की स्पर्म क्वालिटी सही है, जबकि दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान यानी कुछ साल बाद उसका बहुत ज्यादा वजन बढ़ने, हार्मोन से जुड़ी समस्या होने या फिर किसी अन्य कारण से उसकी स्पर्म क्वालिटी खराब हो जाती है तो ऐसे में वह सेकेंडरी इनफर्टिलिटी से ग्रस्त हो जाता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।