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Pregnancy stress
Harmful effects of stress during pregnancy : प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए आसान नहीं होती है। कुछ महिलाओं को पूरे नौ महीने उल्टी और एसिडिटी जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है, तो कुछ को अन्य समस्याएं होती हैं। पैरों में सूजन, उल्टी, खाना खाने का मन न करना और कम या ज्यादा ब्लड प्रेशर ये सभी प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली आम समस्याएं हैं। कुछ महिलाओं को तनाव भी हो जाता है। हालांकि, तनाव की स्थिति होने वाले बच्चे के लिए थोड़ी मुश्किल भरी हो सकती है। दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान मां द्वारा लिए जाने वाले तनाव की वजह से होने वाला बच्चा हार्ट प्रॉब्लम्स के साथ पैदा हो सकता है।
डॉक्टर्स की मानें, तो प्रेग्नेंसी के दौरान मां का तनाव (एंग्जायटी) बच्चे के दिल के विकास को बाधित कर सकता है। इससे बच्चा जन्मजात हार्ट डिजीज (CHD) से पीड़ित हो सकता है। इसके अलावा, जब बच्चा बड़ा होता है तो उसे हार्ट प्रॉब्लम्स होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में होने वाली मां को तनाव नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह तनाव हार्मोन यानी कोर्टिसोल को बढ़ाकर भ्रूण के दिल की मांसपेशियां और रक्त वाहिकाओं के विकास में बाधा डालता है, जिससे हार्ट रेट ऊपर-नीचे होता रहता है, जो भविष्य में दिल की समस्याओं को और ज्यादा बढ़ा सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंट लेडी को तनाव को कंट्रोल करना जरूरी होता है।
जब प्रेग्नेंसी के दौरान लेडी तनाव लेती है, तो इससे होने वाली मां के शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) जैसा स्ट्रेस हार्मोन बढ़ताहै, जो प्लेसेंटा (Placenta) के ज़रिए भ्रूण तक पहुंचता है। इससे बच्चे के दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इससे ब्लड वेसेल्स सिकुड़ती हैं।
अगर प्रेग्नेंट वुमन स्ट्रेस लेती है, तो इससे तंत्रिका तंत्र का विकास प्रभावित होता है, जिससे भ्रूण का हार्ट रेट (Heart Rate Variability - HRV) कम हने लगता है, जो बच्चे की तनाव से निपटने की क्षमता को कमजोर करता है, साथ ही यह दिल की हेल्थ के लिए भी अच्छा नहीं होता है।
मां के द्वारा लिए गए तनाव से भ्रूण में एंडोथेलिन-1 (Endothelin-1) जैसे रसायन बढ़ सकते हैं, जो ब्लड वेसेल्स को संकुचित करते हैं। इससे दिल पर दबाव बढ़ता है, जिससे हार्ट प्रॉब्लम्स के बढ़ने का जोखिम भी बढ़ सकता है।