
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Preethi Reddy G
IVF after 35
उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों को फर्टिलिटी की चिंता काफी ज्यादा होने लगती है। क्योंकि अक्सर महिलाओं को कहा जाता है कि उम्र के साथ एग क्वालिटी खराब होने लगती है। इस विषय पर बर्थराइट फर्टिलिटी बाय रेनबो हॉस्पिटल्स की इंसर्टिलिटी कंसल्टेंट डॉ. प्रीति रेड्डी जी का कहना है कि फर्टिलिटी क्लीनिक में आने वाली कई महिलाओं के मन में एक सवाल बार-बार उठता है, क्या 35 साल की उम्र पार करने के बाद मां बनने के लिए सिर्फ IVF ही एकमात्र ऑप्शन बचता है? उम्र और फर्टिलिटी को लेकर कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन हर जानकारी सही नहीं होती। सच यह है कि 35 के बाद एग्स की संख्या और गुणवत्ता में गिरावट जरूर आती है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि नैचुरली गर्भधारण नहीं किया जा सकता है या फिर IVF ही आखिरी रास्ता है।
हर महिला जन्म से ही सीमित संख्या में एग्स लेकर पैदा होती है। उम्र बढ़ने के साथ इनकी संख्या धीरे-धीरे कम होती जाती है। 20 से 30 साल की उम्र तक यह गिरावट अपेक्षाकृत धीमी रहती है, लेकिन 35 साल के बाद एग्स की संख्या और गुणवत्ता दोनों तेजी से प्रभावित होने लगती हैं।
egg quality and quantity (ChatGPT)
सिर्फ एग्स की संख्या ही नहीं, उनकी क्रोमोसोमल गुणवत्ता भी उम्र के साथ बदलती है। बढ़ती उम्र में क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताओं का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है और मिसकैरेज का जोखिम बढ़ सकता है।
डॉ. प्रीति का कहना है कि इस विषय को लेकर सबसे ज्यादा गलतफहमी यहीं होती है। 35 साल कोई ऐसी सीमा नहीं है, जिसके बाद प्राकृतिक रूप से गर्भधारण असंभव हो जाए। हर महिला का ओवेरियन रिजर्व अलग होता है। यह सिर्फ उम्र पर नहीं, बल्कि जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है। इसलिए उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर आमतौर पर AMH टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के जरिए ओवेरियन रिजर्व का आकलन करते हैं।
कई महिलाएं 35 वर्ष की उम्र के बाद भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर लेती हैं। वहीं कुछ महिलाओं को ओव्यूलेशन ट्रैकिंग, ओव्यूलेशन इंडक्शन या IUI (Intrauterine Insemination) जैसी कम इनवेसिव तकनीकों से भी सफलता मिल सकती है।
डॉ. प्रीति का कहना है कि IVF की सलाह तब दी जाती है, जब ओवेरियन रिजर्व काफी कम हो, फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक हों, पुरुष में इंफर्टिलिटी की परेशानी हो या अन्य उपचार सफल न रहे हों। इसलिए IVF एक प्रभावी विकल्प जरूर है, लेकिन हर महिला के लिए पहला या एकमात्र विकल्प नहीं होता।

अगर कोई महिला 30-35 की उम्र में कंसीव नहीं करना चाह रही है, तो एग फ्रीजिंग का ऑप्शन उनके लिए बेस्ट हो सकता है। क्योंकि यह भविष्य में मां बनने का एक सुरक्षित ऑप्शन होता है। क्योंकि एग्स की गुणवत्ता उम्र के साथ घटती है, इसलिए कम उम्र में एग्स फ्रीज कराने से भविष्य में स्वस्थ एग्स मिलने की संभावना अधिक रहती है। डॉक्टर का कहना है कि 20 के अंतिम वर्षों से लेकर 30 की शुरुआती उम्र एग फ्रीजिंग के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मुख्य रूप से कुछ महिलाओं के लिए यह काफी उपयोगी होता है, जैसे-
इस प्रक्रिया की शुरुआत डॉक्टर से परामर्श, हार्मोन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से होती है। इसके बाद करीब 10–12 दिनों तक हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि एक साथ कई एग्स विकसित हो सकें। फिर एक छोटी-सी प्रक्रिया के जरिए एग्स निकाले जाते हैं और विट्रिफिकेशन तकनीक से उन्हें सुरक्षित फ्रीज कर दिया जाता है।
भारत के ART Regulations, 2021 के अनुसार, एग्स को 10 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेष परिस्थितियों में संबंधित प्राधिकरण की अनुमति से इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।
एग फ्रीजिंग की सफलता इस बात पर सबसे ज्यादा निर्भर करती है कि एग्स किस उम्र में फ्रीज किए गए थे। कम उम्र में फ्रीज किए गए एग्स से भविष्य में सफल प्रेगनेंसी की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि एग फ्रीजिंग प्रेगनेंसी की गारंटी नहीं देता, बल्कि भविष्य में मां बनने के विकल्प और संभावनाओं को बेहतर बनाता है। बेहतर परिणाम के लिए कई बार एक से अधिक एग्स या एक से अधिक साइकल की जरूरत पड़ सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ एग क्वालिटी में गिरावट आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन 35 साल के बाद IVF ही एकमात्र विकल्प है, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। हर महिला की फर्टिलिटी अलग होती है और सही उपचार उसकी मेडिकल स्थिति, ओवेरियन रिजर्व और प्रेगनेंसी प्लानिंग पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।